फतेह लाइव, रिपोर्टर.


टाटा अमृतसर जालियांवाला बाग ट्रेन को कुहासे के कारण रेलवे ने दिसम्बर से फरवरी तक रद्द करने का ऐलान किया है. 18103 ट्रेन 2 दिसंबर से 26 फरवरी तक, जबकि 18104 4 दिसंबर से 28 फरवरी तक रद्द कर दी गई है. इस खबर को सबसे पहले फतेह लाइव ने प्रकाशित किया था. खबर प्रकाशित होने के बाद पंजाब और उत्तरप्रदेश के यात्रियों में रोष व्याप्त है. खासकर सिख समुदाय ने इसे लेकर रेलवे के प्रति नाराजगी जाहिर की है. इसे गंभीरता से लेते हुए झारखंड सिख समन्वय समिति ने विरोध जताने का फैसला लिया है. इसकी रणनीति बनाई जा रही है. समिति के संरक्षक एवं सीजीपीसी के पूर्व प्रधान गुरमुख सिंह मुखे ने कहा कि ट्रेन बंद किये जाने का विरोध जल्द ही चक्रधरपुर में डीआरएम के समक्ष करेंगे. जरूरत पड़ने पर कोलकाता गार्डनरीच में रेल जीएम से मिलकर अपनी बातों को रखा जायेगा.
वहीं ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्वी भारत के प्रधान सतनाम सिंह गंभीर ने कहा कि वह इस मामले में चुप नहीं रहने वाले. हर बार मौसम का पूर्वानुमान लगाकर रेलवे इस ट्रेन को बंद कर सिखों के साथ सौतेला व्यवहार करने का कार्य करता है. आखिर रेलवे के पास कौन सी ऐसी जादुई छड़ी या फिर तकनीक है, जिसके सहारे हर साल मौसम का पता लगाकर ट्रेन जालियांवाला बाग ट्रेन को रद्द कर देती है. उस तकनीक का उपयोग रेल हादसे रोकने में क्यों नहीं किया जाता.
जेम्को आजादबस्ती गुरुद्वारा के प्रधान जगदीश सिंह जग्गा ने मामले में आक्रोश जताते हुए सभी गुरुद्वारा कमेटियों को विरोध दर्ज कराने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि सिखों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाना बहुत बड़ी साजिश है. सभी अपनी गुटबाजी भुलाकर एक मंच से अपना विरोध दर्ज करें.
झारखंड सिख समन्वय समिति के प्रधान तारा सिंह, महासचिव जसबीर सिंह पदरी, सीजीपीसी के पूर्व महासचिव जसवंत सिंह भोमा, मानगो के पूर्व प्रधान इन्दर सिंह इन्दर, समिति के बलजीत सिंह, अवतार सिंह भाटिया, गुरदीप सिंह काके, दलजीत सिंह बिल्ला ने कहा कि रेलवे अपने फैसले को नहीं बदलता है तो आपसी विचार कर हर हद को पार करके आंदोलन जारी किया जायेगा. सभी सिख पदाधिकारियों ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री वन्दे भारत ट्रेंनें चलवा रहे हैं और दूसरी ओर आम लोगों के लिए पूर्व से चलाई जा रही ट्रेनों को रद्द कर दिया जाता है. स्थानीय सांसद को भी इस बाबत अवगत कराया जायेगा.