भाषाविद डॉ मित्रेश्वर अग्निमित्र, व्य़ाकरणाचार्य बालमुकुंद चौधरी, व्याकरणविद डॉ शशिभूषण मिश्र और व्याकरणाचार्य एवं कंप्यूटर विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ कौस्तुभ सान्याल रहेंगे मौजूद

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

संस्कृत व्याकरण के जनक महर्षि पाणिनि को नये (वर्तमान) युग में आम भारतीय जनमानस में फिर से स्थापित करने के उद्देश्य से पाणिनि उत्सव समिति 14 दिसंबर को एक दिवसीय पाणिनि उत्सव का आयोजन कर रही है। यह आयोजन पीएम श्री उत्क्रमित पीपुल्स अकादमी +2 विद्यालय, न्यू बाराद्वारी के कालिदास सभागृह में होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और उद्घाटनकर्ता जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय होंगे। इस मौके पर भाषाविद डॉ मित्रेश्वर अग्निमित्र, व्य़ाकरणाचार्य बालमुकुंद चौधरी, व्याकरणविद डॉ शशिभूषण मिश्र और व्याकरणाचार्य एवं कंप्यूटर विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ कौस्तुभ सान्याल मौजूद रहेंगे।

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यह जानकारी यहां कालिदास सभागृह में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में समिति के सचिव चंद्रदीप पांडेय, डॉ. रागिनी भूषण और राजदेव सिन्हा ने दी।

चंद्रदीप पांडेय ने बताया कि महर्षि पाणिनि एक प्राचीन भारतीय भाषाविद् थे जिन्हें संस्कृत व्याकरण का जनक माना जाता है। उन्होंने अष्टाध्यायी नामक एक अत्यंत प्रभावशाली ग्रंथ की रचना की, जिसमें लगभग 4,000 सूत्र (नियम) हैं। यह शास्त्रीय संस्कृत के व्याकरण और भाषा विज्ञान का आधार है। यह ग्रंथ न केवल भाषा को वैज्ञानिक रूप से व्यवस्थित करता है, बल्कि उस समय के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन का भी विस्तृत विवरण देता है।

उन्होंने बताया कि भारत विश्व गुरु रहा है और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर हो रहे शोधों ने भी विश्व का ध्यान भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर आकर्षित किया है। तकनीकि क्षेत्र में कोडिंग भाषा के अविष्कार एवं प्रयोग ने भारतीय ऋषियों की मेधा की ओर सहज ही विश्व का ध्यान खींचा है। ऐसे में भारतीय ज्ञान परंपरा के शलाका पुरुष महर्षि पाणिनि का स्मरण आना प्रासंगिक और स्वाभाविक ही है जिन्हौने लगभग 2600 वर्ष पूर्व विश्व को माहेश्वर सूत्र दिए जिसे विश्व का प्रथम कोडिंग भाषा कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा।

महर्षि पाणिनि के इन्हीं अनछुए पहलुओं को वर्तमान और भावी पीढ़ी तक पहुँचाने का दायित्व पाणिनि उत्सव समिति, जमशेदपुर ने अपने कंधे पर लिया है और इसी क्रम में पहला आयोजन पाणिनि उत्सव-2025 नगर को समर्पित है, जिसमें भाषा और तकनीकि जगत के चार मूर्धन्य विद्वान अपने विद्वतापूर्ण संभाषण से ज्ञान कोष का संवर्धन करने का प्रयास करेंगे। इस अवसर पर पाणिनि फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती रमा पोपली द्वारा रचित पुस्तक PANINI PEDAGOGY का लोकार्पण भी किया जाएगा।

पांडेय ने बताया कि 14 दिसंबर को कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्वाह्न 11 बजे होगा और अपराह्न दो बजे तक कार्यक्रम चलेगा। कार्यक्रम एक ही सत्र में संपन्न होगा।