टाटानगर में रेल सिविल डिफेंस का विशेष प्रशिक्षण, वन्यजीव सुरक्षा के साथ CPR, प्राथमिक उपचार और अग्निशमन का दिया गया व्यावहारिक ज्ञान
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
रेलवे ट्रैक पर अचानक हाथियों के सामने आ जाने से लेकर ट्रेन परिचालन के दौरान किसी यात्री या रेलकर्मी की तबीयत बिगड़ने तक, आपात स्थिति में लोको पायलट की सतर्कता और सही निर्णय बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम ने दक्षिण पूर्व रेलवे के इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में एक दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण आयोजित किया। इसमें चक्रधरपुर, खड़गपुर, रांची और आद्रा मंडल के कुल 286 वरिष्ठ एवं सहायक लोको पायलटों ने हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण में वन्यजीवों की सुरक्षा, रेलवे ट्रैक पर हाथियों की आवाजाही के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी चिकित्सकीय आपात स्थितियों में सहायता तथा आग लगने पर बचाव के तरीकों पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सैद्धांतिक जानकारी के साथ मैदान में मॉक ड्रिल के जरिए व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।
हाथी दिखे तो सतर्कता और नियमों का पालन जरूरी
सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने लोको पायलटों को रेलवे ट्रैक पर हाथियों की आवाजाही के कारणों और उनसे बचाव के सुरक्षा नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दक्षिण पूर्व रेलवे के चारों मंडलों में ऐसे रेलखंड हैं, जहां हाथियों की आवाजाही होती है।

हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों से गुजरने वाली रेल लाइनें, भोजन-पानी की तलाश और रात में कम दृश्यता जैसे कारण हाथियों के ट्रैक तक पहुंचने का जोखिम बढ़ाते हैं। रेलवे प्रशासन हाथी प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर सुरक्षा उपाय करता है और निर्धारित स्थानों पर गति सीमा संबंधी निर्देश लागू किए जाते हैं।

लोको पायलटों को समझाया गया कि ट्रैक पर हाथी दिखाई देने पर निर्धारित परिचालन नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, परिस्थिति के अनुसार गति नियंत्रित करें और संबंधित रेल अधिकारियों को तत्काल सूचना दें। वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ यात्रियों और रेलकर्मियों की जान बचाना भी रेल परिचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर समझाया
प्रशिक्षण के दौरान डेमोस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट के बीच अंतर समझाया। उन्होंने सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देने की विधि का प्रदर्शन कर आपात स्थिति में समय पर सहायता उपलब्ध कराने के महत्व पर जोर दिया।
इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के अग्निशामक यंत्रों के सही और सुरक्षित इस्तेमाल का अभ्यास कराया गया, ताकि आग लगने की स्थिति में रेलकर्मी तत्काल उचित कदम उठा सकें।
बैंडेज और प्राथमिक उपचार का कराया अभ्यास
डेमोस्ट्रेटर अनामिका मंडल ने घायल व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार देने और बैंडेज करने की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि आपातकालीन स्थिति में घायल व्यक्ति की अवस्था के अनुसार प्राथमिक उपचार करना और समय पर मदद पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
पूरा प्रशिक्षण डिजिटल माध्यम और पावरपॉइंट प्रस्तुति के जरिए भी संचालित किया गया। इसके बाद आउटडोर मैदान में मॉक ड्रिल कर प्रतिभागियों को प्राथमिक उपचार और अग्नि सुरक्षा का अभ्यास कराया गया।
वंदे भारत से मालगाड़ियों तक के लोको पायलट शामिल
कार्यक्रम में रिफ्रेशर और प्रमोशनल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुल 286 वरिष्ठ एवं सहायक लोको पायलट शामिल हुए। इनमें वंदे भारत, दुरंतो, राजधानी, सुपरफास्ट, पैसेंजर और मालगाड़ियों का परिचालन करने वाले रेलकर्मी शामिल थे।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने रेल सिविल डिफेंस टीम के प्रशिक्षण की सराहना की। इस पहल का उद्देश्य लोको पायलटों को वन्यजीव सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार और अग्नि सुरक्षा के प्रति अधिक सजग बनाना है, ताकि संकट की स्थिति में वे निर्धारित नियमों के अनुरूप प्रभावी कदम उठा सकें।

































