टाटा स्टील का ऐसा प्लांट जिसके विस्तार की अभी भी अपार संभावना
इस्पात के कारखाना का नक्शा ऐसा कि कोई चाहे तो बहुत कुछ सीख जाए
चरणजीत सिंह.
प्रभु जगन्नाथ की धरा ओडिशा के कलिंगानगर में टाटा समूह का एक सपना अब मील का पत्थर बन चुका है. देखते देखते दस साल गुजर गए. तीन मिलियन टन का कारखाना अब आठ मिलियन टन यानी 80 लाख टन इस्पात का सालाना उत्पादन कर रहा है. सब कुछ बिल्कुल व्यवस्थित. उत्पादन लागत भी किफायती. टाटा स्टील के कलिंगानगर के कारखाना का नक्शा ऐसा है कि कोई भी चाहे तो बहुत कुछ सीख जाए.
टाटा स्टील ने जमशेदपुर में इस्पात उद्योग की आधारशिला रखी थी. एक मिलियन टन से शुरुआत हुई थी. जैसे जैसे मांग बढ़ती गई, कारखाना में उत्पादन बढ़ता गया. दस मिलियन टन का शिखर छूने के बाद कंपनी को लगा कि और विस्तार करना है तो कोई और जगह खोजनी होगी. ओडिशा के तत्कालीन नवीन पटनायक की सरकार उद्योगों को आमंत्रित कर रही थी. टाटा समूह ने ओडिशा का रुख किया.
जमीन मिल गई तो टाटा स्टील समूह ने विशेषज्ञों की लंबी मंत्रणा के बाद कारखाना की ऐसी डिजाइन तैयार कराई कि भविष्य में विस्तारीकरण सहजता से हो सके. कारखाना ने एक तरफ कच्चा माल आता है तो अंतिम छोर पर तैयार इस्पात. तीन मिलियन टन से आठ मिलियन टन तक विस्तार सहजता से होता गया. कलिंगानगर प्लांट की स्थापना के ठीक दस साल गुजर हो चुके हैं.
टाटा स्टील के सीईओ सह एमडी नरेंद्रन बोले कि यह सफर शानदार रहा

कलिंगानगर प्लांट के दस साल पूरे हुए तो टाटा स्टील समूह के सीईओ सह एमडी टी वी नरेंद्रन ने खुल कर खुशी का इजहार किया. उन्होंने कहा कि कलिंगानगर ने हमारे दल के प्रदर्शन एवं विश्वास की परीक्षा ली। हर बार हमारे लोग इस पर खरे उतरे. कलिंगानगर ने पिछले एक दशक में यह प्रदर्शित किया है कि कैसे वृद्धि, प्रौद्योगिकी और स्थिरता मिलकर स्थायी मूल्य का निर्माण कर सकते हैं. याद दिला दें कि 2015 में 30 लाख टन प्रति वर्ष की प्रारंभिक क्षमता के साथ इस प्लांट को चालू किया गया था. बाद में और 27 हजार करोड़ का निवेश कर इसकी उत्पादन क्षमता को और 50 लाख तन सालाना बढ़ाया गया. अब सालाना 80 लाख टन का उत्पादन हो रहा है.


