फतेह लाइव, रिपोर्टर.
ऑल इंडिया इंटक के सचिव शह झारखंड इंटक के उपाध्यक्ष ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह और ए के झा ने कहा है कि जिस तरह से केंद्र सरकार कोल इंडिया पर अपनी ओर से शिकंजा कसते जा रही है और कोयला खदानों पर एक के बाद एक सर्कुलर जारी किए जा रहे हैं. उससे लगता है की 1971 में इंदिरा गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री के द्वारा मजदूरों के हित में रातों-रात कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था. उसे मोदी सरकार धीरे-धीरे निजीकरण की ओर ले जा रही है.उसके पीछे बहुत बड़ा कारण है.
नेताद्वय ने कहा कि कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण मजदूरों के हक में किया गया था. उनके जीवन स्तर उनके रहन-सहन उनके परिवार जनों को आगे बढ़ाने के लिए और समाज में बराबरी से जीत सकें, इसलिए गांधी ने मजदूरों के लिए कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था लेकिन वर्तमान सरकार अभी तक लगभग 80% कोयला खदानों को निजी हाथों में सौंप दिया है और जो बड़ी -बड़ी कंपनी कोयला खदानों को ले रहे हैं. मजदूरों का उतना ही शोषण बढ़ते जा रहा है. आउटसोर्सिंग के नाम से कंपनियां आती हैं सब्ज बाग दिखाते हैं लेकिन इस महंगाई के दौर में भी मजदूरों को केवल 5 से ₹6000 का भुगतान किया जाता है जो नाइंसाफी है और एक तरह से मोदी सरकार के द्वारा मजदूरों का शोषण किया जा रहा है.
उन्होंने आगे कहा की जब राष्ट्रीयकरण हुआ था तो केवल भारत कोकीन कोल में डेढ़ लाख से ज्यादा मजदूर कार्यरत थे लेकिन अब केवल 29000 मजदूर कार्यरत है. उसमें भी फीमेल भी आर एस स्कीम के तहत लिए गए मजदूर और जिनके माता-पिता किसी दुर्घटना में मारे जाने से उनके स्थान पर उनके बदले में नौकरी दी गई है. भारत को किंग कोल का कोयला बिक नहीं रहा है. ईसीएल की हालत चिंताजनक है.
कई और कोल कंपनियां घाटे में चल रही है जिसका मुख्य कारण कोयला कंपनी के पदाधिकारी के द्वारा लूट खसूट के चलते कंपनी घाटे में आई है. साथ ही मजदूरों के विरुद्ध नए चार लेबर कोड लागू किए जाने से यह स्पष्ट हो रहा है कि अपने चहेते को कोयला खदानों को केंद्र सरकार देने का जमीन तैयार कर ली है.


