आवास आवंटन में रिश्वत लेकर इनकम टैक्स भरने वालों, दूसरे राज्य के निवासियों और समर्थवान लोगों को दिए गए मकान
आरटीआई कार्यकर्त्ता रविंद्र घोष की शिकायत पर सरकार हुई गंभीर, शिकायतकर्ता का आरोप पूरा सिस्टम खेल में लिप्त
चरणजीत सिंह.
सरायकेला खरसावां जिला अंतर्गत आदित्यपुर नगर निगम एक बार फिर भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में है. इस बार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भारी भ्रष्टाचार उजागर हुआ है. इस बाबत झारखंड के मुख्यमंत्री को आदित्यपुर संजय नगर मांझी टोला निवासी आरटीआई कार्यकर्त्ता रविंद्र घोष ने शिकायत की थी. उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री आवास योजना में चयनित लाभार्थियों के चयन में नगर निगम में बड़ा घपला हुआ है. योजना का लाभ जिन जरूरतमंद लोगों को मिलना चाहिए, उन्हें ना मिलकर समर्थवान लोगों को आवास उपलब्ध कराया जा रहा है.

शिकायत में उन्होंने विशेष सूत्रों का हवाला देते हुए आरोप भी लगाया
50 हजार तक की रिश्वत लेकर बंगाल, बिहार और दूसरे राज्यों से आये हुए व्यक्तियों को आवास योजना का लाभ दिलाया जा रहा है.

वर्ष 2011 में जो यहां वोटर नहीं थे. इस योजना का लाभ उनको भी दिलाया गया है. कई ऐसे परिवार हैं, जिनकी जमीन जयदात दूसरे राज्य में है. उनको भी घर उपलब्ध कराया गया है. कोई अपनी मां के नाम से, कोई बहन के नाम, तो कोई पिता के नाम से आवास रहते हुए भी लाभ दिलाया जा रहा है.

एक घर में तीन चार लाभुकों आवास उपलब्ध किया जा रहा है. असली हकदार को लाभ नहीं मिल रहा है और जो पहले से ही आवास में रह रहा है उसको ही घर उपलब्ध कराया जा रहा है. सबसे बड़ी बात इनकम टैक्स देने वाले व्यक्ति भी लाभान्वित हो रहे हैं. यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रधानमंत्री आवास आवंटन में खुली लूट मची हुई है. बोलने वाला कोई नहीं है. सारा सिस्टम इस खेल में लिप्त है. आगर इस विषय पर सरकार द्वारा सही और निष्पक्ष जांच करा दी जाये, तो एक चौंकाने वाला मामला उजागर होगा.
यह भी आरोप लगाया कि सारा पेपर एडिट करके दिखाया जा रहा है. मोटी रकम उगाही हो रही है. इसमें एक सिटी मेनेजर का बहुत बड़ा योगदान है. किसी दूसरी एजेंसी से जांच कराने पर बड़ा खुलासा होगा.
अब रविंद्र घोष की शिकायत को सरकार ने गंभीरता से लिया है और झारखण्ड सरकार मुख्यमंत्री सचिवालय से उप सचिव घनश्याम प्रसाद सिंह ने सरायकेला खरसावां के उपायुक्त को पत्र लिखकर मामले पर समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. उप सचिव ने यह भी कहा है कि मुख्यमंत्री के जानकारी हेतु कृत कार्रवाई से एक पक्ष के अंदर जन शिकायत कोषांग, मुख्यमंत्री सचिवालय को अवगत कराई जाय. सचिवालय से गत 11 दिसंबर को उपायुक्त को जांच हेतु पत्र निर्गत किया था.





























































