निशिकांत ठाकुर की कलम से.
देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ये हैं असम, केरलम, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल। इनमें तीन असम, पुदुचेरी और केरलम के लिए मतदान सन्निकट हैं। आने वाले गुरुवार को मतदान होने जा रहे हैं। मतगणना होने तक किसी भी राज्य में चुनाव को लेकर स्पष्ट कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन अनुमान लगाना और विश्लेषण करना मानवीय प्रवृत्ति है। इससे किसी को रोका नहीं जा सकता।
सबके अपने-अपने विचार हैं और विश्लेषण का अपना-अपना तरीका भी। अतः इनके लिए भी विश्लेषण शुरू हो गया है। यहाँ हम अपनी ध्यान दो राज्यों में चुनाव पर केंद्रित करेंगे। एक तो असम और दूसरा केरलम। असम में हिमंता विस्वसरमा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है तो केरलम में पिन्नाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ की। दोनों के अलग-अलग मुद्दे हैं, पर दोनों जगहों पर इनकंबेंसी फैक्टर भी काम कर रहा है।
असम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान अब होने ही जा रहे हैं। हालाँकि परिणाम घोषित होने में काफी समय है। 126 विधायकों वाले प्रदेश की आबादी 3.5 करोड़ है और वर्तमान में एनडीए की सरकार है। मुख्यमंत्री पिछले पांच वर्षों से हेमंत विश्वसरमा हैं। सरमा पहले कांग्रेस में थे, लेकिन समय भांपते हुए कई अन्य कांग्रेसियों की तरह कई आरोप लगाते हुए वे भी भाजपा में शामिल हो गए। फिर उनको जिस तरह की उम्मीद से भाजपा अपने पाले में ले आई थी, उसको जारी रखते हुए आज तक विषवमन करते चले आ रहे हैं और उसी फार्मूले को अपनाए हुए हैं कि सभी मुस्लिम घुसपैठिए हिंदुओं का हक मारने वाले हैं।
कभी वह बंदूक से मुसलमानों को गोली मारने की बात करते है तो कभी मुस्लिम के पांच रुपए की कमाई में चार रुपए देने की बात करते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यदि कोई अनहोनी या अप्रत्याशित घटना नहीं घटी तो कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर मिल सकता है। विश्लेषक सहित पूरा देश उनकी इन गतिविधियों को सांस थामे चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। हां, चुनाव के समय में कब किसका मत बदल जाएगा फिलहाल इसका कोई यंत्र नहीं हैं। लेकिन, इसके इतर विश्व में अब ऐसा कंप्यूटर विकसित हो गया है जो आपके मन की बात पढ़ता है और आपकी हर गतिविधियों पर नजर टिकाए रहता है।
वैज्ञानिकों की बात मानें तो कहा गया है कि यदि आपके घर या आसपास बिजली है और आपके घर में मोबाइल फोन है तो, आपकी हर गतिविधियों की खबर रखना कोई मुश्किल नहीं है। अभी फिर जो नए तीन आरोप कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री असम पर और उनकी पत्नी पर लगाए हैं उसके जबाव में मुख्यमंत्री की जो प्रतिक्रिया है और जिस भाषा का उन्होंने प्रयोग किया है, निश्चित रूप से वह असंसदीय है। जांच तो आरोपों की होनी चाहिए, लेकिन सूचना के अनुसार असम पुलिस दिल्लीं पवन खेड़ा की गिरफ्तारी के लिए निकल पड़ी है।
9 अप्रैल को दो राज्यों असम और केरलम में हो चुके हैं मतदान के परिणाम 4 मई को होने की घोषणा चुनाव आयोग द्वारा की गई है। इन दोनों राज्यों ही नहीं, बल्कि देश में सबसे शिक्षित राज्य केरलम में 140 विधायक चुने जाते हैं। पिछले 2016 से मुख्यमंत्री पिन्नाराई विजयन हैं और वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से संबंधित हैं। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) भारतीय राज्य केरलम में केंद्र सरकार से लेकर मध्य दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस वाला गठबंधन है।
केरल (वर्तमान का केरलम) भारत का सबसे शिक्षित राज्य है जिसकी साक्षरता दर विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार 96.2% है। केरलम भारत का पहला राज्य है जहां 100% लोग प्राथमिक शिक्षा प्राप्त हैं और यह राज्य अपनी गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा साक्षरता और अन्य माध्यमिक दर के लिए प्रसिद्ध है जो इस राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाता है।
इन दोनों राज्यों का उल्लेख इसलिए कि इन दोनों राज्यों के चुनाव का क्या असर देश की जनता पर पड़ेगा। असम के वर्तमान मुख्यमंत्री एक अत्यधिक शिक्षित (राजनीति विज्ञान में पीएचडी और कानून से स्नातक) और अनुभवी नेता हैं, जो पूर्व में स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में बुनियादी ढांचे के विकास और पारदर्शी नियुक्तियों की प्रशंसा होती है, लेकिन कुछ आलोचक उनकी राजनीति को ध्रुवीकरण करने वाला मानते हैं।
समर्थक उनके नेतृत्व को दूरदर्शी मानते हैं, जो बुनियादी ढांचे, शिक्षा, और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से असम को मजबूत बना रहे हैं। ‘आत्मनिर्भर असम अभियान’ जैसी योजनाओं के तहत युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल उनके कार्यों पर सवाल उठाते रहे हैं, विशेषकर युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर। कुछ वर्ग उनसे अधिक रोजगार की उम्मीद रखते हैं।
वहीं दूसरी ओर असम में जनता को कांग्रेस नेता और सांसद गौरव गोगोई से मुख्य रूप से भाजपा सरकार के खिलाफ एक मजबूत और सक्षम विपक्ष के रूप में बड़ी उम्मीदें हैं। जनता और कांग्रेस पार्टी उनसे आगामी विधानसभा चुनावों में समेकित विपक्षी गठबंधन की उम्मीद कर रही है। कांग्रेस को उम्मीद है कि वे भाजपा को चुनौती देने में सक्षम होंगे। उनसे बेरोजगारी कम करने और राज्य में ‘परिवर्तन’ लाने की उम्मीद की जा रही है।
गौरव गोगोई से जनता एक ऐसे नेतृत्व की उम्मीद करती है जो हिमंता बिस्वसरमा के खिलाफ सीधे तौर पर खड़ा हो सके और सरकार की जवाबदेही तय करे। जनता उनसे राज्य में बेरोजगारी की समस्या के समाधान और विकास के लिए ठोस योजना की उम्मीद कर रही है। संसद में सक्रियता और मुखरता के कारण, जनता उनसे स्थानीय मुद्दों, जैसे कि कोयला और पत्थर के सिंडिकेट, पर कार्रवाई की उम्मीद करती है। गौरव गोगोई को कांग्रेस का चेहरा बनाकर पार्टी ने भाजपा की ’90 पार’ की दावेदारी को चुनौती दी है और जोरहाट जैसी सीट जीतकर उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की है, जिससे लोगों का उन पर भरोसा बढ़ा है।
उधर केरलम में भी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक माहौल तैयार है। इसमें एलडीफ (सीपीआई) और यूडीएफ (कांग्रेस) के बीच कड़ी टक्कर है। एलडीएफ लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है और वर्तमान मुख्यमंत्री 80 वर्षीय पिन्नाराई विजयन को फिर से मुख्यमंत्री के प्रमुख चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। श्री पिन्नाराई देश के वरिष्ठतम राजनेताओं में गिने जाते हैं। केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मुख्य मुकाबला सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच है।
एलडीएफ ने मुख्यमंत्री पिन्नाराई विजयन को अपने चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया है। जबकि यूडीएफ में नेतृत्व को लेकर अभी कोई स्पष्टता नहीं है। मतदान 9 अप्रैल को होगा और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। एलडीएफ पिन्नाराई विजयन के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सत्ता बरकरार रखने का प्रयास कर रही है। सीपीएम 140 में से 86 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ 10 साल के वामपंथी शासन को खत्म करने की कोशिश कर रही है। के. सुरेंद्रन और के. चंद्रशेखर जैसे नेताओं के साथ राज्य में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इनमें भी प्रमुख चेहरा अभी भी पिन्नाराई विजयन ही हैं।
चुनाव से पहले किसी का कुछ कहना एक कयास ही होता है, लेकिन आधुनिक चुनाव को जिस तरह लड़ा जाता है, उसमें विश्लेषकों की माने तो वह कहते हैं कंप्यूटर और मोबाइल द्वारा उस व्यक्ति, गांव सहित हर स्तर पर गणना कर ली जाती है और उसके अनुसार विपक्षी जनता को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जाता है। फिर अंत में तो वही होता है जिसकी चर्चा देश की राजधानी सहित कोने-कोने में आज सबको मालूम है कि बटन कोई भी दबाओ गिनती तो एक ही जगह होगी। अतः ऐसी स्थिति में चुनाव के लिए कुछ भी भविष्वाणी करना, पूर्वानुमान लगाना बिल्कुल बेकार है, लेकिन हां, सच उन सबको मालूम होता है कि किस राज्य में चुनाव किसके पक्ष में जा रहा है। आप पाठक भी अपने अपने सरकार के बनते बिगड़ते सपने देखते रहिए।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)



