फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर शहर से सटे आदिवासी बहुल इलाकों में इस बार बाहा बोंगा की शुरुआत फाल्गुन माह के पांचवें दिन यानि 22 फरवरी से शुरू होकर लगातार पूर्णिमा तक चलेगी. पहले दिन जाहेरथान में उम नाड़का के साथ शुरुआत होगी, दूसरे दिन बाहा बोंगा और तीसरे दिन बाहा सेंदरा के साथ संपन्न होगी. अलग अलग गाॅंव के ग्रामीणों ने अपनी सुविधानुसार बाहा बोंगा की तिथि तय की हैं.

सारजमदा निदिरटोला के राजेश मार्डी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आदिवासी महिला व पुरुष अपनी अपनी पारंपरिक परिधान में आकर जाहेरथान में माथा टेकेंगे और मारांग बुरू जाहेर आयो से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे. गाॅंव के नायके बाबा व सह नायके द्वारा सभी महिला पुरुषों को सखुआ का फूल यानि साल का फूल बांटेंगे. पुरुष अपनी कानों पर इस फूल को लगाते हैं और वहीं आदिवासी महिलाएं अपनी जुड़ो पर सजाती हैं.

उन्होंने बताया कि तीसरे दिन बाहा सेंदरा के साथ साथ एक दुसरे पर सादे पानी डालकर बाहा मनाते हैं. किसी भी आदिवासी समाज में रंगों की होली पूर्णतः वर्जित है और सादे पानी से ही होली खेलने की अनोखी परंपरा कायम है.

बाहा बोंगा में इन वस्त्रों का पहनना रहेगा वर्जित

पंची साड़ी, काला व पीली धोती शर्ट और जुड़ें में गुलाब गजरा व्यवहार

विभिन्न गाॅंव में होने वाले बाहा बोंगा महोत्सव कार्यक्रम

21 फरवरी – केडो (नरवा)

22 फरवरी – बारीगोड़ा, सारजमदा, छोलागोड़ा, शंकरपुर, जानीगोड़ा. बड़ा गोविंदपुर, देवघर, बालीगुमा, डिमना, तालसा, रानीडीह, खुखड़ाडीह

23 फरवरी – गोड़ाडीह

25 फरवरी – सारजमदा (पुराना बस्ती)

27 फरवरी – सिदगोड़ा

28 फरवरी – कदमा, उलीडीह

01 मार्च – बिरसानगर, गदड़ा बालिडुंगरी, राहरगोड़ा, करनडीह (दिशोम बाहा), नरवा कॉलोनी, सुरदा क्रासिंग (दिशोम बाहा)

03 मार्च – बर्मामाइंस, तिलकागढ़, डोमजुड़ी, राजदोहा

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