फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर पुलिस न्यायलय के आदेश को नहीं मानती है. यह कहना गलत नहीं होगा. ऐसा मामला प्रकाश में आया है. जानकारी के अनुसार न्यायालय में शिकायत वाद करने के बाद दिनांक 13 अप्रैल 26 को जमशेदपुर न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के द्वारा धारा 175(4) बीएनएनएस 23 के अंतर्गत 28 अप्रैल 2026 का आदेश बिष्टुपुर पुलिस के लिए मायने नहीं रखता है, जिसकी शिकायत वरीय पुलिस अधीक्षक जमशेदपुर को दिनांक 15 मई 2026 को की गई है.

घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज नहीं की, एसएसपी के आदेश की भी अनदेखी की गई तो भुक्तभोगी को अदालत की शरण में जाना पड़ गया. सीपी क्लब सोनारी निवासी नरेश कुमार की कार करणदीप सिंह द्वारा छीन ली गई. उसकी कार अब तक बरामद नहीं की गई है. घटना गत 11 जनवरी की है. 11 जनवरी की शाम बिष्टुपुर में वह अपनी कार संख्या जेएच-05डीडी-9486 को पार्क कर जुडिओ मॉल जा रहा था. उसी समय मोबाइल संख्या 7979810030 धारक कारणदीप उसके पास आया और बातों में फंसाया.

कुछ देर में एक कार में उसके पांच-छह साथी वहां आ धमके एवं गाली-गलौज करते हुए उन लोगों ने नरेश को अपने कार में जबरन बैठा लिया. कार में उसके साथ मारपीट हुई, जिसके कारण आंख, चेहरा एवं छाती चोटिल हो गया. इसके बाद वे लोग उसे साकची गाढ़ाबासा ले गये. वहां एक कमरा में उसे ले जाया गया और वहां उन लोगों ने धमकाकर एक कोरे कागज पर उससे पैसे लेने के एवज में कार बेच देने की बात लिखवाई तथा साथ ही एक सादा कागज में हस्ताक्षर करवा लिया.

उन लोगों के रवैये से नरेश काफी डर गया. परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी हमलावर दे रहे थे, इसलिए डरकर उन लोगों के कहे अनुसार उसने सब कुछ कर दिया. कार बरामद करने के लिए नरेश ने 11 जनवरी को बिष्टुपुर थाना में तथा 14 जनवरी को वरीय पुलिस अधीक्षक को लिखित तौर पर अपनी शिकायत दी थी, जिसके बाद भुक्तभोगी न्यायलय की शरण में गया था. 

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