फतेह लाइव, रिपोर्टर.
कोल्हान विश्वविद्यालय का अधीन जमशेदपुर को-ओपरेटिव लॉ कॉलेज के एलएलबी में मेरिट सूची के आधार पर नामांकन हो रहा है. उस सूची में लेटर पैड जमशेदपुर को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज का होना चाहिए था, पर उसकी जगह को-ओपरेटिव कॉलेज के लेटर पर मेरिट सूची निकली जा रही है,जिसका विरोध छात्र सह अधिवक्ता अमर तीवारी ने की है.

उन्होंने झारखंड के राज्यपाल को इसकी शिकायत करते हुए बताया कि केयू के अधीन दो अलग -अलग अंगीभूत कॉलेज है. एक जमशेदपुर को-ओपरेटिव कॉलेज और एक जमशेदपुर को-ओपरेटिव लॉ कॉलेज. यह दोनो कॉलेज सरकारी है और स्वतंत्र इकाई है. उन्होंने बताया कि बार कौंसिल के मान्यता से लॉ कॉलेज हर साल नामांकन लेता रहा है, परंतु इस साल सत्र 24-27 का नामांकन शुरू हुआ जब इस नामांकन की मेरिट सूची जारी हुई.
तब इसकी अभियर्थियों की सूची जमशेदपुर को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज के लेटर के बजाय जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के नाम से उनके लेटर पैड में सूची निकलने लग गई. इसके कारण विद्यार्थियों में असमंजस का माहौल बन गया, कि क्या लॉ कॉलेज जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में विलय हो गया? आखिर क्यों ऐसा किया गया. बता दें की लॉ कॉलेज को 7 मार्च 2024 को पत्रांक के माध्यम से जमशेदपुर को-ओपरेटिव लॉ कॉलेज को एक अलग इकाई की मान्यता गजट के माध्यम से दी गयी थी.
उसके बाद भी दूसरे कॉलेज के लेटर पैड का उपयोग हो रहा. अमर का कहना है कि उसके नामांकन के सदस्य में लॉ कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ जितेंद्र को सिर्फ सदस्य बना दिया गया और बाकी 3 जिसमें सभी तीन लोग जमशेदपुर को-ओपरेटिव कॉलेज के हैं. उन्हें अलग अलग पद दिया गया. देखा जाए तो सबसे नीचे का पोस्ट डॉ जितेंद्र कुमार प्रभारी प्राचार्य जमशेदपुर को-ओपरेटिव लॉ कॉलेज को दिया गया,जबकि वे प्रमुख होने चाहिए.
सवाल है कि यूनिवर्सिटी किस आधार पर ये कमिटी का गठन कर रही है. जब अन्य कॉलेज अपना नामांकन स्वयं लेते है, तो लॉ कॉलेज का नामांकन में दूसरा कॉलेज क्यों दखल दे रहा है, यह किसका आदेश है? और लेटर पैड लॉ कॉलेज का क्यों नही है. यह यूनिवर्सिटी को बताना होगा. उन्होंने राज्यपाल से कमिटी गठन कर मामले में कार्यवाही की मांग की है.





























































