फतेह लाइव, रिपोर्टर.
झारखंड के खूँटी जिले में गर्मी की शुरुआत से पहले ही जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। ग्रामीण इलाकों में पेयजल की व्यवस्था धीरे-धीरे दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकारी योजनाओं के तहत बनाए गए जलमीनार बंद पड़े हैं और कई चापाकल भी खराब हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
खूँटी से सामने आई तस्वीरें सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। गर्मी अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन कई गांवों में पानी का संकट गहराने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में पेयजल की व्यवस्था लगभग चरमरा चुकी है। सरकार की योजना के तहत गांव-गांव में जलमीनार बनाए गए थे, ताकि लोगों को घर के पास ही पीने का पानी मिल सके। लेकिन खूँटी के कई गांवों में ये जलमीनार अब बंद पड़े हैं और चापाकल भी खराब हो चुके हैं।
बाड़ी लोयोंग गांव में सबसे ज्यादा संकट
खूँटी प्रखंड के बाड़ी लोयोंग गांव में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। यहां करीब 70 से 80 घरों के लिए बनाया गया जलमीनार खराब पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार यह जलमीनार सिर्फ एक साल तक ही सही तरीके से चल पाया, इसके बाद गुणवत्ता की कमी के कारण बंद हो गया।
अब हालात ऐसे हैं कि गांव के लोग कुएं और खेत की डाड़ी से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। बढ़ती गर्मी के साथ अब कुएं भी धीरे-धीरे सूखने लगे हैं, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
कई पंचायतों में एक जैसी स्थिति
सिर्फ बाड़ी लोयोंग ही नहीं, बल्कि खूँटी प्रखंड के लांदुप पंचायत और तिलमा पंचायत के कई गांवों में भी स्थिति लगभग यही है। कई चापाकल खराब पड़े हैं और कई जलमीनार बंद हैं।
ऐसे में गांव की महिलाएं और पुरुष सुबह से ही पानी के इंतजाम में जुट जाते हैं। एक ही डाड़ी से पूरे गांव के लोग पानी भरते हैं। कभी लंबी कतारें लगती हैं तो कभी घंटों इंतजार करना पड़ता है।
प्रशासन ने दिया भरोसा
इस पूरे मामले पर खूँटी के उप विकास आयुक्त आलोक कुमार ने कहा है कि ग्रामीणों को पेयजल की समस्या न हो, इसके लिए खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत कराई जाएगी और बंद पड़े जलमीनारों को भी जल्द दुरुस्त किया जाएगा।
हालांकि सवाल यह है कि जब गर्मी अभी शुरू ही हुई है और हालात ऐसे हैं, तो मई-जून की भीषण गर्मी में गांवों में पानी की स्थिति क्या होगी। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो खूँटी के कई गांवों में जल संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है।

