सरकार और विपक्ष बराबर के जिम्मेदार,अनुसूचित जाति के सिख गर्व से बताएं अपनी जाति 

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर से क़ौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर मकान की सूचीकरण एवं मकान गणना में अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यकों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है। इसमें सत्ता और विपक्ष दोनों जिम्मेदार हैं। अधिवक्ता के अनुसार भाजपा पर स्वर्ण जाति की राजनीति करने का आरोप लगाने वाली देश की विपक्षी पार्टियों के नेता आश्चर्य जनक ढंग से मौन हैं।

इस अधिवक्ता के अनुसार मकान गणना से देश में परिवारों की संख्या एवं उनकी जाति, धार्मिक, आर्थिक स्थिति की तस्वीर सामने आती है जिसके आधार पर नीति आयोग भविष्य की नीतियां एवं कार्यक्रम तैयार करता है।

इस मकान गणना में धर्म का कॉलम गायब है। इसके साथ ही जाति के कॉलम से अन्य पिछड़ा वर्ग का उल्लेख भी गायब है। मुसलमान की शैक्षणिक सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति सच्चर कमेटी की रिपोर्ट से उजागर हुई थी। 

अब यहां सवाल उठता है सरकार ने धर्म एवं अन्य पिछड़ा वर्ग का कॉलम क्यों और किन परिस्थितियों में उल्लिखित नहीं किया है? क्या सरकार नहीं चाहती कि देश को मालूम हो कि देश में अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या क्या है और कितने परिवार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है? 

वहीं अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने अनुसूचित जाति के सिख परिवार को गर्व से अपनी जाति का उल्लेख करने का आग्रह किया है। उनके अनुसार बड़े आंदोलन के उपरांत साल 1956 में उस समय की केंद्र सरकार ने सिखों की अनुसूचित जातियों की पहचान की और उसे संवैधानिक लाभ दिया, जो आज भी जारी है।

ऐसे में सिख जो मजहबी, रामदासिया, रविदासिया, वाल्मीकि, बाजीगर, सिकलीगर, कबीरपंथी, धोबी बिरादरी है, वह घर में आने वाले अपने प्रगणकों को अपनी जाति अनुसूचित जाति के तौर पर उल्लेख करे। इस आंकड़े के आधार पर ही झारखंड सरकार पर प्रमाण पत्र जारी करने का दबाव भविष्य में बन सकेगा। अधिवक्ता ने झारखंड रंगरेटा महासभा के पदाधिकारी से आग्रह किया है कि वह अपने लोगों के बीच जन जागरण अभियान चलाए।

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