खासमहल मामले के अतिक्रमण की यह खेला, आवासीय या व्यावसायिक के लिए दी गई थी लीज
चरणजीत सिंह.
जमशेदपुर में दो दिन पूर्व भारत की राष्ट्रपति का आगमन हुआ था. उनके आगमन को लेकर यहां की जनता से मिली फीडबैक से यही पता चला कि सड़कें बन गई. जिसकी डिमांड स्थानीय नेता करते आ रहे थे. रातों रात सड़क रनवे बन गई. जहां कभी गड्ढे जनता को दर्द देते थे. इसके लिए डीसी साहब को भी धन्यवाद कर रही है, जनता.
खैर, इससे भी ऊपर आएं तो जिला प्रशासन ने कई गरीब आशियाने उजाड़े. खूब हाय तौबा चली. लेकिन इस दज में खासमहल लीज एरिया का यह रोड का अतिक्रमण रह गया. जहां एक लाल पंडाल बना हुआ है. बांस के सहारे. इस पर न तो जमशेदपुर अंचल की नजर गई और ना ही राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगी सुरक्षा एजेंसियों की.
इसी तरह देश की प्रथम नागरिक के आगमन से पूर्व जिस तरह अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, खासमहल चार खम्भा चौक के आसपास भी कई पक्के मकान अतिक्रमण के घेरे में है. आपको बता दें कि लगभग 35 साल से खासमहल जमीन का नवीनीकरण नहीं हुआ है. यह जमीन आवासीय क्षेत्र के लिए सरकार ने खास लोगों को दी थी. अब खास तो यहां रहे नहीं, लेकिन कुछ खास इस जमीन का व्यावसायी करण करने में लगे हैं. इसका जीता जागता नमूना है खासमहल जग्गन्नाथ मंदिर के पास बना यह पंडाल. जहां जिला प्रशासन की आंख के नीचे इसमें शादी पार्टियां होती हैं.
राष्ट्रपति के आगमन के दौरान यह पंडाल जस का तस रहा. हां उजड़ गए गरीब. यह व्यावसायिक करण कौन कर रहा है, इसका खुलासा पहले ही तड़ीपार किये गए अपराधी के बारे फतेह लाइव कर चुका था. नशे के विरुद्ध जुड़े लोगों का मामला था. बहरहाल, यह तो जांच का विषय है.
कोरोना बाजार कैसे खिसक गया
वहीं, कोरोना बाजार को भी अतिक्रमण के रूप में राष्ट्रपति के आगमन के दौरान साफ किया गया था. लेकिन उनके आगमन से पहले और बाद तक वह बाजार नीचे खिसक आया. इसके पीछे जुड़े तथ्यों की बात बाद में होगी, लेकिन यह तथ्य यहां जरुरी लोग जानना चाह रहे हैं कि जब राष्ट्रपति के आगमन को लेकर व्यवस्था बनाने में प्रशासन, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ दिन रात मेहनत कर रही थी तो उन्हें यह कोरोना बाजार, और यह पंडाल अतिक्रमण क्यों नहीं लगा? यह बहुत बड़ा सवाल स्थानीय लोगों के जेहन में रोंद रहा है.
सदर अस्पताल के सामने और चार खम्भा तक हो रहा व्यावसायिक इस्तेमाल
इस पूरे प्रकरण में 35 से 40 वर्षों से यह खेला अंचल से हो रही है. खासमहल चौक से चार खम्भा हो. सब जगह ब्लॉक के कर्मचारी मिलीभगत कर अपनी मोटी कमाई के लिए सरकार के राजस्व को चूना लगा रहे हैं. भोली भाली जनता को धोखा देने वाले कई फर्जी लोग खुद फर्श से अर्श तक पहुंच गए हैं. बैंक बिल्डिंग के घोटाले सब सर्व विदित है. फिलवक्त सीआई बलवंत आरोपों के घेरे में हैं. उनके नेतृत्व में फल फूल रहे अतिक्रमण को ना तो सीओ देख पाए और ना जिले के डीसी?
