सदर अस्पताल में संचालित 100 बेड के फेब्रिकेटेड अस्पताल की दे दी ऑपरेशनल जिम्मेदारी
विमल कुमार मंडल की मनमानी से तंग आकर अस्पताल उपाधीक्षक ने छोड़ा पद
महिला डॉक्टर से ड्यूटी रोस्टर को लेकर दुर्व्यवहार, मामला ऊपर तक ले जाने की चेतावनी
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
जमशेदपुर सिविल सर्जन डॉ साहिल पाल हर दिन अपने नये-नये आदेश को लेकर जिला ही नहीं राज्य भर में सुर्खिया बटोर रहे हैं. नया विवाद सिविल सर्जन के उस आदेश को लेकर शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने एक कंप्यूटर सहायक को 100 बेड वाले सदर अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी सौंप दी है. सिविल सर्जन ने बकायदा आदेश जारी कर आरसीएच कार्यालय में पदस्थापित कंप्यूटर सहायक विमल कुमार मंडल को हॉस्पीटल का ऑपरेशन इंचार्ज बना दिया है.
सिविल सर्जन के इस आदेश को सदर अस्पताल में दोहरी व्यवस्था संचालित करने वाला कदम बताया जा रहा है, क्योंकि यहां पहले से ही हॉस्पीटल मैनेजर पदस्थापित है. सिविल सर्जन का वरदहस्त प्राप्त कम्प्यूटर सहायक विमल मंडल वर्तमान में डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर भी बनाता है और डॉक्टरों को आदेश भी देता है. आलम यह है कि इसके दुर्व्यवहार से आहत होकर उपाधीक्षक डॉ कमलेश प्रसाद ने सदर अस्पताल उपाधीक्षक का पद तक छोड़ दिया. उन्होंने सिविल सर्जन को पूरी बात बतायी लेकिन उनकी मेहरबानी चहेते विमल कुमार मंडल पर बनी रही.
सिविल सर्जन के इस आदेश के बाद विमल कुमार मंडल के कुकृत्यों को लेकर भीतर ही भीतर विरोध के स्वर उठने लगे है. बताया जाता है क बीते दिनों विमल कुमार मंडल ने एक महिला डॉक्टर से ड्यूटी रोस्टर को लेकर बदसलूकी की. यह मामला तूल पकड़ने लगा है. महिला डॉक्टर ने मामले को ऊपर तक ले जाने की चेतावनी दी है. सूत्रों का कहना है कि कंप्यूटर सहायक के रूप में पदस्थापित चहेते विमल मंडल को सिविल सर्जन ने इतनी छूट दे रखी है कि वह अस्पताल प्रबंधन के दैनिक कार्याें में लगातार हस्तक्षेप करने लगा है. इसे लेकर डाॅक्टर से लेकर नर्स और दूसरे कर्मचारी परेशान है.
एक ही अस्पताल में दो-दो मैनेजर क्यों? क्या सिविल सर्जन की क्या है योजना !
जमशेदपुर सदर अस्पताल में पहले से ही हॉस्पीटल मैनेजर पदस्थापित है, ऐसे में एक कंप्यूटर सहायक को हॉस्पीटल का ऑपरेशन इंचार्ज बनाये जाने को लेकर सवाल उठाये जा रहे है. सदर अस्प्ताल के कर्मचारी इसे सिविल सर्जन कार्यालय में व्याप्त ‘वसूली तंत्र’ (भ्रष्टाचार और अवैध उगाही का नेटवर्क) का हिस्सा मान रहे है. कर्मचारियों का कहना है कि खुद को मंत्री का करीबी बताने वाले सिविल सर्जन की पदस्थापना के बाद से ही यह तंत्र स्वास्थ्य सेवाओं को दीमक की तरह खोखला कर रहा है. यह तंत्र आम जनता और कर्मचारियों के शोषण का कारण बन रहा है जो बीते दिनों ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी दिखायी पड़ा था.
बड़ा सवाल – आखिर किस अनुभव पर दे दी गयी अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी
सिविल सर्जन के चहेते कंप्यूटर सहायक विमल कुमार मंडल के कार्य व्यवहार को सदर अस्पताल के कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ने लगा है. लोग सवाल यह उठा रहे है कि मंत्री का नजदीकी बताकर सिविल सर्जन अब ऐसे फैसले ले रहे जो सरकार के नीतिगत निर्णयों से भी मेल नहीं खाते. कहा जा रहा है कि सरकार ने हास्पीटल मैनेजर के लिए निर्धारित योग्यता और अनुभव तय कर रखा है. उसके अनुसार ही वेतन और दूसरी सुविधाएं भी देय होती है लेकिन विमल कुमार मंडल को वह कार्य दे दिया गया है जिसका उसे न तो अनुभव है न ही योग्यता. अब सदर अस्पताल में पहले से एक हाॅस्पीटल मैनेजर पदस्थापित हैं और उस पर सरकार भारी-भरकम खर्च भी कर रही है, उसके बाद बिना किसी सरकारी गाइड लाइन के ही 100 बेड वाले अस्पताल की पूरी व्यवस्था किस अनुभव पर कंप्यूटर सहायक को सौंप दी गयी है !
क्रमश :
हमारा प्रयास है कि सच जिला प्रशासन और सरकार के सामने आये. ऐसे में किसी को अपना पक्ष रखना है तो whatsapp 9234051616 पर भेज सकते हैं, पूरे सम्मान के साथ उसका संज्ञान लिया जायेगा.




