Jamshedpur : ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा देश, निर्बाध आपूर्ति का खुलेगा रास्ता

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शहर के इंजीनियर सौम्य दीप ने जापान के टोक्यो में प्रस्तुत किया अपना शोध पत्र

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर के सोनारी निवासी मैकेनिकल इंजीनियर सौम्य दीप ने अपने अभिनव ऊर्जा अवधारणा प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है. वे वर्तमान में विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल में प्रशासक के रूप में कार्यरत हैं और स्वतंत्र रूप से ऊर्जा एवं भौतिकी के क्षेत्र में शोध कर रहे हैं. जापान की राजधानी टोक्यो में गत 26-27 मार्च, 2026 को आयोजित ‘एनर्जी टेक कॉन्फ्रेंस 2026 में इसे प्रस्तुत भी किया. सम्मेलन में उन्होंने “लिक्विड एयर को वर्किंग मीडियम के तौर पर इस्तेमाल करने वाला एक काल्पनिक साइक्लिक ग्रेविटो-क्रायोजेनिक-जियोथर्मल एनर्जी कन्वर्जन सिस्टम” (“A Hypothetical Cyclic Gravito-Cryogenic-Geothermal Energy Conversion System Using Liquid Air as Working Medium”) शीर्षक से अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया. इस शोध में एक ऐसी हाइब्रिड ऊर्जा प्रणाली का प्रस्ताव दिया गया है, जो गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा, क्रायोजेनिक तकनीक (तरल वायु) और भू-तापीय ऊर्जा को एकीकृत करती है.

प्रस्तावित प्रणाली के अनुसार, तरल वायु को एक विशेष कंटेनर में भरकर पृथ्वी के भीतर एक अत्यंत गहरे शाफ्ट में नीचे भेजा जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान गुरुत्वाकर्षण बल से ऊर्जा उत्पन्न होती है. शाफ्ट के निचले हिस्से में पृथ्वी की आंतरिक गर्मी के कारण तरल वायु गैस में परिवर्तित हो जाती है, जो विस्तार के दौरान टर्बाइन को चलाकर अतिरिक्त ऊर्जा उत्पन्न करती है. इसके बाद कंटेनर को पुनः सतह पर लाकर यह प्रक्रिया दोहराई जाती है, जिससे एक निरंतर चक्रीय ऊर्जा प्रणाली विकसित की जा सकती है.

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सौम्य दीप के शोध के इस नवीन तकनीक से भविष्य में असीमित हरित ऊर्जा के उत्पादन एवं भंडारण में समर्थता मिलेगी. साथ ही हमारा देश ऊर्जा के क्षेत्र में स्वावलंबी हो सकेगा तथा इसके द्वारा निर्बाध ऊर्जा की आपूर्ति हो सकेगी.

इस शोध का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें विभिन्न प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों के संयोजन से उच्च ऊर्जा उत्पादन की संभावना व्यक्त की गई है. सम्मेलन में सौम्य दीप की प्रस्तुति को विशेषज्ञों ने काफी सराहा और उन्हें ‘सर्टिफिकेट ऑफ रिमार्केबल प्रेजेंटेशन’ से सम्मानित भी किया. यह सत्र ब्रिटेन के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ पीटर हररोप तथा ऑकलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एल. वेन की अध्यक्षता में आयोजित हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बहु-स्रोत ऊर्जा प्रणालियां भविष्य में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान कर सकती हैं.

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