फतेह लाइव, रिपोर्टर


रामेश्वरम् में पांबन ब्रिज के उद्घाटन के साथ आस्था और आर्थिकी के नए युग की शुरुआत हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुल को देश को समर्पित करते हुए काशी तमिल संगमम के स्वप्न को साकार किया है. यह पुल न केवल रामेश्वरम् द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ता है, बल्कि यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे समुद्री पुल भी है. इसकी लंबाई लगभग 2.8 किमी है और इसे 535 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. यह पुल समुद्र तल से 22 मीटर ऊंचा है, जिससे ट्रेनों को समुद्र पार करने में अब 5 मिनट से भी कम समय लगेगा, जबकि पहले इसमें 25-30 मिनट लगते थे.
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आर्थिक विकास और पर्यटन को मिलेगा नया संजीवनी
नया पांबन ब्रिज रामेश्वरम् में धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास को नई दिशा देगा. हर साल लाखों श्रद्धालु रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन के लिए रामेश्वरम् पहुंचते हैं. बेहतर रेल सुविधाओं और पुल के उद्घाटन से तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे होटल, दुकानें, और परिवहन जैसे पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को सीधे लाभ होगा. इसके अलावा, मछुआरा समुदाय और स्थानीय व्यापारियों को भी इस पुल से सीधा फायदा मिलेगा. यह पुल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा.
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प्रधानमंत्री मोदी की विकासशील दृष्टि और तमिलनाडु में प्रभुत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु में विकास के नए नैरेटिव को स्थापित किया है. जहां तमिलनाडु सरकार भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता को बढ़ावा देने में व्यस्त है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने विकास को प्राथमिकता दी है. पांबन ब्रिज जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के माध्यम से उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के विज़न को साकार किया है. यह प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के स्तर पर सीधा लाभ लाने वाला है और तमिलनाडु के ग्रामीण और तटीय इलाकों में प्रधानमंत्री के प्रभुत्व को स्थापित करता है.