शीरे बोले – खुशीपुर की मनमानी से घुटन महसूस कर रहे थे, विपक्ष के अन्य सिख नेताओं ने भी लगाए गंभीर आरोप

फतेह लाइव, रिपोर्टर.
जमशेदपुर के टिनप्लेट गुरुद्वारा की प्रधानगी को लेकर होने वाला चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के शुरुआती दौर में ही सुर्खियों में बन गया है. नामांकन वापसी प्रक्रिया पूरी होने के अगले ही दिन शनिवार को विपक्षी खेमे ने सिंधु रोड झूला मैदान में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए चुनाव कमेटी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कमेटी का बहिष्कार करने का ऐलान किया. साथ ही सुरजीत सिंह खुशीपुर पर संविधान की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्षी खेमे ने मौजूदा कमेटी से बागी हुए महासचिव कश्मीर सिंह शीरे को अपने पक्ष में लाते हुए उन्हें जोर का झटका देते हुए आगामी चुनाव में अपनी दमदार मजबूती पेश करने का दावा किया है. इस दौरान शॉल ओढ़ाकर उनका स्वागत किया गया. साथ ही पूर्व प्रधान नानक सिंह, तरसेम सिंह सेमे, नामदाबस्ती के पूर्व प्रधान कुंदन सिंह और मौजूदा कमेटी के चेयरमैन सुखदेव सिंह मल्ली, बागी मीत प्रधान हरजिन्दर सिंह टीटू को भी सम्मानित किया गया.
विपक्षी खेमे के उम्मीदवार गुरदयाल सिंह मानावाल ने कहा कि चुनाव कमेटी संविधान के अनुरूप नहीं बनी है. इसलिए वैसाखी पर्व होने के बाद अगर उनके अनुरूप कमेटी नहीं बनाई गई तो इसके खिलाफ हल्ला बोला जायेगा.
शीरे ने कहा कि जब सुरजीत सिंह को सेवा मिली थी, तो उन्होंने निष्पक्ष कार्य करने का दावा किया था, लेकिन इन तीन सालों में उनके सभी दावे खोखले दिखे. वह अपनी मनमर्जी करने लगे, जिससे हम घुटन महसूस करने लगे. खुशीपुर ने अपने सगे भाई कुलदीप को खालसा क्लब में तंदूर का ठेका दे दिया. सुरेंद्र सिंह शिंदे को भी फूलों का काम दे दिया. इससे गुरुघर को उन्होंने व्यापार का अड्डा बनाना शुरू कर दिया. महासचिव के जो काम है उससे वंचित कर दिया. ऑफिस के खाते छुपाकर रखने शुरू कर दिए. ऐसे कई कारगुजारियों के कारण उन्होंने उस टीम को छोड़ दिया. वहीं गुरदीप सिंह काके, सुखदेव सिंह मल्ली, तरसेम सिंग सेमे, हरजिन्दर सिंह ने भी कई गंभीर आरोप लगाए. कहा कि अचार संहिता लगने के बाद दानपेटी खोली जा रही है. चुनाव कमेटी के संयोजक दोनों उम्मीदवारों की सहमति से होता है. उसके बाद दोनों पक्ष के दो दो लोगों को रखा जाता है तांकि चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष हो, लेकिन यहां सुरजीत सिंह उम्मीदवार. खुद उनके समर्थन में नाम वापस लेने वाला गुरचरण सिंह को संयोजक बना दिया गया. शिंदे जो गुरुघर का ठेकेदार है. ऐसे लोग जिनके साथ उम्मीदवार खुद गुरुद्वारा कार्यालय में बैठ रहे हैं, तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है. चुनाव कमेटी के अन्य मेंबर भी साबत सूरत नहीं है.
गुरुद्वारा के विकास कार्य अभी चार माह पूर्व मौजूदा कमेटी ने शुरू किया. तीन साल से कहां थे. यह सब कार्य पुराने प्रधान के कार्यकाल में हुए हैं, जिसका श्रेय वर्तमान कमेटी के लोग ले रहे हैं. साथ ही स्कूल में शिक्षक बहाली पर भी लाखों गबन का आरोप लगाया गया. आरोप है कि 27 लाख गुरु घर में जमा दिखाए गए, शेष राशि का बंदरबांट कर लिया गया. 12वीं के स्कूल की मान्यता का मामला भी लटका पड़ा है. ऐसे कई मामले हैं, जिन मामलों को लेकर मौजूदा कमेटी लूट खसोट का अड्डा बन कर रही. इसलिए संगत अब उन्हें सबक सिखाने के लिए हलकान है. प्रेस वार्ता में गोपाल सिंह, निर्मल सिंह, राजेंद्र सिंह तरसिका, कुलदीप सिंह, कमलजीत सिंह, मंजीत गिल आदि कई समर्थक मौजूद थे.



