यूनियन की कमेटी मीटिंग हुई तो एमजीबी में कंपनी पर फोड़ दिया ठीकरा
टुन्नू ने इशारा किया कि विपक्ष में रहते उनकी कही बातों को न बनाएं आधार
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में वेज रिवीजन के समझौता के मसले पर आधिकारिक तौर पर हुई टाटा वर्कर्स यूनियन की पहली कमेटी मीटिंग में जो कुछ हुआ, जो कहा गया, जो सुना गया, उसने महीनों से आशा लगाए कर्मचारियों का दिल तोड़ दिया। कुछ ऐसा बोला ही गया कि कर्मचारियों को बहुत ज्यादा आस न रहे। ऐसा बताया गया कि टाटा स्टील प्रबंधन ही कर्मचारियों को बहुत देना नहीं चाहता। खुद का चेहरा साफ सुथरा, लड़ाकू और कर्मचारियों का हमदर्द दिखाने के लिए सभी मर्ज़ का सबब कंपनी प्रबंधन को दिखाने की कवायद हुई।

यही संदेश दिया भी गया। याद दिलाना आवश्यक होगा कि टाटा समूह ही ऐसा है जिसने कर्मचारियों के हित में ऐसे फैसले लागू किये जो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बने है। उसी टाटा स्टील कंपनी पर ठीकरा फोड़ा गया कि कंपनी साढ़े सात फीसद भी एमजीबी देने के इच्छुक नहीं है। यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू चौधरी ने कमेटी मीटिंग में बताया कि कंपनी प्रबंधन ने 8 साल के लिए वेज समझौता का प्रस्ताव रखा है। एमजीबी भी 7.30 फीसद देने की बात कही गई है। कमेटी मीटिंग में कई कमेटी मेंबरों ने टुन्नू चौधरी को याद दिलाया कि उन्होंने एलाउंस पर एरियर समेत वेज पर कई वायदे किए थे।
टुन्नू चौधरी ने इशारे में जवाब दिया कि जो लोग विपक्ष के नाते मंच के नीचे बैठते हैं, वे इस तरह की आवाज उठाते रहते हैं। उन्होंने भी उठाया था। मगर अब जो है, वही हकीकत है। आशय साफ था कि आर रवि प्रसाद के कार्यकाल में हुए वेज समझौता के वक्त विपक्षी नेता के नाते उन्होंने जो कहा था, वायदे किए थे, उसे अब अपनी उम्मीदों का आधार न बनाये। टुन्नू ने साफ तौर पर तो नहीं, संकेत जरूर दिया कि जो वायदा किया था, वो निभाने के लिए नहीं था।
औपचारिक तौर पर पहली बार कमेटी मीटिंग की नोटिस में वेज रिवीजन पर चर्चा का जिक्र था। हालांकि, पहले भी हाउस में वेज पर परिचर्चा हुई है। मगर एनी अदर मैटर के तहत। खैर, इस दफा कमेटी मेंबरों को उम्मीद थी कि टॉप थ्री की तरफ से बहुत सारी बातें साफ़ होंगी। डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह ने सिर्फ इतना साफ किया कि वे हर फैसले पर टुन्नू चौधरी के साथ हैं।
वेज पर हुई वार्ता की प्रगति के बारे में भी वही बताएंगे। यूनियन महामंत्री सतीश कुमार सिंह ने यूनियन के भीतर बढ़ती अनुशासनहीनता पर चिंता जताई तो नाराजगी भी। वेज रिवीजन में विलंब होने की बात उन्होंने स्वीकार की। कहना था कि इस बार वेज के मसले पर वार्ता ही देर से शुरू हुई है। इस वजह से इतना विलंब हुआ है। मजदूर हित की बात पर वे यूनियन अध्यक्ष को हर स्तर पर सहयोग देने को तैयार है।
हालांकि वेज पर चर्चा से पहले कमेटी मीटिंग में यूनियन की कमाई और खर्च की विवरणी पारित हुई। सबसे पहले स्वर्गवासी हो चुके सदस्यों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। फिर पिछली कमेटी मीटिंग की कार्यवाही की संपुष्टि हुई। यूनियन कोषाध्यक्ष अमोद कुमार दुबे ने चार महीने का अकाउंट्स पेश किया। कमेटी मेंबर बमबम ने पब्लिक रिलेशन के मद में बढ़ते व्यय पर सवाल जवाब किया। इसके बाद कमेटी मेंबरों को बोलने का मौका मिला तो फिर चर्चा का एक ही मुद्दा था, लंबित वेज रिवीजन।
अरविंद बोले, एलाउंस का एरियर दिलाने का वायदा याद है ना
पूर्व में डिप्टी प्रेसिडेंट रह चुके अरविंद पांडेय लम्बे अरसे बाद टाटा वर्कर्स यूनियन की राजनीति में मुखर दिखाई दिए। उन्होंने टुन्नू चौधरी को वेज रिवीजन के मसले पर किए गए वायदे याद दिलाए तो बंद हो चुकी टाटा स्टील की ट्रेड अप्रेन्टिस का दुखता राग भी छेड़ दिया। बोले कि 2023 बैच के ट्रेड अप्रेन्टिस का टाटा स्टील में सीधा समायोजन होना चाहिए। यूनियन अध्यक्ष ने कहा था। अब करे। उन्होंने कहा कि 2019 में आर रवि प्रसाद ने वेज रिवीजन किया था तो उसके पहले और बाद में टुन्नू चौधरी ने उसमें खूब कमियां गिनाई थी। वायदा किए थे कि वे अध्यक्ष बन गए तो वेज समझौता में एलाउंस का भी एरियर दिलाएंगे। सवालिया लहजे में अरविंद बोले कि याद है ना। याद दिलाया कि टुन्नू ने ज्ञापन देकर एनएस के डीए का प्रति पॉइंट वैल्यू साढ़े चार रुपये करने की बात कही थी। वे अब खुद निर्विरोध यूनियन अध्यक्ष है। 2026 में एनएस को उतना ही डीए दिलाइए।
60 साल में हुए वेज समझौता की पोथी पत्री लेकर आये शिवेश वर्मा
टाटा वर्कर्स यूनियन में उपाध्यक्ष रह चुके सिन्टर प्लांट के कमेटी मेंबर शिवेश वर्मा पिछले 60 साल के भीतर टाटा स्टील (पहले टिस्को) में हुए वेज समझौते की पोथी पत्री लेकर कमेटी मीटिंग में आए। 1959 के वेज रिवीजन के समझौता का सबसे पहले उल्लेख किया। फिर 1965, 1970, 1975, 1979, 1983, 1989, 1995, 2010, 2014 एवं 2019 के वेज समझौता की अच्छी बातों से हाउस को अवगत कराया। हरेक ग्रेड समझौता के प्रमुख बिंदुओं पर उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला। उनका कहना था कि वेज समझौता के मूल ढांचा में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा हुआ तो कर्मचारियों को भारी क्षति होगी।
प्रदीप बोले कि एनएस और इंतजार को तैयार मगर अबकी चूक नहीं हो
एसएमडी के कमेटी मेंबर प्रदीप कुमार का संबोधन एनएस ग्रेड के कर्मचारियों पर रहा। उन्होंने कहा कि एनएस को न्यूनतम एमजीबी 15 हजार, फिक्स डीए 5000, वेरिएबल डीए 6 रुपए प्रति प्वाइंट और सालाना बढ़ोत्तरी बेसिक का 3 प्रतिशत किया जाना चाहिए। इन चार मांगों पर एनएस कर्मचारी कोई समझौता नहीं करेंगे। वेज रिवीजन में 17 महीने का विलम्ब हो चुका है। एनएस कर्मचारी और इंतजार को तैयार है। मगर अबकी चूक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रमोशन के लिए डिप्लोमा की बाध्यता खत्म होनी चाहिए। जून 2023 से इंसेंटिव बोनस भी नहीं मिला है। 20 से 25 हजार का नुकसान हो चुका है। वेज में इसका भी निष्पादन किया जाय।एजुकेशन एलाउंस प्रति बच्चा 5000 होना चाहिए। प्रदीप बोले कि टुन्नू चौधरी विपक्ष के नेता थे तो उनके किए वायदे एनएस के 7000 कर्मचारियों को भली भांति याद हैं। पिछले वेज रिवीजन की जो कमी बताई थी, उसका इस बार अवश्य समाधान करे। कोक प्लांट के राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यूनीफॉर्म ग्रेड स्ट्रक्चर के नाम पर रिक्ति को भरा नहीं जा रहा है। तुरंत इस पर काम होना चाहिए। सभी कर्मचारियों का सालाना इंक्रीमेंट 3 फीसद किया जाना चाहिए। एनएस का भी डीए प्रतिशत में किए जाने की जरूरत है।
कमेटी मीटिंग बुलाई जाय तो एनी अदर मेटर अवश्य होना चाहिए : राकेश
टीएमएच के कमेटी मेंबर राकेश कुमार सिंह का कहना था कि हाउस ही ऐसी जगह है जहां कमेटी मेंबर कर्मचारियों से जुड़े विविध विषय पर विचारों को साझा करते है। यूनियन नेतृत्व के संज्ञान में कई बातों को ला सकते हैं। बेहतर होगा कि कमेटी मीटिंग में एनी अदर मेटर को जरूर रखा जाय। उन्होंने कहा कि टीएमएच में सिर्फ 500 रुपए आईबी मिलता है। एफडीए 4000 होना चाहिए। एजुकेशन एलाउंस कम है। एनएस कर्मचारियों को ओएस ग्रेड के समान लाने के लिए विशेष भत्ता देना चाहिए।
छोटी कम्पनियों से टाटा स्टील के वेज की तुलना ठीक नहीं : तपन
पावर हाउस 5 के कमेटी मेंबर तपन कुमार ने कहा कि वेज रिवीजन के मसले पर कमेटी मेंबर मांग रखते हैं तो यूनियन के कुछ लोग छोटी कम्पनियों के वेतनमान का जिक्र कर खुद की कमी ढकने की कोशिश करते है। अनजाने ने टाटा स्टील की प्रतिष्ठा का हनन न करे। छोटी कम्पनियों से वेज की तुलना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि ईएसबीएस पास करने में काफी मुश्किल हो रहा है। इसका निवारण किया जाना चाहिए।
इन्होंने भी रखे विचार :
टीएंडडी के आरके सिंह, एचएसएम के एसएन सिंह, एलडी टू के आरके झा, एचएमएल के संजय कुमार, आरएमएम के सौम्या रंजन, एलडी वन के निरंजन, बालाजी भगत, मारुति नंदन पांडेय आदि।




