फतेह लाइव, रिपोर्टर.
जमशेदपुर में पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वाधान में नुक्कड़ सभा का आयोजन साकची गोलचक्कर के समीप संध्या समय में किया गया। नुक्कड़ सभा का अध्यक्षता जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने की। नुक्कड सभा को संबोधित करते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़े।

BJP कहती है कि वह महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देना चाहती है। वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिला आरक्षण को आगे बढ़ाया। BJP का दावा है कि उसने वर्षों से लंबित इस मुद्दे को पूरा किया। BJP विपक्ष पर आरोप लगाती है कि कांग्रेस और अन्य दलों ने पहले इसका विरोध किया या इसे लंबित रखा।
कांग्रेस कहती है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि इसकी पुरानी समर्थक है। कांग्रेस याद दिलाती है कि मार्च 2010 में डॉ. मनमोहन सिंह सरकार के समय राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित कराया गया था। कांग्रेस का कहना है कि वर्तमान सरकार ने महिला आरक्षण को जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) से जोड़ दिया है, जिससे इसका लागू होना टल सकता है। कांग्रेस चाहती है कि महिला आरक्षण जल्द लागू हो, बिना अनावश्यक देरी के।
कांग्रेस की मुख्य आपत्तियाँ
1) तुरंत लागू क्यों नहीं?
कांग्रेस का सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिल पास होने के बाद भी इसे तुरंत लागू क्यों नहीं किया गया। बिल के अनुसार आरक्षण लागू होने से पहले जनगणना होगी, Delimitation होगा, उसके बाद आरक्षण लागू होगा। कांग्रेस का कहना है कि इससे कई सालों की देरी हो सकती है।
कांग्रेस का तर्क है कि यदि सरकार गंभीर है तो अगले चुनाव से लागू करे। Census और Delimitation को बहाना बनाकर देरी की जा रही है। OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण नहीं। कांग्रेस ने कहा कि 33% आरक्षण में OBC महिलाओं के लिए अलग sub-quota नहीं दिया गया।
केवल सामान्य वर्ग की महिलाएँ अधिक लाभ ले सकती हैं। पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी समान अवसर मिलना चाहिए। सामाजिक न्याय के बिना महिला न्याय अधूरा है। Delimitation से राजनीतिक संतुलन बदल सकता है। कांग्रेस और अन्य दलों का कहना है कि Delimitation से कुछ राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं और कुछ की घट सकती हैं।
दक्षिण भारत और जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान हो सकता है। महिला आरक्षण को इस विवादास्पद प्रक्रिया से नहीं जोड़ना चाहिए। सरकार सिर्फ श्रेय लेना चाहती है। कांग्रेस का आरोप है कि BJP ने ऐसा बिल लाया जो दिखने में अच्छा है, लेकिन लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि यह राजनीतिक संदेश ज्यादा है, वास्तविक लाभ कम। चुनाव से पहले महिलाओं को प्रभावित करने की कोशिश है।
Rotation System पर चिंता व्यक्त करते हुए नेताओं ने कहा कि आरक्षित सीटें भविष्य में बदलती रहेंगी। सांसद अपने क्षेत्र में लंबे समय तक काम नहीं कर पाएँगे। विकास कार्य और राजनीतिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
BJP कहती है कि हमने बिल पास कराया, महिलाओं को अधिकार दिया। कांग्रेस का तर्क है हम भी समर्थन में हैं, लेकिन सरकार इसे लागू करने में देरी कर रही है। दोनों पार्टियाँ महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन विवाद श्रेय लेने, लागू करने की समयसीमा, OBC आरक्षण, और Delimitation को लेकर है। यानी – कांग्रेस का विरोध बिल से नहीं, बल्कि उसके ढाँचे और देरी से है।
नुक्कड सभा में मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह, अवधेश कुमार सिंह कार्यकारी अध्यक्ष, जसवंत सिंह जस्सी, गुरदीप सिंह, अंसार खान, अशोक सिंह क्रांतिकारी, रंजीत सिंह, राजकिशोर प्रसाद, सुल्तान अहमद, राकेश साहू, दुर्गा प्रसाद, बबलू नौशाद, लक्की शर्मा, राजकुमार वर्मा, हरेकृष्ण लोहार, बंटी पाण्डेय, मुन्ना मिश्रा, शैलेन्द्र कुमार, जे एस पदरी, संजय सिंह आजाद, नवनीत मिश्रा, आशीष ठाकुर, मकसूद आलम, गुरदीप सिंह, ईशान पात्रा, रीता शर्मा, आशुतोष सिंह, कौशल प्रधान, फिरोज खान, रजनी बंसल, गुरदीप सिंह सोहल, नमिता सिंह आदि शामिल रहे।



