ऑपरेशन ‘नार्कोस’ के तहत संयुक्त अभियान में मिली सफलता, लेकिन स्टेशन के बाहर बढ़ते अतिक्रमण और अव्यवस्था पर उठ रहे सवाल
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
जमशेदपुर में टाटानगर रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेल पुलिस (GRP) की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 34.7 किलोग्राम गांजा के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मंडल सुरक्षा आयुक्त, आरपीएफ चक्रधरपुर एवं रेल एसपी जमशेदपुर के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नार्कोस’ के तहत शुक्रवार देर रात की गई।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अमित कुमार (27), निवासी अरवल (बिहार), बबलू कुमार सिंह (27) तथा अजीत कुमार शाह (24), दोनों निवासी गोपालगंज (बिहार) के रूप में हुई है। तीनों के कब्जे से कुल 34.7 किलो गांजा बरामद किया गया। पूछताछ के बाद आरोपितों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए रेल थाना टाटानगर के सुपुर्द कर दिया गया है।
रेलवे सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। हाल के दिनों में ऑपरेशन नार्कोस के तहत लगातार अभियान चलाकर नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, इस सफलता के बीच टाटानगर स्टेशन के बाहर की स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्टेशन परिसर के बाहर लगातार बढ़ता अतिक्रमण, अवैध ठेले-खोमचे, बेतरतीब पार्किंग और अव्यवस्था यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां स्टेशन के भीतर सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चलाकर अपराध और तस्करी पर अंकुश लगाने में जुटी है।
वहीं स्टेशन के बाहरी क्षेत्र में अतिक्रमण और अव्यवस्था पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों का मानना है कि यदि स्टेशन के बाहर भी नियमित अभियान चलाया जाए तो यात्रियों को अधिक सुरक्षित और सुगम माहौल मिल सकेगा। खैर आपको बता दें कि यह पूरा मामला एक आंख में सुरमा और काजल वाली कहावत से जुड़ा है, जिसकी चर्चा जोरों पर हो रही है।
स्थानीय बागबेड़ा थाना पुलिस भी इस कहावत का हिस्सा बनी हुई है। बागबेड़ा क्षेत्र से उजाड़े गए दुकानदरों से दो हजार की वसूली और इन गेट, चाईबासा बस स्टैंड में मेहरबानी भी कहीं ना कहीं विधी व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ाना और धन शक्ति का उपयोग लेना आंख का सुरमा बना हुआ है, जिसे धोना कोई बड़ी बात नहीं? पीएम के अमृत भारत योजना पर भी यह सुरमा चढ़ाने की कोशिश स्थानीय जिला और रेल प्रशासन कर रहा है. रेल एसपी और समादेष्टा की यह टीम बाहर क्यों नहीं कार्रवाई करती, यह भी एक सवाल बना हुआ है?










