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Chakradharpur Division : सीनियर DCM दफ्तर से गोपनीय दस्तावेज और RTI डेटा लीक, बिचौलियों व भ्रष्टाचार के सिंडिकेट का बड़ा खुलासा!

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फतेह लाइव रिपोर्टर 

दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के सबसे कमाऊ और महत्वपूर्ण चक्रधरपुर (CKP) रेलमंडल के वाणिज्य (Commercial) विभाग में गंभीर प्रशासनिक अराजकता, अनियमितता और डेटा लीक का बड़ा मामला सामने आया है। चक्रधरपुर रेलमंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Senior DCM) कार्यालय से अति-गोपनीय टेंडर फाइलें, वित्तीय दस्तावेज और सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दाखिल किए गए आवेदनों का निजी डेटा अनधिकृत बिचौलियों, ठेकेदारों और सिंडिकेट के सदस्यों तक पहुंचाया जा रहा है।

यह पूरा मामला केवल साधारण डेटा लीक का नहीं है, बल्कि इसके तार वाणिज्य विभाग में सालों से जड़े जमाए बैठे भ्रष्टाचारियों के एक सुनियोजित सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं, जो रेलवे को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं।

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RTI आवेदकों की गोपनीयता भंग और सौदेबाजी का खेल

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत रेलवे या किसी भी सरकारी विभाग में प्राप्त आवेदनों और आवेदकों की निजी जानकारी को गोपनीय रखा जाना अनिवार्य है। हालांकि, चक्रधरपुर के सीनियर DCM दफ्तर में जैसे ही कोई RTI आवेदन पहुंचता है, आवेदक का नाम, पता, फोन नंबर और मांगी गई जानकारी की प्रतियां तुरंत बिचौलियों और संबंधित ठेकेदारों को व्हाट्सएप व अन्य माध्यमों से लीक कर दी जाती हैं।

इसके तुरंत बाद बिचौलिए और भ्रष्ट कर्मचारी आवेदक से संपर्क कर उसे डराने-धमकाने, प्रलोभन देने या सौदेबाजी करने का काम शुरू कर देते हैं। इस पूरे नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य यह है कि वाणिज्य विभाग में वर्षों से चल रहे वित्तीय घोटालों, फर्जी बोगस बिलिंग और अवैध टेंडर प्रक्रिया से पर्दा न उठ सके। फिलहाल चक्रधरपुर वाणिज्य विभाग के सीनियर डीसीएम आदित्य  चौधरी है जिनके कार्यकाल में तबादलों में भेदभाव के गंभीर आरोप लगे हैं.

चक्रधरपुर रेलमंडल के कामर्शियल विभाग में घोटालों का ढांचा

रेलवे का वाणिज्य (Commercial) विभाग मुख्य रूप से टिकट बुकिंग, माल ढुलाई (Freight Loading), पार्सल सेवाओं, विज्ञापन के अधिकारों, खान-पान (Catering) और स्टेशनों पर दुकानों/स्टॉलों के आवंटन से राजस्व एकत्र करता है। चक्रधरपुर रेलमंडल में वाणिज्य विभाग के अंतर्गत निम्नलिखित घोटालों और अनियमितताओं को अंजाम दिया जा रहा है:

  • टेंडर सिंडिकेट और सूचनाओं की प्री-लीकिंग: टेंडर की बोलियां (Bids) खुलने से पहले ही प्रतिस्पर्धी कंपनियों की बोलियों और गोपनीय फाइलों के आंकड़े चुनिंदा ठेकेदारों को दे दिए जाते हैं। इससे पसंदीदा ठेकेदारों को कम दर पर ठेका हासिल करने में मदद मिलती है और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म हो जाती है।

  • पार्सल एवं फ्रेट ओवरलोडिंग में हेरफेर: मालगाड़ियों और पार्सल वैन में निर्धारित वजन सीमा से अधिक सामान लादकर कम वजन की पर्ची काटना या रेलवे के वजन मापक उपकरणों (Weighbridges) में साठगांठ कर राजस्व की चोरी करना।

  • खान-पान एवं स्टॉल आवंटन में अवैध वसूली: स्टेशनों पर वेंडिंग स्टॉल, खान-पान इकाइयों और विज्ञापनों के लाइसेंस आवंटन में नियमों को दरकिनार कर ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाना और बदले में अवैध कमीशन वसूलना।

  • फर्जी क्लेम और रिफंड घोटाला: वाणिज्य विभाग के माध्यम से टिकट रिफंड, माल क्षतिपूर्ति क्लेम और फर्जी बिलों का भुगतान कराकर रेलवे के खजाने को नुकसान पहुंचाना। सभी मामले जांच के दायरे में आ रहे हैं.

ट्रांसफर नीति की अनदेखी, 4 साल से अधिक समय से जमे कर्मचारी

रेलवे बोर्ड और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के सख्त दिशानिर्देश हैं कि रेलवे में संवेदनशील पदों (Sensitive Posts) पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों का अधिकतम 4 वर्षों में अनिवार्य रूप से तबादला (Rotational Transfer) किया जाना चाहिए, ताकि भ्रष्टाचार का कोई सिंडिकेट न पनप सके।

इसके बावजूद, सीनियर DCM चक्रधरपुर के कार्यालय और वाणिज्य विभाग के गोपनीय/टेंडर सेक्शन में कई चहेते कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर 5 से 8 सालों से एक ही टेबल और सेक्शन में अंगद के पांव की तरह जमे हुए हैं। उच्च अधिकारियों के संरक्षण में चल रहे इस नेटवर्क के कारण नए और ईमानदार कर्मचारियों को इन संवेदनशील सेक्शनों से दूर रखा जाता है, जिससे भ्रष्टाचार का यह पूरा खेल बिना किसी बाधा के चलता रहे।

उच्चस्तरीय विजिलेंस जांच और CVC कार्रवाई की मांग

चक्रधरपुर रेलमंडल में प्रशासनिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए अब त्वरित और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

  1. निष्पक्ष विजिलेंस जांच: चक्रधरपुर के मंडल रेल प्रबंधक (DRM), दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) मुख्यालय के विजिलेंस विभाग और रेलवे बोर्ड को तत्काल सीनियर DCM कार्यालय की फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक जांच करानी चाहिए।

  2. संवेदनशील पदों से तत्काल तबादला: 4 साल से अधिक समय से एक ही पद व सेक्शन पर टिके कर्मचारियों का तुरंत स्थानांतरण कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जानी चाहिए।

  3. CVC एवं सीबीआई हस्तक्षेप: यदि इस डेटा लीक और टेंडर सिंडिकेट पर तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला सीधे केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के पास पहुंचेगा।

रेलमंडल के राजस्व और जनता के विश्वास को बचाने के लिए जरूरी है कि इस पूरे सिंडिकेट में शामिल बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को बेनकाब कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

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