डीआरएम तरुण हुरिया के निर्देश पर रात 2:03 बजे शुरू हुआ आपदा प्रबंधन अभ्यास
टाटानगर रेल सिविल डिफेंस के 27 जवानों ने संभाला मोर्चा
कोच काटकर यात्रियों को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का किया अभ्यास
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
आधी रात का सन्नाटा, अचानक पांच हुटर की आवाज और बण्डामुण्डा सीएफ यार्ड में पैसेंजर ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना। रेलवे के अधिकारी और राहत-बचाव दल तत्काल सक्रिय हो गए। दुर्घटना के इस दृश्य ने कुछ देर के लिए आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी, लेकिन यह वास्तविक रेल हादसा नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल थी। गुरुवार की मध्यरात्रि चक्रधरपुर रेल मंडल की ओर से आयोजित इस अभ्यास में तीन लोगों की मौत और 19 यात्रियों के घायल होने का काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया।

रात 2:03 बजे बजे पांच हुटर, सक्रिय हुआ रेल मंडल
मॉक ड्रिल के दौरान रात 2 बजकर 3 मिनट पर चक्रधरपुर स्टेशन में पांच हुटर बजाए गए। इसके बाद सूचना दी गई कि बंडामुंडा सीएफ यार्ड में पैसेंजर ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। अभ्यास में ए-वन और बी-वन वातानुकूलित कोच तथा एस-वन स्लीपर कोच के आपस में टकराने की स्थिति दिखाई गई।

सूचना मिलते ही रेलवे के संबंधित विभागों ने राहत एवं बचाव अभियान की तैयारी शुरू कर दी। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) तरुण हुरिया, अपर मंडल रेल प्रबंधक, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी, सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (ओपी), वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक समेत अन्य अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और अभियान का जायजा लिया।

टाटानगर के 27 जवानों ने संभाली बचाव की जिम्मेदारी
दुर्घटना की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार के नेतृत्व में टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की टीम आवश्यक बचाव सामग्री के साथ घटनास्थल पहुंची। टीम के 27 जवानों ने कोच में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने और उन्हें चिकित्सा शिविर तक पहुंचाने का अभ्यास किया।

अभ्यास के दौरान एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन के जवानों ने भी बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बकेट स्ट्रेचर और रस्सियों की मदद से घायलों को कोच से नीचे उतारने तथा प्राथमिक चिकित्सा शिविर तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई गई। आधुनिक उपकरणों से कोच की खिड़कियां काटकर फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का भी अभ्यास किया गया।

मॉक ड्रिल के निर्धारित परिदृश्य में चिकित्सा दल ने 19 यात्रियों के घायल होने और तीन लोगों के मृत पाए जाने की स्थिति के अनुसार अपनी कार्रवाई की। यह संख्या अभ्यास का हिस्सा थी, किसी वास्तविक रेल दुर्घटना में हताहतों की नहीं।
यात्रियों के सामान की सुरक्षा से हेल्प डेस्क तक की तैयारी
राहत-बचाव अभियान के साथ यात्रियों के सामान की सुरक्षा और परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। अभ्यास के दौरान दुर्घटनास्थल से यात्री का सामान लेकर भाग रहे एक चोर को पकड़कर जीआरपी के हवाले करने की प्रक्रिया भी दिखाई गई।
यात्रियों और उनके परिजनों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए टाटानगर, चक्रधरपुर और राउरकेला स्टेशनों पर हेल्प डेस्क स्थापित करने की व्यवस्था का अभ्यास किया गया। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में यात्रियों के परिजनों तक सूचना पहुंचाने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने की तैयारियों को परखना था।
इस मॉक ड्रिल में टाटानगर रेल सिविल डिफेंस के 27 जवानों के अलावा रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के 45 जवान, स्काउट्स एंड गाइड्स के 23 सदस्य तथा सेंट जॉन एम्बुलेंस के स्वयंसेवक शामिल हुए। टाटानगर सिविल डिफेंस टीम की ओर से तैयार डमी के माध्यम से दुर्घटना जैसी परिस्थितियां बनाई गईं।
डीआरएम ने दिए तैयारी और समन्वय मजबूत करने के निर्देश
मॉक ड्रिल के समापन पर डीआरएम तरुण हुरिया ने विभिन्न विभागों के राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा, त्वरित प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही सहायता केंद्रों की संचार व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
डीआरएम ने टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम की तत्परता की सराहना करते हुए नियमित अंतराल पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में बचाव कार्य बिना विलंब प्रभावी ढंग से शुरू किया जा सके।
रेल मंडल के अनुसार, इस अभ्यास का समय मध्यरात्रि में अचानक निर्धारित किया गया था, ताकि आपात स्थिति में संबंधित विभागों की वास्तविक तत्परता को परखा जा सके। करीब तीन घंटे तक चले इस अभ्यास में संसाधनों की उपलब्धता, संचार व्यवस्था, घायलों को निकालने और यात्रियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की तैयारियों का परीक्षण किया गया।


































