ट्रेनों की लेट लतीफी को लेकर रेल मंत्रालय गंभीर, आदेश के बाद भी विजिलेंस जांच नहीं हुई शुरू, इधर – मामले में आरटीआई नियमों का हनन कर रहे रेल के अधिकारी
आरटीआई कार्यकर्त्ता कमलेश कुमार ने उठाया था मामला, कहा – प्रधानमंत्री की अमृत भारत योजना के सपनों को चकनाचूर कर रहें रेल मंडल के अधिकारी
चरणजीत सिंह.
दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्ररधपुर रेल मंडल अंतर्गत यात्री ट्रेनों की लेट लतीफी होने का गंभीर मामला रेल मंत्रालय तक पहुंचा हुआ है. टाटानगर से आरटीआई कार्यकर्ता कमलेश कुमार की 25 अप्रैल 2025 के शिकायत पत्र में संज्ञान लेते हुए 6 जून 2025 को जोनल जनरल मैनेजर (विजिलेंस) अवतार ने शिकायतकर्ता को नियमित पत्र के द्वारा संपर्क किया, लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी विजिलेंस जांच शुरू नहीं हुई, जिसे लेकर शिकायतकर्ता कमलेश कुमार भी गंभीर हो गए हैं.
वहीं ट्रेनों की लेट लतीफी के मामले में सूचना अधिकार अधिनियम 2025 के तहत रेल मंडल से भी सूचना मांगी है, जिसमें रेल के तोड़ मरोड़ कर भेजे गए जवाब पर कमलेश कुमार ने आरटीआई नियमों का हनन करने का आरोप रेल के अधिकारियों पर लगाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के अमृत भारत योजना के सपनों को रेल मंडल के अधिकारी पंख काटने का काम कर रहे हैं. कमलेश कुमार ने कहा कि ट्रेनें विलम्ब से चलने के कारण आम जनमानस परेशान है. डीआरएम खुद उसी रास्ते से टाटानगर आते जाते रहते हैं. उन्हें जनमानस की परेशानी दिखाई नहीं देती. वह तो सैलून में आराम से आ जाते हैं. रेल मंडल में ब्यूरोकेट्स हावी हो चुका है.
रेल मंत्री को ये की गई थी शिकायत
25 अप्रैल 2025 को रेल मंत्री को शिकायत की गई. चक्रधरपुर रेल मंडल अन्तर्गत प्रत्येक दिन चौबीस घंटे में एक्सप्रेस ट्रेन, सुपरफास्ट ट्रेन तथा अन्य रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों का आगमन एवं प्रस्थान टाटानगर रेलवे स्टेशन होकर होता है. सभी की जांच कर कार्रवाई करने का अनुरोध रेल मंत्री और चेयरमैन रेलवे बोर्ड को किया गया था.
शिकायतकर्ता कमलेश कुमार के अनुसार चक्रधरपुर रेल मंडल अन्तर्गत टाटानगर रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली मालवाहक ट्रेनों तथा टाटानगर औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में ट्रेनों द्वारा माल का आयात एवं निर्यात किया जाता है. उक्त आयात एवं निर्यात में रेलवे बोर्ड एवं रेल मंत्रालय को राजस्व की राशि रेलवे विधि अनुसार (नियमानुसार) वसूली नहीं करने के कार्यों को देखने वाले कर्मचारी एवं अधिकारियों द्वारा रेलवे राजस्व की उगाही को रोककर निजी राजस्व उगाही का कार्य किया जाता है, जो प्रत्येक वर्ष लाखो-करोड़ों की राशि औद्योगिक प्रतिष्ठान को बचाने का कार्य रेलवे अधिकारी के द्वारा किया जाता है.
उन्होंने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल अन्तर्गत रेल पैसेंजर (यात्रियों) को एक्सप्रेस ट्रेन, चुपरफास्ट ट्रेन एवं रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों की सुविधाओं को समाप्त कर इन यात्रियों के ट्रेनों को प्रत्येक दिन चार से पाँच घंटे के विलंब से चांडिल मानीकूई, कुनकी, कांड्रा, बिरराजपुर गम्हरिया, आदित्यपुर, टाटानगर स्टेशन के बीच चलाया जाता है. इसके एवज में औद्योगिक प्रतिष्ठान के मालवाहक ट्रेनों को पास कराकर उद्योगपति से रिश्वत वसूली जाती है तथा देश की सम्पति को लूटने के साथ अन्याय किया जाता है, जो गंभीर आरोप है तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये निन्दनीय एवं अशोभनीय है, जिस पर गोपनीय जांच कराकर दोषी लोकसेवक के बीच कारवाई किया जाना आपका वैधानिक दायित्व है तथा ऐसे भ्रष्ट एवं भ्रष्टाचार के प्रक्रिया के तहत देश की सम्पति को लूटने वालों से बचाने हेतु संविधान के अनुच्छेद 51ए के तहत मेरा भी कर्तव्य एवं दायित्व निर्धारित किया जा चुका है जिसमें गोपनीय जांच कराकर कार्रवाई करने का कष्ट उठाया जाना वैधानिक दायित्व है तथा शिकायतकर्ता को सहयोग करना भी आपका वैधानिक कार्य क्षेत्र में है.
उन्होंने इस आवेदन में उल्लेखित तथ्यों के आधार पर शिकायत का निराकरण हेतु चक्रधरपुर रेल मंडल अन्तर्गत संचालित विभिन्न ट्रेनों का आगमन एवं प्रस्थान का समय-सीमा के साथ मालवाहक ट्रेनों का भी आगमन एवं प्रस्थान का संधारित लेखा-जोखा की जांच पड़ताल कर दोषी लोकसेवक पर कार्रवाई करने का कष्ट करने की मांग की है.

इधर, आरटीआई के तहत भी मांगी जानकारी, रेल अधिकारियों ने ये दिया तर्क, जो हास्यपद
चक्रधरपुर रेल मंडल के अन्तर्गत प्रत्येक दिन कितनी एक्सप्रेस ट्रेन /सुपर फास्ट एवं अन्य ट्रेनों का टाटानगर रेलवे स्टेशन पर डाउन ट्रेन प्रत्येक दिन भाया चांडिल एवं टाटानगर पहुंचने तक एक्सप्रेस ट्रेन, सुपर फास्ट ट्रेन इत्यादि कुल कितनी ट्रेनों का टाटानगर रेलवे स्टेशन पर आना होता है. उक्त एक दिन एक रात के चौबीस घंटे टाटानगर रेलवे स्टेशन पर पहुँचने वाली ट्रेनों का नाम एवं टाटानगर पहुँचने का समय तथा कितनी ट्रेनें कुल-कितने-कितने घंटे विलंब से आई है. उक्त विलम्ब का समय-सीमा (समय) में आई है. उसका विवरणी छह माह के अंतराल में सभी विलंब से चलने वाली ट्रेनों का सूचना एवं विलंब किये जाने वाले स्टेशनों का नाम तथा विलंब होने का कारण का सूचना देने वाले का नाम, पदनाम सहित अन्य सुसंगत संधारित रखे जाने वाले कागजातों की छाया प्रति अभिप्रमाणित उपलब्ध कराया जाय.
चक्रधरपुर रेल मंडल अन्तर्गत टाटानगर रेलवे स्टेशनों से गुजरने वाली मालवाहन ट्रेनों का कुल कितने का आगमन होता है तथा उसका समय निर्धारण से संबंधित पत्र की छाया प्रति तथा अन्य सुसंगत कागजात अभिप्रमाणित के साथ सूचीबद्ध सभी मालवाहक ट्रेनों का सूचना दिया जाय, जिसमें टाटा स्टील लिमिटेड औद्योगिक प्रतिष्ठान सहित अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठान में जगह-जगह पर जाने वाली मालगाड़ियों का भी विवरण उपलब्ध कराया जाय.
टाटानगर औद्योगिक प्रतिष्ठान सहित अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मालवाहक ट्रेनों द्वारा उत्पादन सामग्री एवं अन्य उत्पादन से संबंधित सुसंगत सामग्रियों के साथ उत्पादित सामग्रियों का टाटानगर से अन्य जगहों पर जाने वाली मालवाहक ट्रेनों से भाड़े के रूप में प्रत्येक छः माह का विवरणी सहित प्राप्त राशियों का विवरणी भी अभिप्रमाणित उपलब्ध कराया जाय.
रेल मंडल अंतर्गत टाटानगर स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत मालवाहक ट्रेनों का आगमन एवं प्रस्थान का समय सीमा से सम्बंधित लेखा जोखा की विवरणी या वरीय पदाधिकारियों का अनुमोदन की छाया प्रति उपलब्ध कराई जाये. किस मालवाहक ट्रेनों के माध्यम से रेलवे बोर्ड, रेल मंत्रालय, भारत सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है. उसकी विवरणी की छाया प्रति अभि प्रमाणित पिछले छह माह का उपलब्ध कराई जाये.
कमलेश कुमार के अनुसार यह सूचना मांगने का उद्देश्य रेलवे बोर्ड के द्वारा ट्रेनों के ठहराव से सम्बंधित निर्धारण आदेश पत्र के अतिरिक्त क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा औद्योगिक प्रतिष्ठान के मालवाहक ट्रेनों के माध्यम से रेलवे कल्याण कार्य हेतु संचालित एक्सप्रेस ट्रेन, सुपफास्ट तथा अन्य ट्रेनों का सेक्शन वाइज स्टेशनो पर रोककर यात्रियों को परेशान करने का कार्य किया जाता है तथा औद्योगिक क्षेत्र के नियोजकों से उनके औद्योगिक प्रतिष्ठान में खपत होने वाली सामग्रियों को पहुंचाने का कार्य रिश्वत लेकर पहले किया जाता है तथा रेलवे बोर्ड के वरीय पदाधिकारी सहित रेल मंत्रालय के साथ खिलवाड़ करने का कार्य किया जा रहा है.
इस आरटीआई के अलोक में 26 जून को सीनियर डीओएम (समन्वय) ने जवाब दिया कि सूचना की मात्रा अत्यधिक है. इसे एकत्र करने व छायाप्रति तैयार करने में विभागीय संसाधनों की अत्यधिक खपत होगी. इससे अन्य सार्वजनिक कार्यों पर प्रभाव पड़ सकता है. अत: आरटीआई अधिनियम की धारा 7 (9) के तहत यह सूचना मांगे गए रूप में प्रदान नहीं की जा सकती. वहीं टाटा से गुजरने वाली मालगाड़ियों की संख्या, गतिशील प्रकृति की है. इसलिए इसे प्रस्तुत नहीं किया जा सकता.
दूसरी तरफ कमलेश कुमार ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अधिनियम की धारा 7/9 के तहत सूचना उपलब्ध नहीं कराये जाने का जिक्र किया गया है, जो अनुचित एवं अत्याचार है. यह लोकतंत्र में लोक प्रतिनिधि द्वारा बनाये गए अधिनियम 2005 को प्रभावित नहीं करता. ना ही मांगी गई सूचना राष्ट्रीय सुरक्षा से सम्बंधित है. लोकसेवकों राष्ट्रीय संपत्ति का गलत इस्तेमाल कर निजी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं तथा रेलवे विभाग द्वारा पेसेंजर, एक्सप्रेस एवं दुर्गामी ट्रेनों का परिचालन समय समय पर निर्धारित किया जाता है एवं परिचालन किया जाता है. तथा रेल विभाग द्वारा मालवाहक ट्रेन द्वारा लाखों करोड़ों की आय विभिन्न माल भेजने वाले ग्राहकों के द्वारा रेल कर्मचारियों एवं अधिकारियों को रिश्वत देकर दुर्गामी एवं एक्सप्रेस ट्रेनों को विलम्ब से चलाकर निजी आय के स्त्रोत को बनाये रखने हेतु मालवाहक ट्रेनों को पहले प्राथमिकता दी जाती है, जबकि किसी भी रेलगाड़ी का परिचालन का समय सीमा रेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा या रेलवे बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिसका भंडाफोड़ करने की प्रक्रिया एकमात्र सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 विराजमान है, जिसे बाधित करने की शक्ति किसी लोक सेवक को नहीं है. बहरहाल, डिवीजन के अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं. 25 जुलाई को भेजे गए आपत्ति पत्र के बाद वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (जी) ने 22 जुलाई को लिखित जवाब दिया कि अगर आप मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं है तो आप प्रथम अपील एडीआरएम को कर सकते हैं. उसके बाद दिनांक 6 अगस्त 2025 को आवेदक ने प्रथम अपील दायर कर दी है. उसके बाद प्रथम अपीलीय पदाधिकारी ने आवेदक को केंद्रीय सूचना आयोग दिल्ली जाने की सलाह दे डाली. अब आवेदक ने द्वितीय अपील करने की तैयारी में है.



