कॉमन ग्रेड स्ट्रक्चर के तहत 400 मैनपावर का समझौता होने के बाद भी हटाने पर जताया आश्चर्य
संजीव चौधरी को बोलना पड़ा कि अब अति हुई तो इसे प्रबंधन का एकतरफा फैसला माना जाएगा
वायदा किया कि तबादला या कोई और भय दिखा कर एसएसएस के लिए बाध्य किया तो यूनियन स्टैंड लेगी
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
टाटा वर्कर्स यूनियन की सोमवार को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में हुई. कमेटी मीटिंग में टाटा स्टील के ट्यूब डिवीजन के कर्मचारियों को भयभीत कर नौकरी छोड़ने के लिए बाध्य किए जाने का मसला खूब उठा. सरोज सिंह समेत जो भी कमेटी मेंबर बोले, उन्होंने ट्यूब का जिक्र जरूर किया. ट्यूब डिवीजन में एसएसएस लाया गया है जो ईएसएस और वीआरएस जैसी योजना है. ट्यूब के कमेटी मेंबर सरोज सिंह ने ट्यूब के कर्मचारियों का दुखड़ा सुनाना शुरू किया तो पूरे हाउस का माहौल गमगीन हो गया.
बताया कि ट्यूब ने करोड़ों रुपए का निवेश कर ऐसी मशीनें लगाई गई है जिनका उपयोग नहीं किया गया. बाकायदा इसकी सूची जारी की. बताया कि अदूरदर्शी तरीके से निवेश हुआ जो नुकसानदायक रहा. अब उसकी सजा कर्मचारी भुगत रहे हैं. सरोज ने यूनियन के सभी ऑफिस बेयरर को अपने संबोधन की लिखित प्रति भी दी. ट्यूब पर कमेटी मेंबरों का रोष को टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ टुन्नू भांप गए.
उन्होंने कहा कि अब अति हुई तो इसे प्रबंधन का एकतरफा फैसला माना जाएगा. किसी तरह का भय दिखा कर अथवा ट्रांसफर करने की धमकी देकर जबरन स्वैच्छिक सेवानिवृति को बाध्य किया जाता है तो यूनियन स्टैंड लेगी. भारी विरोध होगा.
दरअसल, सोमवार को टाटा वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग शुरू हुई तो अधिकतर कमेटी मेंबर ट्यूब डिवीजन के घटनाक्रम से बेहद क्षुब्ध नजर आए. टाटा स्टील के वेज रिवीजन में विलंब, यूनियन के संविधान में संशोधन के तौर तरीके और महिला कर्मचारियों से जुड़े मसले पर यूनियन नेतृत्व की खामोशी से सबमें नाराजगी साफ दिख रही थी. ट्यूब डिवीजन का घटनाक्रम मानो कोढ़ में खाज बन गया हो. यही वजह है कि कमेटी मेंबर्स से लेकर ऑफिस बेयरर्स ने पुरजोर तरीके से विरोध दर्ज कराया.
यूनियन के पूर्व ऑफिस बेयरर सरोज सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से ट्यूब डिवीजन के हालात को रखना शुरू किया तो पूरे हाउस का माहौल बिल्कुल गंभीर हो गया. टुन्नू समझ गए कि अब और टाला नहीं जा सकता. टुन्नू बोले कि सरोज सिंह ने जिस तरीके से लिखित तौर पर दस्तावेज दिए है, वो सबके लिए अनुकरणीय है. इससे प्रबंधन के साथ वार्ता में सहूलियत होगी.
::: सरोज ने उठाए ये मुद्दे :::
सितंबर 2023 में हुए कॉमन वेज स्ट्रक्चर के समझौता में दर्ज है कि ट्यूब डिवीजन में टाटा स्टील के कुल 493 कर्मचारी रहेंगे. ब्लॉक 4 के 27, ब्लॉक 3 के 197, ब्लॉक 2 के 269 पद रहेंगे. अभी ट्यूब में 400 कर्मचारी है. फिर एसएसएस के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृति के लिए दबाव बनाना समझ से परे है. समझौता को भी तोड़ना है.
चालू वित्तीय वर्ष के पहले दिन एक अप्रैल को ट्यूब के ईआईसी महोदय ने हर विभाग के केक कटिंग समारोह में कहा था कि इसी मैनपावर से कंपनी चलाई जाएगी. किसी को ट्यूब से बाहर नहीं भेजा जाएगा. सवाल है कि आखिर 7 महीने में ऐसी क्या परिस्थिति आ गई कि कर्मचारियों को यह दिन देखना पड़ रहा है.
2014 में ट्यूब के 198 कर्मचारियों से ट्यूब से जमशेदपुर प्लांट के दूसरे विभागों में भेजा गया था. तब सतीश सिंह और शाहनवाज आलम ट्यूब के प्रभारी पदाधिकारी थे. उस समय ट्यूब के कमेटी मेंबरों की प्रभारी पदाधिकारियों से विधिवत चर्चा हुई थी. यूनियन के टॉप थ्री की मौखिक सहमति के बाद तबादला हुआ था. इस बार कमेटी मेंबरों से चर्चा तक नहीं की गई. प्रभारी पदाधिकारी एक बार भी ट्यूब डिवीजन नहीं गए.
ट्यूब में करोड़ों का सुपर स्पेशलिटी एंबुलेंस बिना उपयोग के सड़ रहा है. पीटी थ्री इंच मिल के आधुनिकीकरण में करोड़ों खर्च. उपयोग शून्य. पीटी मिल्स के स्मार्ट वेयरहाउस का उपयोग नहीं हो रहा है. करोड़ों का हाइड्रो फॉर्मिंग मिल लगा. उखाड़ भी दिया गया. पीटी मिल्स में पार्थ कोल्ड ड्रा यूनिट लगाया गय. वो भी बंद. ऐसे अनेक उदाहरण है. कंपनी के करोड़ों खर्च हुए. लाभ नहीं मिला. उसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने पर मजबूर किया जा रहा है. कृपया कुछ करें.
ऐसा लगता है कि यूनियन नेतृत्व इतना कमजोर हो चुका है कि खुद किए गए कॉमन ग्रेड स्ट्रक्चर के समझौता का पालन कराने में असमर्थ है. भविष्य में टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में 8275 कर्मचारियों की संख्या को भी कायम रख पाना अब संभव नहीं लगता.


