शीर्ष तीन को छोड़ शेष ऑफिस बेयरर्स से एनएस के कमेटी मेंबरों ने वेज रिवीजन पर की सीधी बात
एनएस वाले बोले कि वोट हमारा, दर्द हमारा और सिर्फ राज तुम्हारा, अब ऐसा नहीं चलेगा
जो ऑफिस बेयरर्स वेज पर प्रबंधन से वार्ता में नहीं जाते, उनका भी साथ पाने की एनएस की कवायद
चरणजीत सिंह.

टाटा वर्कर्स यूनियन में न्यू सीरीज के कमेटी मेंबरों का सोमवार को हुजूम आया. पहले उन लोगों ने रणनीति बनाई थी कि वेज रिवीजन पर यूनियन के शीर्ष नेतृत्व संजीव चौधरी, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह से सीधा संवाद करेंगे. बाद में एनएस के कमेटी मेंबरों ने रणनीति में बदलाव किया. तय किया कि शीर्ष तीन पदाधिकारी को छोड़ पहले बाकी ऑफिस बेयरर्स से बात की जाए. इसके तहत एनएस के कमेटी मेंबरों ने टाटा वर्कर्स यूनियन के सभागार में ऑफिस बेयरर्स को बुलाया.
यूनियन कोषाध्यक्ष अमोद दुबे, उपाध्यक्ष डॉक्टर शहनवाज़ आलम, संजीव तिवारी, संजय सिंह और सहायक सचिव नितेश राज, अजय चौधरी और श्याम बाबू से सीधे रूबरू हुए. संदेश देने की कोशिश की गई कि एनएस के कमेटी मेंबरों के वोट से कुर्सी पर विराजमान हैं. भले ही टाटा स्टील प्रबंधन के साथ वे लोग वेज रिवीजन की वार्ता में नहीं जाते हैं. इसके बावजूद उन लोगों को भी एनएस की आवाज बननी चाहिए. यूनियन के शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बनाने में सहयोग करना चाहिए.
टाटा वर्कर्स यूनियन के एनएस के कमेटी मेंबरों ने साफ कर दिया कि उनकी लड़ाई में जो तटस्थ रहेंगे, समय उनका भी अपराध दर्ज करेगा. एनएस के कमेटी मेंबरों ने उन्हें अपनी मांगों से अवगत कराया. साफ इशारा किया कि उन लोगों के डीए सबसे अहम मुद्दा रहा था, है और रहेगा. सालाना 3 प्रतिशत इंक्रीमेंट पर भी कोई इतर समझौता नहीं होना चाहिए. कहा गया कि ब्लॉक के आधार पर कर्मचारियों को हर 4 वर्ष में इंक्रीमेंट दिया जाना चाहिए, विशेषकर उन कर्मचारियों को जो ब्लॉक के अंतिम ग्रेड में हैं. भविष्य में ब्लॉक वन एवं टू के कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
एनएस के कमेटी मेंबरों ने उठाई यह आवाज
बालाजी भगत : 2012 एवं 2018 के ग्रेड समझौता में कर्मचारियों को पूरा हक नहीं मिला है. यह दोबारा नहीं होना चाहिए. इसके लिए सभी जिम्मेदार होंगे. किसी को भी माफ नहीं किया जाएगा. 2014 एवं 2018 के ग्रेड से जुड़े दो शीर्ष नेता वर्तमान कार्यकाल में भी पद पर हैं. अब उनके लिए सुधारने का मौका है.
राकेश कुमार सिंह : पिछले दो ग्रेड में एनएस से संबंधित मुद्दों पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई है. इस बार किसी भी परिस्थिति में कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए.
हरिओम जायसवाल : यदि पुराने समय में डीए प्रति प्वाइंट बढ़ सकता था, तो वर्तमान समय में क्यों नहीं बढ़ाया जा सकता. यही सबसे अहम है. एजुकेशन भत्ता महंगाई के अनुरूप होना चाहिए.
सुमन पांडेय : एनएस के वेतनमान में बढ़ोत्तरी के लिए कुछ चीजें बेहद अहम है. एमजीबी, फिक्स डीए, वेरिएबल डीए, सालाना वेतन बढ़ोत्तरी के हर पहलू मायने रखते हैं. एनएस का वार्षिक ग्रोथ 8 फीसद होना चाहिए.
प्रदीप दुबे : एमजीबी न्यूनतम 50 प्रतिशत किया जाए। वेरिएबल डीए 6 रुपए प्रति प्वाइंट होना चाहिए. फिक्स डीए भी 5 हजार रुपए निर्धारित किया जाना आवश्यक है. सालाना बढ़ोत्तरी 3 फीसद होनी चाहिए.
राजेश कुमार सिंह : एनएस का वार्षिक ग्रोथ 3 फीसद भी नहीं है, जो अत्यंत निराशाजनक है. वेरिएबल डीए में इस बार वास्तविक बढ़ोतरी होनी चाहिए. सालाना बढ़ोत्तरी में व्यापक बदलाव भी किया जाना चाहिए. एनएस कर्मचारियों की ब्लॉक के आधार पर ग्रोथ सिर्फ 12 से 16 सौ तक सीमित है. यह संतोषजनक नहीं है.
विकास दास : पिछले दो ग्रेड में एनएस कर्मचारियों की अनदेखी हुई है. इस बार ऐसा न हो. वर्तमान में सालाना बढ़ोत्तरी बिल्कुल संतोषजनक नहीं है. पुराने ग्रेड समझौता में यूनियन के लीडरों को लाभ हुआ. एनएस के कर्मचारियों को नहीं. हाल के कई एग्रीमेंट्स ऐसे हुए हैं जिनमें कर्मचारियों को कोई ठोस लाभ नहीं मिला है. वर्कलोड जरूर बढ़ गया है.
बिजेन्द्र शाह : एमजीबी, वीडीए और एनुअल इंक्रीमेंट अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं. इस बार सभी को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है.
नीरज पराशर : कर्मचारियों में भारी रोष है. इस बार मजबूत एवं सम्मानजनक वेज रिवीजन कराया जाना अत्यंत आवश्यक है.
परितोष सिंह : सभी पदाधिकारियों को इस बैठक में एनएस से संबंधित अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखना चाहिए. आगे का रोड मैप क्या होगा ? इस पर भी अपनी बात रखनी चाहिए.
एनएस के कमेटी मेंबरों ने दर्ज कराई उपस्थिति
राकेश कुमार सिंह, रणवीर सिंह, हरिओम जायसवाल,
राजेश कुमार सिंह, प्रदीप दुबे, राहुल श्रीवास्तव, रवि उपाध्याय, रोशन कुमार, श्याम नंदन, संजय कुमार सिंह, सर्वेन्द्र झा, नीरज पराशर, मंगल महतो, विभाकर राय, गिरीश, ज्ञान रंजन, अनुप ठाकुर, विवेक कुमार, निखिल जायसवाल, शुभम मिश्रा, रमेश नाइक, अमित कुमार, सुमन पांडेय, पुरेन्दर सिंह, निरंजन महापात्र, सौम्य रंजन दास, देवन मिस्त्री, हरेराम शर्मा, मनोज कुमार मिश्रा, धनंजय सिंह, परितोष सिंह, बिजेन्द्र शाह, सुब्रत स्वैन, उमेश कुमार सिंह, सीएस ठाकुर, विकास दास, किशोर कुणाल, संजीब पांडा, चंदन गुप्ता, मनोज कुमार, सुसांत शेखर, बालाजी भगत, ब्रजेश पटेल, चंदन घोष, राजेश कुमार, रंजन राकेश, संतोष पांडेय, बंटी पांडेय और अमित सिंह.
( कुल 59 कमेटी मेंबर आए )


