चाईबासा श्मशान घाट में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, आठ वर्षीय बच्ची के सिर से उठा मां और दोनों बहनों का साया
पिता के इलाज के लिए 30–35 लाख रुपये की जरूरत का अनुमान
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
चाईबासा के निकट हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाली अमृत कौर और उनकी दो बेटियों अमनदीप कौर तथा गुरु सिमरन कौर का गुरुवार को चाईबासा श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। तीनों की चिताएं एक साथ जलती देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। दूसरी ओर, परिवार के मुखिया प्रदीप सिंह वीर जमशेदपुर के टीएमएच अस्पताल में गंभीर हालत में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। परिवार की छह वर्षीय बच्ची हरमन कौर इस हादसे में बच गई है।

अंतिम संस्कार में सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, जमशेदपुर और चाईबासा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों सहित स्थानीय संगत के लोगों ने भाग लिया। मृतकों के परिजन तेजपाल सिंह और जगदीप सिंह भी इस दुखद घड़ी में मौजूद रहे। चाईबासा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, स्त्री सत्संग सभा और नौजवान सभा के सदस्यों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अंतिम संस्कार में सहयोग किया।

अंतिम संस्कार में राधा स्वामी संस्था के प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर सवाल
इस हृदयविदारक घटना के बाद अंतिम संस्कार में राधा स्वामी सत्संग संस्था के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठे हैं। जानकारी के अनुसार, परिवार राधा स्वामी सत्संग में शामिल होने के लिए आदित्यपुर आ रहा था, तभी रास्ते में यह भीषण हादसा हो गया।
सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव गुरचरण सिंह बिल्ला ने कहा कि जिस सत्संग में शामिल होने के लिए परिवार यात्रा कर रहा था, उससे जुड़ी संस्था की ओर से अंतिम संस्कार के समय किसी प्रतिनिधि की मौजूदगी नहीं दिखी। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना, उसके दुख में सहभागी बनना और यथासंभव सहायता करना मानवीय संवेदना का हिस्सा है।
सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह और चेयरमैन सरदार शैलेंद्र सिंह ने कहा कि कमेटी ने सिख होने के नाते अपना फर्ज निभाया है। चाईबासा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और स्त्री सत्संग सभा ने भी आगे बढ़कर परिवार को सहयोग दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समय किसी धर्म या संस्था के खिलाफ विवाद खड़ा करने का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार की मदद करने का है। हालांकि, उन्होंने यह अपेक्षा भी जताई कि जिस संस्था के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए परिवार निकला था, उसके प्रतिनिधियों को भी इस दुख की घड़ी में संवेदना व्यक्त करने के लिए आगे आना चाहिए था।
कमेटी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रधान भगवान सिंह के कहने पर चेयरमैन सरदार शैलेंद्र सिंह ने राधा स्वामी संस्था के विजय गगवानी से संपर्क करने के लिए कई बार फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। इस संबंध में संस्था का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है।
अंतिम संस्कार में शामिल हुए गुरुद्वारा कमेटियों के प्रतिनिधि
अंतिम संस्कार में सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह, चेयरमैन सरदार शैलेंद्र सिंह, वरीय उपाध्यक्ष सुखविंदर सिंह राजू, अवतार सिंह सोखी, महासचिव गुरचरण सिंह बिल्ला, ज्ञानी हरविंदर सिंह, जमशेदपुर के सलाहकार अजीत गंभीर, सुखदेव सिंह बिट्टू, सुरेंद्र सिंह शिंदे, ज्ञानी कुलदीप सिंह, जगजीत सिंह भाटिया तथा चाईबासा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान गुरमुख सिंह खोखर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बताया कि प्रदीप सिंह वीर के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए टीएमएच अस्पताल से लगातार संपर्क रखा जा रहा है।
पिता के इलाज के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक खर्च का अनुमान
परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां और दो बेटियों की मौत के बाद अब परिवार की उम्मीदें गंभीर रूप से घायल प्रदीप सिंह वीर के इलाज पर टिकी हैं। सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह के अनुसार, इलाज पर लगभग 30 से 35 लाख रुपये तक खर्च आने का अनुमान है। हालांकि, यह अनुमान है और वास्तविक खर्च इलाज की स्थिति पर निर्भर करेगा।
परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना बेहद कठिन बताया जा रहा है। एक ओर छह वर्षीय हरमन कौर ने अपनी मां और दोनों बहनों को खो दिया है, वहीं दूसरी ओर उसके पिता की हालत गंभीर बनी हुई है। परिवार के बुजुर्गों के लिए भी इस संकट का सामना करना आसान नहीं है।
राधा स्वामी संस्था और संगत से मदद की अपील
सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव गुरचरण सिंह बिल्ला ने राधा स्वामी संस्था, उससे जुड़े श्रद्धालुओं और समाज के समर्थ लोगों से पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने आग्रह किया कि प्रदीप सिंह वीर के इलाज के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाए और जरूरत के अनुसार उपचार के खर्च में सहायता की जिम्मेदारी उठाने पर विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि इस समय परिवार को केवल सांत्वना नहीं, बल्कि ठोस मदद की जरूरत है। एक मासूम बच्ची का भविष्य उसके पिता के स्वास्थ्य से जुड़ा है। ऐसे में समाज के लोग सामूहिक रूप से आगे आएं, तो परिवार को बड़ी राहत मिल सकती है।
कमेटी का संदेश है कि संकट के समय पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना ही सच्ची सेवा है। अब सभी की निगाहें प्रदीप सिंह वीर के स्वास्थ्य में सुधार और मासूम हरमन कौर के सुरक्षित भविष्य पर टिकी हैं।


































