फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर में ग्रीनफील्ड संस्कारशाला की कदमा और सोनारी शाखाओं के प्रीस्कूल बच्चों ने अपने वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम “कालचक्र – चार युगों की अमर कथाएँ” का भव्य मंचन एक्सएलआरआई ऑडिटोरियम में किया। यह कार्यक्रम शाम 5:30 बजे से शुरू हुआ और बच्चों की मासूमियत, रचनात्मकता और जीवंत प्रस्तुतियों ने पूरी सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथियों के रूप में नरभेरम हंसराज इंग्लिश स्कूल की उप-प्राचार्या हरविंदर कौर और डी.बी.एम.एस. इंग्लिश स्कूल एवं जे.एच. तारापोर की पूर्व वरिष्ठ फैकल्टी रत्नाबली सेनगुप्ता उपस्थित रहीं। उन्होंने बच्चों की प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए कार्यक्रम की सफलता की सराहना की।

प्राचार्या एकता अग्रवाल ने कहा कि यह वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल बच्चों की प्रतिभा और रचनात्मकता को दर्शाता है, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्य, सामाजिक और नैतिक शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का भी माध्यम है। कार्यक्रम ने दर्शकों को बच्चों की मासूमियत और उत्साह के साथ-साथ चार युगों की अमर कथाओं की सीख देने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना नृत्य से हुई, जिसमें ज्ञान, पवित्रता और शिक्षा के लिए आशीर्वाद मांगा गया। नन्हे कलाकारों ने मंच पर अपनी सहजता और ऊर्जा से दर्शकों का मन मोह लिया। इसके बाद सतयुग का भाग प्रस्तुत किया गया, जिसमें त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश के माध्यम से सृष्टि की रचना और प्रह्लाद-नरसिंह की कथा को बच्चों ने बहुत ही सुंदर ढंग से मंचित किया। इस खंड का समापन प्लेग्रुप के बच्चों द्वारा प्रस्तुत होलिका उत्सव नृत्य से हुआ, जिसने रंग और उल्लास का माहौल तैयार किया।

त्रेता युग में बच्चों ने भगवान राम के आदर्शों और धर्म की मर्यादा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। दिवाली-थीम वाले नृत्य में फुलझड़ियों और दीयों का समावेश दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों की प्रस्तुति में धर्म, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का संदेश सहज और प्रभावशाली ढंग से देखने को मिला।

द्वापर युग में भगवान कृष्ण के जीवन की बाल लीलाओं को मंच पर उतारा गया। कृष्ण के जन्म से लेकर माधुबन में गोपी-लीलाओं, गोवर्धन पर्वत उठाने के अलौकिक दृश्य और कृष्ण-सुदामा की मित्रता तक, हर दृश्य को बच्चों ने बड़े हृदयस्पर्शी और मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत किया। इस खंड का मुख्य संदेश मित्रता और सच्चे संबंधों की अहमियत पर केंद्रित था।

कलियुग खंड में बच्चों ने यह संदेश दिया कि कठिनाइयों में भी खुशी और सकारात्मकता खोजी जा सकती है। उन्होंने “इतनी सी हँसी, इतनी सी खुशी” और “हम बच्चे नए ज़माने के” प्रस्तुतियाँ देकर नए दौर और नई सोच की ओर संकेत किया। बच्चों की मासूमियत, ऊर्जा और प्रस्तुति की सहजता ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया और उन्होंने बच्चों की भरपूर सराहना की।

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