350 करोड़ खर्च कर बढ़ायी जा रही यात्री सुविधाएं, अधिकारियों ने आधी कर दी सलाहकार समिति

सामाजिक कार्यकर्ता, औद्योगिक संगठन, मीडिया, उपभोक्ता संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं

“अपनी डफली अपना राग”, स्टेशन पर लगी सूची में नाम लिखने में भी अशुद्धियों की भरमार

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

चक्रधरपुर रेलमंडल के ए-1 ग्रेड स्टेशन टाटानगर में यात्रियों की सुविधा पर इस साल 350 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जायेगी. सरकार यह रकम यात्री सुविधाओं के लिए और यात्रियों के लिए खर्च करेगी. इसका शिलान्यास भी हो चुका है लेकिन बीते दिनों स्टेशन सलाहाकार समिति की बैठक में यह बात सामने आयी कि रेल प्रशासन ने टाटानगर स्टेशन सलाहकार समिति के सदस्यों की सूची आधी कर दी है. यह समिति स्थानीय स्तर पर यात्रियों की समस्याओं से रेल प्रशासन काे रू-ब-रू कराती है.  जो रेलवे बोर्ड की गाइइ लाइन पर संचालित होती है और ग्रेड ए-1 के स्टेशन पर सदस्यों की संख्या 10 रखने का प्रावधान है.

फिलहाल स्टेशन सलाहकार समिति में कुल पांच सदस्यों की सूची जारी की गयी है. इसमें एक सदस्य सिविल सर्जन पदेन है. स्टेशन पर लगायी गयी सदस्यों की सूची में नाम लिखने में भी अशुद्धियों की भरमान है. पदनाम तो है ही नहीं. यह गंभीर विषय है कि स्टेशन निदेशक से लेकर सीसीआई और डिप्टी एसएस कॉमर्शियल तक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

समिति के अन्य चार सदस्यों में 40 फीसदी का प्रतिनिधित्व टेल्को क्षेत्र से ही दिया गया है. नयी समिति में सामाजिक कार्यकर्ता, औद्योगिक संगठन, मीडिया, उपभोक्ता संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है. यहां गौरतलब है कि टाटानगर स्टेशन के डिप्टी एसएस कॉमर्शियल सुनील कुमार टेल्को क्षेत्र से आते है और उनका पूर्व में टाटा मोटर्स से जुड़ाव रहा है. मालूम हो कि स्टेशन सलाहकार समिति के गठन में रेलवे क्षेत्रीय प्रबंधक की भूमिका अहम होती है वह समिति के चेयरमैन भी होते हैं. वहीं और स्टेशन डायरेक्टर के अलावा वाणिज्य निरीक्षक, डिप्टी एसएस कॉमर्शियल की सलाह से सदस्यों का चयन कर सूची डिवीजन को भेजी जाती है.

रेलवे क्षेत्रीय प्रबंधक और स्टेशन डायरेक्टर की पहल पर गठित इस समिति में सामाजिक कार्यकर्ता, औद्योगिक संगठन, मीडिया, उपभोक्ता संगठन को प्रतिनिधित्व नहीं दिये जाने पर सवाल उठाये गये है. ऑल इंडिया चेंबर ऑफ कंज्युमर्स के रवि शंकर ने बताया कि रेल मंत्रालय की गाइडलाइन पर संचालित होने वाली समिति के गठन में गंभीरता नहीं दिखाने का मामला प्रतीत होता है. इसे जीएम-डीआरएम से लेकर रेलवे बोर्ड स्तर पर उठाया जायेगा. उन्होंने सवाल किया कि ऐसे समय में जब यात्रियों की सुविधा के लिए करोड़ों की योजना टाटानगर में जमीन पर उतरने वाली है तब समिति की संख्या किस आदेश से समिति कर दी गयी? इसके गठन में क्या प्रक्रिया अपनायी गयी? एक ही क्षेत्र से अधिक लोगों को किन परिस्थितियों में प्रतिनिधित्व दिया गया? विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधित्व को इस बार क्यों शामिल नहीं किया गया?

स्टेशन पर तीन-तीन डिप्टी एसएस कॉमर्शियल, तीन शिफ्ट में उपस्थिति नहीं ? 

टाटानगर में स्टेशन डायरेक्टर के अलावा डिप्टी एसएस कॉमर्शियल के रूप में तीन लोग हैं. स्टेशन डायरेक्टर सुनील कुमार है जबकि डिप्टी एसएस कॉमर्शियल में सुनील कुमार सिंह, पिंकी महतो और चंदन सिंह की पदस्थापना है. इसमें सुनील कुमार सिंह और पिंकी महतो लंबे समय से यहां पदस्थापित हैं. जबकि चंदन की पोस्टिंग हाल में ही हुई है. वरीय कामर्शियल इंस्पेक्टर (CCI/TATA) के रूप में शंकर झा और संतोष कुमार पदस्थापित है. दिलचस्प बात यह है कि सभी लोग सुबह 10 से 5 बजे तक ही स्टेशन पर उपलब्ध होते हैं. डिप्टी एसएस कॉमर्शियल की तैनाती मुख्यतया यात्री शिकायतों को दूर करने के लिए की गयी है जो शाम छह बजे के बाद से सुबह के 9 बजे तक स्टेशन पर उपलब्ध ही नहीं होते.

अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब टाटानगर में डिप्टी एसएस के तीन-तीन पद है तो इनकी सेवा राउंड द क्लॉक 24*7 क्यों नहीं ली जा रही है? तीनों का एक ही समय में स्टेशन पर मौजूदगी का क्या उपयोग ? जबकि दिन के समय तो स्टेशन डायरेक्टर और सीसीआई भी स्टेशन पर उपलब्ध होते हैं. तब टाटानगर में डिप्टी एसएस के तीन-तीन कर्मचारियों की तैनाती क्यों? इनके काम का ऑडिट DRM/CKP क्यूं नहीं कराते. सवाल उठता है कि जब शाम छह बजे से सुबह 9 तक कोई डिप्टी एसएस कॉमर्शियल स्टेशन पर मौजूद ही नहीं होगा तो यात्री शिकायतों व सुविधाओं से उनका क्या नाता? यह रेलवे के श्रम बल का दुरुपयोग नहीं तो और क्या है?

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