शिकायत पर भी नहीं की जाती है कोई कार्रवाई, वरीय अधिकारियों को अंधेरे में रख बनाये जा रहे नियम
स्टेशन पार्किंग आउट गेट और रिजर्वेशन काउंटर के पास अवैध रूप से सजाई गई दुकानें
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
दक्षिण पूर्व रेलवे के टाटानगर स्टेशन में एक नंबर प्लेटफार्म पर आवंटित एक फ़ूड स्टॉल को नियमों के विरुद्ध संचालित होने का मामला सामने आया है. जहां स्टॉल में खुलेआम वैसे खाद और पेय पदार्थ की बिक्री की जा रही है जो टेंडर नियम में है ही नहीं. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इससे यात्रियों की जान को भी जोखिम में डाला जा रहा है.
जानकारी के अनुसार मेसर्स रेलवेव वेंचर नामक स्टॉल में वैसी खाने की सामग्री बेची जा रही है जो आईआरसीटीसी के साथ हुए करार में नहीं है. फर्स्ट क्रॉक बिस्कुट जो एक मॉल से लाकर बेचे जा रहे है, जिसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाये जा रहे हैं. इसी प्रकार अन पैक पेटीस, बर्गर, सेंडवीच, बन, क्रीमरोल और चाय आदि सामान भी खुलेआम बेचे जा रहे हैं.
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इस स्टॉल में घटिया मानक वाली चाय को लेकर पहले भी यात्री शिकायत कर चुके हैं, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से उस शिकायत को दबा दिया गया. वह भी यात्रियों की सेहत की परवाह किये बगैर.
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विश्वनीय सूत्र बताते हैं कि उक्त स्टॉल एक चर्चित टीटीई के बेटे ऋषभ पांडे द्वारा संचालित किया जाता है. अपने पिता की पहुंच पर वाणिज्य विभाग के अधिकारी उस पर मेहरबान हैं, जो यात्रियों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. स्थानीय सीसीआई, कैटरिंग इंस्पेक्टर सबका स्टॉल संचालक को वर्द्धस्व प्राप्त है. कहने को तो समय समय पर यहां सीकेपी डिवीजन के बड़े अधिकारी आते जाते रहते हैं, लेकिन उनकी भी आई वाश कर दी जाती है और खुद स्थानीय अधिकारी अपनी जेबें गरम करने में व्यस्त रहते हैं.
कई बार रेलवे बोर्ड की निगरानी समितियाँ भी यहां जांच के नाम पर आती है, लेकिन स्थानीय अधिकारी अपनी चाल से उन्हें भी अंधकार में डाल देते हैं. इस स्टॉल में पैकड आइटम बेचने का नियम है, जिसका पालन नहीं किया जाता. बेबी फ़ूड तो इस स्टॉल में उपलब्ध ही नहीं है, हां मेडिसिन जरूर उपलब्ध रहती है.
वैसे भी स्थानीय वाणिज्य अधिकारियों पर कई बार उंगलियां उठ चुकी हैं कि वह अपने चहेते लोगों को ही सेटिंग गेटिंग से टेंडर दिलवाते हैं. खैर इससे इतर अगर बात करें तो टाटानगर स्टेशन पार्किंग के आउट गेट में नियम के विरुद्ध एक दुकान का लगना, रिजर्वेशन काउंटर के पास भी दुकानों का सजना रेल क्षेत्र में अनाधिकृत कार्यों की पोल खोलते हैं, जिसमें वाणिज्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत उजागर होती है.

