- राजनीतिक चेहरों के असली इरादे सामने आए, विपक्ष ने किया कड़ा विरोध
फतेह लाइव, रिपोर्टर


मोदी सरकार द्वारा पारित किए गए वक्फ (संशोधन) बिल को लेकर देशभर में विवाद छिड़ गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तथाकथित सेक्युलर चेहरों की असलियत अब जनता के सामने आ गई है. पप्पू ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को धोखा देने वाले नेता आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में असंतोष बढ़ रहा है और मुस्लिम नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, जिससे चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को भी नुकसान होगा.
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वक्फ संशोधन बिल : धार्मिक अधिकारों पर उठे सवाल, राजनीतिक प्रभाव भी गहरा
पप्पू ने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है जिसके जरिए मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है ताकि उन्हें पूंजीपतियों को सौंपा जा सके. उन्होंने कहा कि यह विधेयक गैर संवैधानिक है और इसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. पूरे देश में इसके खिलाफ आंदोलन का माहौल बनता जा रहा है, जो आने वाले समय में मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
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संवैधानिक दृष्टिकोण से वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस तेज़
कानूनी दृष्टिकोण से वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के पक्ष और विपक्ष में तर्क भी सामने आए हैं. सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का माध्यम है. वहीं, इसके विरोध में कहा जा रहा है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14, 15 और 300A का उल्लंघन करता है. विशेष रूप से धारा 3E को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है, जो अनुसूचित जनजातियों के धर्म परिवर्तन के अधिकार को प्रभावित करती है.