आचार्य राजेश पाठक की कलम से.
अमावस्या तिथि के समापन के बाद ही आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान प्रतिपदा से नवमी तक मां को जो भोग लगाया जाता है, उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। आप सब अवश्य माता रानी को क्रमवार ढंग से भोग लगाएं, माता रानी का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होगा।

गुप्त नवरात्रि आषाढ़ मास की 15 जुलाई 2026 बुधवार से शुरू हो गई है, जो आषाढ शुक्ल पक्ष की नवमी तक रहेंगी। नवरात्रि के इन 9 दिनों में देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में देवी को विभिन्न प्रकार के भोग भी लगाए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस उपाय से साधक (उपाय करने वाला) की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
ये उपाय होंगे परोपकारी, अवश्य करें
प्रतिपदा तिथि को माता को घी का भोग लगाएं। इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती हैं एवं शरीर निरोगी होता है।
द्वितीया तिथि को माता को शक्कर का भोग लगाएं, इससे उम्र लंबी होती है।
तृतीया तिथि को माता को दूध का भोग लगाएं। इससे सभी प्रकार के दुःखों से मुक्ति मिलती है।
चतुर्थी तिथि को माता को मालपुआ का भोग लगाएं। इससे समस्याओं का अंत होता है।
पंचमी तिथि को माता को केले का भोग लगाएं। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
षष्ठी तिथि को माता को शहद का भोग लगाएं। इससे धन लाभ होने के योग बनते हैं ।
सप्तमी तिथि को माता को गुड़ का भोग लगाएं। इससे हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
अष्टमी तिथि को माता को नारियल का भोग लगाएं। इससे घर में सुख-समृद्वि आती है।
नवमी तिथि को माता को विभिन्न प्रकार के अनाज का भोग लगाएं। इससे वैभव व यश मिलता है।










