फतेह लाइव, रिपोर्टर.
कभी-कभी जीवन के सबसे सुंदर पल न तो केक में होते हैं, न मोमबत्तियों की रोशनी में. वे पल तब जन्म लेते हैं, जब किसी बच्चे की सूनी आँखों में उम्मीद उतर आती है. समाजसेवी रवि जायसवाल ने अपने जन्मदिन पर ऐसा ही एक पल रचा.
सिदगोड़ा बागुनाथु बस्ती में रहने वाले पढ़ने की चाह रखने वाले नन्हे बच्चों के हाथों में जब उन्होंने स्कूल बैग थमाए, तो वह सिर्फ बैग नहीं थे. वे सपनों का बोझ उठाने की पहली सीढ़ी थे.
जैसे ही रवि जायसवाल को यह पता चला कि इन बच्चों के पास पढ़ाई के लिए जरूरी साधन तक नहीं हैं. उनका मन व्यथित हो उठा. बिना किसी शोर-शराबे, बिना किसी प्रचार के, उन्होंने तुरंत उनकी जरूरतें पूरी कीं और शिक्षा की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाया.
जब बच्चों ने अपने कंधों पर नए बैग टांगे, तो उनके चेहरों पर जो मुस्कान उभरी. वह शब्दों में बयान नहीं की जा सकती. वही मासूम मुस्कान, वही भीगी आँखों की चमक, वही सच्ची खुशी रवि जायसवाल के लिए जन्मदिन की सबसे बड़ी सौगात बन गई.
उस पल कई आँखें नम थीं, क्योंकि वहां मौजूद हर दिल समझ रहा था कि यह सिर्फ मदद नहीं, किसी के भविष्य की नींव रखी जा रही है. कभी-कभी किसी बच्चे की मुस्कान ही बता देती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है. बता दें कि इससे पूर्व भी रवि जयसवाल अपनी समाजसेवा को लेकर झारखंड में अहम ऐसे कार्य कर चुके हैं, जो लोगों के बीच मिसाल हैं.
