आंगनबाड़ी सेविकाओं के मानदेय पर सरकार का गोलमोल जवाब, विधायक पूर्णिमा साहू ने जताई आपत्ति

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने झारखंड विधानसभा में आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं सहायिकाओं के मानदेय, कार्यभार और सुविधाओं को लेकर सरकार से महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। सरकार की ओर से दिए गए जवाब पर उन्होंने गहरी असंतुष्टि जताई है। विधायक पूर्णिमा साहू द्वारा पूछे गए सवाल में सरकार ने स्वीकार किया कि राज्य के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में 38,027 आंगनबाड़ी सेविकाएँ एवं 37,384 आंगनबाड़ी सहायिकाएँ, अर्थात कुल 75,411 कर्मी मानदेय पर कार्यरत हैं। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि इनसे बीएलओ, जनगणना तथा मईया सम्मान योजना के सत्यापन जैसे अतिरिक्त कार्य भी कराए जाते हैं।

मानदेय के संबंध में सरकार ने बताया कि सेविकाओं को 11,500 रुपये प्रतिमाह तथा सहायिकाओं को 5,750 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष जुलाई से क्रमशः 500 और 250 रुपये की वार्षिक वृद्धि का प्रावधान है। सरकार के अनुसार वर्तमान मानदेय में भारत सरकार का अंशदान 23.4 प्रतिशत है, जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करती है।

विधायक पूर्णिमा साहू ने इस आंकड़े पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविकता में केंद्र सरकार का अंशदान 60 प्रतिशत तथा राज्य का 40 प्रतिशत है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार पर ठीकरा फोड़ रही है, जबकि केंद्र द्वारा समय पर राशि उपलब्ध कराई गई है। इसके बावजूद सेविकाओं को दो से तीन महीने की देरी से मानदेय मिल रहा है, जिससे उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।

पोषाहार निर्माण हेतु जलावन खर्च को लेकर सरकार ने 13 पैसे प्रति बच्चा प्रति मील की दर संबंधी बात को अस्वीकार किया। जवाब में बताया गया कि 35,522 आंगनबाड़ी केंद्रों में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध है और रीफिलिंग राशि दी जाती है, जबकि शेष 3,435 केंद्रों में कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। वर्तमान में जिन केंद्रों में गैस सुविधा नहीं है, उन्हें प्रति बच्चा प्रति मील अधिकतम 0.13 रुपये जलावन मद में दिए जा रहे हैं।

विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि गैस एजेंसियों को समय पर भुगतान नहीं होने से सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे लाभुक महिलाओं और बच्चों तक समय पर भोजन नहीं पहुंच पाता। डिजिटल व्यवस्था पर भी उन्होंने सवाल उठाए। पूर्णिमा साहू का कहना है कि सेविकाओं को 4G मोबाइल दिए गए हैं, जिससे फेस स्कैनिंग जैसी प्रक्रिया में बाधा आती है। उन्होंने 5G मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि तकनीकी साधनों के अभाव में योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।

मानदेय एवं जलावन दर बढ़ाने के संबंध में सरकार ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि राज्य सरकार जमीनी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और अपने दायित्वों से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के सम्मान एवं अधिकारों के लिए वे इस मुद्दे को विधानसभा में फिरसे मजबूती से उठाएंगी।

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