सुंदरनगर मुख्य मार्ग को इसी रास्ते से जोड़ेगी सड़क, गुलाम भारत के समय 1928 में रेलवे ने खुद खुलवाई थी कसेरा की ये दुकान, संचालकों की आंखें हुई नम 

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

टाटानगर स्टेशन के विस्तारीकरण की योजना पर काम प्रगति पर है. आने वाले समय में टाटानगर स्टेशन और आसपास का क्षेत्र नए लुक में दिखने वाला है. खैर, स्टेशन क्षेत्र में जो बदलाव होने है, जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑनलाइन किया था. उसकी जद में कीताडीह-बागबेड़ा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क और गोलपहाड़ी मुख्य चौक से रेलवे की जमीन पर गुलाम भारत के समय से बसे लोगों के प्रतिष्ठानों को जरूरत के हिसाब से बुलडोजर चलाकर गुरुवार को जमींदोज कर दिया गया. इससे प्रतिष्ठान संचालकों की आंखें नम देखी गई. हालांकि, इन संचालकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन न्यायलय के आदेश को देखते हुए रेलवे के इस अभियान का किसी तरह का विरोध नहीं हुआ. हालांकि ऐसा होने की स्थिति से निपटने के लिए रेल और जिला प्रशासन ने कमर कसी हुई थी.

आपको बता दें कि यह दुकानें 50 से 60 साल पहले से चल रही थी. इससे स्टेशन क्षेत्र में रौनक बनी रहती थी. सबसे पहले 1928 में रेलवे ने ट्रैफिक कॉलोनी में विष्णु कसेरा और ओम प्रकाश कसेरा के दादा को राशन दुकान खोलने की अनुमति दी थी. उस वक्त टाटानगर को कालीमाटी के नाम से जाना जाता था. विष्णु कसेरा ने बताया कि उनके दादा को रेलवे के अधिकारी ने पैसे देकर यात्रियों और रेल कर्मियों के लिए यह सुविधा चालू करवाई थी. फिर 1960 में वह मुख्य सड़क पर लीज में जगह लेकर आये थे. पुरानी जगह में उन्होंने बहुत बड़ा गोदाम कर रखा था और घर भी बना लिया था. अभियान के दौरान उस पक्के भवन को तोड़ने में कर्मियों के पसीने छूट गए थे. यहीं, स्टेशन का एक होलसेल दुकानदार भी रहता था. इस अभियान में यह बात भी देखने को मिली कि संचालकों ने अपने प्रतिष्ठान की इमारत को काफी बड़ा बना रखा था. रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के रहम के बिना यह संभव नहीं है?  कई लीज मालिक अपने प्रतिष्ठान के हिस्से को भाड़े में चला रहे थे. कई लीज वाले अपना प्रतिष्ठान लाखों में बेच चुके थे और कई बेचने की तैयारी कर रहे थे. इस अभियान के बाद वैसे लोग राहत महसूस करते देखे गए जिन्हें जगह खरीदने का मन बना रखा था.

अभियान से मची हलचल, तीन बुलडोजरों की आवाज ने संचालकों की धड़कनें बढ़ाई

लौहनगरी जमशेदपुर में गुरुवार सुबह उस वक्त हलचल मच गई. जब टाटानगर रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे प्रशासन ने लीज की जमीन को खाली कराने के लिए अभियान एक बार फिर तेज कर दिया. स्टेशन चौक से कीताडीह रोड तक बुलडोज़र चलते रहे और कई दुकानों को जमींदोज कर दिया गया. गुरुवार सुबह 11 बजे से ही टाटानगर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में रेलवे प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची. स्टेशन चौक से कीताडीह रोड तक स्थित अस्थायी और स्थायी दुकानों को हटाने के लिए तीन बुलडोज़र लगाए गए, जिनकी आवाज से प्रतिष्ठान संचालकों की धड़कनें तेज हो गई. प्रशासन की ओर से पहले ही नोटिस दिए जाने की बात कही जा रही थी, जिसके चलते संभावित कार्रवाई को भांपते हुए अधिकांश दुकानदारों ने अपनी दुकानें पहले ही खाली कर दी थीं.

इस कारण रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग को दीवारें और छतें तोड़ने में ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा. बुलडोज़र की आवाज और मलबा गिरने के बीच पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन क्षेत्र के समग्र विकास और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए जमीन खाली कराना अनिवार्य है. बताया गया कि आने वाले समय में स्टेशन परिसर का विस्तार, पार्किंग व्यवस्था, सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण की योजनाएं प्रस्तावित हैं. इस अभियान के दौरान स्टेशन के सामने से 13 और गोलपहाड़ी मुख्य सड़क से वर्षों से स्थापित 8 दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया.

रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत की जा रही है और यह अभियान चरणबद्ध तरीके से आगे भी जारी रहेगा. प्रशासन ने साफ किया है कि विकास कार्यों में बाधा बनने वाले किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा. किसी प्रकार के विरोध या हंगामे की आशंका को देखते हुए जुगसलाई नगर परिषद के सिटी मैनेजर को बतौर दंडाधिकारी की मौजूदगी में तीन दर्जन से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया था. पूरे अभियान के दौरान स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. शांतिपूर्ण अभियान चलता रहा.

प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से यहां कारोबार कर रहे थे और अचानक की गई कार्रवाई से उनका रोजगार प्रभावित हुआ है. बताया जाता है कि कुछ दुकानदारों ने इस कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय का भी रुख किया था. बावजूद इसके, रेलवे ने निर्धारित कार्यक्रम के तहत अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी रखी. टाटानगर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में चल रहे इस अतिक्रमण हटाओ अभियान ने एक बार फिर विकास बनाम रोज़गार की बहस को जन्म दे दिया है. जहां रेलवे इसे यात्रियों की सुविधा और स्टेशन के आधुनिकीकरण के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं प्रभावित दुकानदार अपने भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं. खैर स्टेशन के पास अभियान से अधिकतर होटल बंद होने से यात्रियों के सामने इतने बढ़े शहर में भोजन के लाले पड़ गए हैं. इस अभियान के बीच फुटपाथी दुकानदारों की बल्ले बल्ले हो गई है. वहीं इससे क्षेत्र में अपराध बढ़ने का भी अनुमान लगाया जा रहा है. 

नए क्रू लॉबी के सामने कुछ दुकानों को छोड़ने पर रोष

इस अभियान के दौरान कीताडीह मार्ग पर ही महालक्ष्मी मेडिकल समेत अन्य कुछ दुकानों को खाली नहीं कराये जाने की चर्चा भी खूब रही. स्थानीय नेताओं ने इसे रेलवे की दो धारी तलवार बताया है और कई संदिग्ध आरोप लगाए हैं. हालांकि कहा जाता है कि उनका लीज नवीनीकरण हुआ है. मार्च में वहां भी बुलडोजर चलना तय है. इधर, इस अभियान की शुरआत तिवारी भोजनालय से हुई. उसके बाद मां तारा होटल, सिंह दोसा कार्नर, राजेंद्र का होटल, यादव होटल सभी को जमींदोज कर दिया गया. गोलपहाड़ी में भी भाड़े पर दी गई शराब दुकान, हाल में खुली चश्मा दुकान समेत अन्य दुकानों को जमींदोज कर दिया गया.

जनवरी में भी चलाया गया था अभियान

रेलवे का यह अभियान जनवरी में भी चलाया गया था. उस वक्त चौधरी होटल समेत कई दुकानों की जगह को खाली कराया गया था. उस वक्त अन्य दुकानदार हाईकोर्ट चले गए थे, जिसे लेकर अभियान को टाल दिया गया था. गुरुवार के अभियान को लेकर एक दिन पूर्व बुधवार को रेलवे के लैंड विभाग की टीम ने माइकिंग कर दुकानदारों को हटने की सूचना दी थी. बावजूद इसके कई दुकानदारों ने दुकानें नहीं हटाईं, जिसके बाद गुरुवार को बुलडोजर कार्रवाई की गई.

रेलवे नहीं कर पाया वैकल्पिक व्यवस्था

22 जनवरी को हाईकोर्ट ने इस मामले में आदेश देते हुए स्टेशन चौक से कीताडीह जाने वाली सड़क किनारे वर्षों से बसे दुकानदारों को एक माह की मोहलत दी थी. साथ ही रेलवे को 42 दिनों के भीतर उन्हें रेलवे क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान पर बसाने का निर्देश दिया गया था और समयसीमा के बाद रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था. मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च को निर्धारित है. हालांकि अब तक रेलवे यह तय नहीं कर पाया है कि दुकानदारों को कहां पुनर्वासित किया जाएगा.
कार्रवाई के दौरान कई दुकानदारों ने नाराजगी जताई और कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकान तोड़ना उनके रोज़गार पर सीधा हमला है. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है और आगे भी अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहेगा.

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