18 प्रमुख वैश्विक और घरेलू डेटा सेंटर कंपनियों के साथ 29 परियोजना कार्यधाराओं पर सक्रिय भागीदारी
मुंबई में ₹15,000 करोड़ की ग्रिड उन्नयन एवं विस्तार योजना से मजबूत होगा बिजली नेटवर्क
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच टाटा पावर डेटा सेंटर क्षेत्र में अपनी भूमिका का विस्तार कर रही है। कंपनी के पास नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली पारेषण और वितरण से जुड़े 2.8 गीगावाट (GW) से अधिक के संभावित कारोबारी अवसरों का पोर्टफोलियो है। टाटा पावर के अनुसार, 18 प्रमुख वैश्विक और घरेलू डेटा सेंटर ऑपरेटरों के साथ 29 सक्रिय कार्यधाराओं पर काम चल रहा है।

कंपनी का लक्ष्य केवल बिजली आपूर्ति तक सीमित रहने के बजाय डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए एकीकृत ऊर्जा और बुनियादी ढांचा समाधान उपलब्ध कराना है। इसमें बिजली उपलब्धता वाली भूमि, ग्रिड कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, कूलिंग सिस्टम और यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
वितरण, पारेषण और ग्रीन एनर्जी में बड़े अवसर
टाटा पावर के मुताबिक, उसके संभावित कारोबारी अवसरों में वितरण नेटवर्क के तहत लगभग 430 मेगावाट की आगामी बिजली मांग, पारेषण नेटवर्क से जुड़ी 1,236 मेगावाट की संभावनाएं और 1,150 मेगावाट की हरित ऊर्जा क्षमता से जुड़े सक्रिय प्रस्ताव शामिल हैं।
कंपनी का कहना है कि बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण तक फैली उसकी एकीकृत मौजूदगी उसे तेजी से विकसित हो रहे AI और डेटा सेंटर बाजार में व्यापक समाधान उपलब्ध कराने में सक्षम बनाती है। डेटा सेंटर के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति महत्वपूर्ण है, क्योंकि AI आधारित सेवाओं और बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म को संचालित करने के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
मुंबई में ₹15,000 करोड़ की ग्रिड विस्तार योजना
बड़े डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए टाटा पावर मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में अपने बिजली पारेषण नेटवर्क को मजबूत कर रही है। इसके तहत 110 केवी और 220 केवी नेटवर्क का उन्नयन, ट्रांसफॉर्मेशन और पारेषण क्षमता में वृद्धि तथा वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की योजना शामिल है।
कंपनी नए रिसीविंग स्टेशन विकसित करने के साथ 400 केवी पारेषण रिंग नेटवर्क को भी आगे बढ़ा रही है। इसका उद्देश्य बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों को भरोसेमंद और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए अधिक सक्षम नेटवर्क तैयार करना है।
ये कार्य टाटा पावर की ₹15,000 करोड़ की मुंबई ग्रिड उन्नयन एवं विस्तार योजना का हिस्सा हैं। कंपनी के अनुसार, यह नेटवर्क क्षेत्र में भविष्य की बिजली मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
2031-32 तक AI डेटा सेंटर से बढ़ सकती है बिजली की मांग
भारत में AI और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ बिजली की उपलब्धता एक प्रमुख आवश्यकता बनती जा रही है। कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुमानों के आधार पर बिजली मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2031-32 तक AI आधारित डेटा सेंटरों के कारण लगभग 26.3 गीगावाट अतिरिक्त बिजली मांग बढ़ने का अनुमान जताया है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी डेटा सेंटर और बिजली की मांग में वृद्धि में भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है।
टाटा पावर का कहना है कि उत्पादन से लेकर पारेषण और वितरण तक उसकी एकीकृत क्षमता भारत की बढ़ती डिजिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक ऊर्जा बुनियादी ढांचा विकसित करने में मददगार होगी। AI, क्लाउड सेवाओं और बड़े डेटा सेंटरों का विस्तार आने वाले वर्षों में बिजली कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा कर सकता है।


































