जमशेदपुर की पहचान लघु भारत की और यहां के भाजपा अध्यक्ष के बोली में अलगाववाद

भाजपा अध्यक्ष का तर्क, बिहारी ट्रेन में लटक कर इसलिए आ रहे क्योंकि उन्हें अपने धर्म से प्यार 

पंजाबी अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जाकर क्या टायलेट नहीं साफ कर रहे ?

गुजराती अफ्रीका जाकर क्या वहां क्राइम नहीं कर रहे ?

केरल के लोग अरब में अपनी पत्नियों का सेक्स स्लेब में इस्तेमाल क्या नहीं कर रहे है ?

बंगाली क्या बकरी नहीं चरा रहे ?

चरणजीत सिंह.

लघु भारत के रूप में पहचान रखने वाले टाटा के शहर जमशेदपुर के भाजपा महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा अब बिहारी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी वाली भाषा पर उतर गए हैं. छठ पर्व पर बिहार मूल के लोगों के ट्रेन में लटक कर घर आने के मसले पर सोशल मीडिया पर बहस में सुधांशु ओझा ने फेसबुक कर जो कुछ लिखा है, वो देश के किसी कोने में बसे लोगों को गहरे तक चुभ जाएगा. अफ्रीका में लोग छठ कर रहे है. लेकिन उनका बयान सबको हिला रहा है. वैसे आपको बता दें कि जिला अध्यक्ष के आने से जमशेदपुर में पार्टी कमजोर हो रही है. उनके बयान की परीक्षा लेना ऐसे विवाद भरे चोटों को जाहिल करना है.

सुधांशु ओझा ने अपने फेसबुक पेज पर टाटानगर स्टेशन पर छठ गीत के साथ स्वागत का पोस्ट वायरल किया है तो गृह मंत्री अमित शाह का घुसपैठियों को देश से बाहर करने से संबंधित समाचार पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उससे पहले के पोस्ट में सुधांशु ओझा ने अनायास ही ऐसे प्रसंग पर अपने विवादास्पद विचार रखे है जिसका कोई औचित्य ही प्रतीत नहीं होता.

उन्होंने लिखा है कि लोग बिहारियों के ट्रेन में लटक कर आने की बात कह रहे हैं। बिहारियों के लिए ट्रेन बढ़ाने की जरूरत हो रही है. आज हवाई यात्रा का किराया तीन से चार गुना बढ़ गया है तो भी लोग आ रहे हैं. अगर हवाई जहाज में खड़ा होकर आने की व्यवस्था होती तो भी आते। सुधांशु ओझा का तर्क है कि बिहारी ऐसा करते है क्योंकि वे अपने धर्म को मानते हैं.

सुधांशु ओझा ने अपने पोस्ट में अनायास पंजाबी, गुजराती, बंगाली, केरला की बात उठाई। लिखा कि कोई विनीत श्रीवास्तव है तो उनका नाम विनीत ही होगा। वो पंजाबियों की तरह कनाडा जाकर परमिंदर से पोन्टी नहीं बन जाएगा। वो हेलोविन मनाएगा, दीपावली नहीं. ये बिहारियों के खून में नहीं है. उन्होंने लिखा कि छठ हमारी आस्था का विषय है। हमारी सामूहिकता का बोध है

छठ अमीर गरीब, जांत पाँत से ऊपर उठाने का यंत्र है। ये चीज धरती के हर कोने में संभव नहीं है. दो बीएचके के फ्लैट में रहने वाले दो कट्ठा जमीन में रहने का सुख नहीं समझ सकते. खैर, सुधांशु ओझा के पोस्ट पर कई लोगों ने कमेंट्स किए है. काध लोगों ने सुधांशु ओझा के पोस्ट पर एकाध लाइन लिखी है. भगवान सिंह समेत कई लोगों ने उनके पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

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