फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

झारखंड भाजपा को अब सिखो की ज़रूरत नहीं है. तभी तो झारखंड में कई सक्रिय सिख नेताओं के होते हुए भी किसी भी सिख को झारखंड प्रदेश की नव गठित कमेटी में पार्टी ने स्थान देना जरूरी नही समझा. आखिर कब तक सिख नेता झारखंड में भारतीय जनता पार्टी का झंडा ढोते रहेंगे और अब तो समय आ गया है. अगर सिखो को राजनीति में अपना वजूद रखना है तो कड़ा कदम उठाना ही होगा.

उक्त बातें भाजपा के युवा सिख नेता अमरदीप सिंह भाटिया ने झारखंड में भारतीय जनता पार्टी द्वारा कल जारी हुई प्रदेश कमेटी की सूची के विरोध में कहीं हैं. भाटिया ने कहा कि झारखंड में सिखों को दरकिनार करने का अभियान देखा जा रहा है कि कैसे गामा सिंह के बाद पार्टी ने किसी को पार्टी के संवैधानिक पद पर नहीं रखा. रांची और डाल्टनगंज की सीट पर आजमानी और इंदर सिंह नामधारी के बाद गैर सिख को मिलती रही. वैसे ही राज्य सभा में अहलूवालिया के बाद किसी सिख को जगह नहीं मिली, जबकि लोकसभा में नामधारी जी के बाद कोई सिक्ख नहीं भेजा गया.

भाटिया ने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग में भी सिक्खों को उपाध्यक्ष और मुस्लिम को अध्यक्ष बनाया गया जबकि भाजपा का वोट बैंक सिख है. उन्होने कहा कि 1984 की त्रासदी का लाभ भाजपा ने कांग्रेस के वोटर रहे सिक्खों को केवल अपने वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करना सिख लिया है.

 

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