सांसद, 3-4 विधायकों के साथ अन्य विभागों की जनता का हक मारकर कमीशन बटोरने का है बड़ा आरोप
मालामाल होने की कहानी से नपेंगे कई अधिकारी, जांच हुई तो कोषागार घोटाले जैसी की एक नई कहानी लिखेगा झारखंड का इतिहास
चरणजीत सिंह.
झारखंड राज्य की जनता इन दिनों एक बड़े घोटाले के चक्कर में धंसी हुई है. उसकी चर्चा चारों ओर है. ट्रेजररी (कोषागार) घोटाला, दोषी जेल जाने लगे हैं. सरकार इस पर गंभीर भी है. इसलिए सरकार के वित्त विभाग (कोषागार एवं सांस्थिक वित्त निदेशालय) के मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने पिछले दिनों आदेश निकाला. यह आदेश सभी विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, सभी उपायुक्त को प्रेषित था, जो 28 अप्रैल को प्रेषित हुआ.
इसका विषय था झारखण्ड राज्य के जिलों के विभिन्न कार्यालयों में वेतन मद में कोषागार के माध्यम से अवैध निकासी का संबंध. राज्य में यह गूंज भ्रष्टाचार की परत दर परत पोल खोलने वाली है, जिसमें सीआईडी की कार्रवाई ने सरकारी मुलाजिमों के होश उड़ा कर रख दिए हैं. जनता दंग है.
बहरहाल, सरकार के मुख्य सचिव के पत्र में यह साफ साफ लिखा था कि झारखण्ड राज्य के जिलों के विभिन्न कार्यालयों में वेतन मद में कोषागार के माध्यम से अवैध निकासी की गंभीर अनियमिताएं प्रकाश में आई है, जिसमें कर्मचारी विवरण में छेड़छाड, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निकासी एवं राशि का अन्य खातों में अंतरण किया जाना पाया गया है. अतएव अनुरोध है कि एक ही कार्यालय में दीर्घकालीन पदस्थापन की समीक्षा करते हुए उक्त प्रकरण के रोकथाम एवं प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु वित्तीय कार्यों से जुड़े हुए वरीय लेखा सहायक, लेखा सहायक, लेखा अधीक्षक, लेखापाल, विपत्र लिपिक को पदस्थापन अवधि के तीन वर्ष से अधिक होने पर उनका स्थानान्तरण अनिवार्य रूप से किया जाना सुनिश्चित किया जाये.
इसके साथ-साथ ही संविदा एकमुश्त मानदेय के आधार पर कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से दूर रखा जाये. उपरोक्त पत्र के अनुपालन की स्थिति से संबंधित एक विस्तृत प्रतिवेदन 30 मई तक अनिवार्य रूप से वित्त विभाग को उपलब्ध कराया जाये.
आरोप – कनीय अभियंता ने बनाई बेनाम संपत्ति, रिश्तेदारों को भी अवैध कमाई से बांटे उपहार
बहरहाल, अब हम अपनी खबर के मुख्य शीर्षक पर वापस लौटते हैं. एक राज्यकर्मी की बात बताते हैं. नाम – विजय भूषण, कनीय अभियंता हैं. पिछले 20 वर्षों से जमशेदपुर प्रखण्ड कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम में पदस्थापित हैं. उनके पदस्थापन से संबंधित पत्र एवं उनके कार्यकाल में किये गये कार्यों की गुणवत्ता एवं सरकारी राजस्व की लूट-खसोट करने की प्रक्रिया की जांच कर उनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने की आवाज तेज होने लगी है.
विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
सूत्रों से प्राप्त आरोप है कि जमशेदपुर प्रखण्ड के कनीय अभियंता विजय भूषण पिछले 20 वर्षों से प्रखंड में पदस्थापित हैं. उनके कार्यकाल में प्रखण्ड विकास कार्यालय द्वारा विकास कार्य का निष्पादन किया गया है, जिसमें सरकारी राजस्व यानी जनता की कमाई का करोड़ों प्रतिवर्ष खर्च किया गया है. उक्त राशि विकास के कार्यों में विजय भूषण की अनुशंसा पर की गई है तथा प्रखण्ड के उक्त कार्यों में गुणवत्ता को नजर अंदाज करते हुए रिश्वत वसूली करने के उद्देश्य से घटिया कार्य किया गया है. गुणवत्ता को बनाये नहीं रखा गया है. उनके द्वारा कमायी गयी अवैध राशि परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम जमा की गई है. तथा सगे संबंधियों को भी उपहार के नाम पर अवैध राशि उड़ायी गई है.
नियम के तहत यह नहीं किया काम
Prevention of Sepecified Corrupt Practice Act 1983 की धारा 34 के तहत आय-व्यय का विवरणी दाखिल नहीं किया है. यह 20 वर्षों के कार्यकाल में पूर्वी सिंहभूम के विभिन्न प्रखण्ड जैसे पोटका, पटमदा में पदस्थापित रहे हैं तथा जमशेदपुर का नियंत्रण भी अपने पास रखकर मार्गदर्शन के साथ राशि कमाने में संलिप्त हैं.
संपत्ति जांच की मांग
वर्तमान में झारखण्ड सरकार के विभिन्न विभागों के तहत हुये कार्यों में से लगभग 12-13 विभाग का कार्य भी कनीय अभियंता के द्वारा कराया जाता है तथा अपने वरीय पदाधिकारियों को अवैध राशि से खुश रखा जाता है, इसलिये इसके सम्पूर्ण सम्पति की जांच मंत्रीमंडल निगरानी विभाग, झारखण्ड सरकार से कराने की अनुशंसा करने की आवाज उठ रही है.
बिल निष्पादन के कार्य में भी गड़बड़ी, जांच तक निलंबन रखें
विजय भूषण कनीय अभियंता द्वारा कराये गये डी०सी० बिल कार्यों का आदेश अनुसार निष्पादन नहीं हुआ है, किन्तु निष्पादन से पूर्व ही सम्पूर्ण राजस्व जो निर्धारित की गई थी, सभी का निकासी हो गई है, जो कार्य आदेश की अवहेलना है तथा झारखण्ड सरकार के साथ धोखाधड़ी है. इसकी जांच उपायुक्त के स्तर से भी किया जाना विधिमान बताया गया है. शिकायतकर्ता ने इस शिकायत का निराकरण करने हेतु आरोपित कार्य स्थल एवं विजय भूषण कनीय अभियंता द्वारा निकाली गयी राशि तथा कार्य का गुणवत्ता की जांच कराकर प्रमाणित होने पर अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए निलम्बन या बर्खास्त करने की अनुशंसा करने की मांग की है. उन्होंने जमशेदपुर में व्याप्त भ्रष्टाचार को नियंत्रण करने हेतु इसकी जांच को अति आवश्यक बताया है तथा लोकतंत्र में वरीय लोकसेवक को उसका कर्त्तव्य भी याद दिलाया है. विजय भूषण के पास इतने अतिरिक्त कार्यभार, इसलिए कीताडीह में उन पर जनता ने गंभीर आरोप लगाए. जिला परिषद के विकास कार्य में. अन्य क्षेत्रों में भी उनपर कई आरोप हैं.
तेजतर्रार कनीय अभियंता विजय भूषण की हर उन सरकारी दफ्तरों में तूति बोलती हैं जहां उनके पास प्रभार सरकार ने दे रखा है. 20 सालों से उनका एक स्थान पर रहना चर्चा का विषय बना हुआ है. यही कारण ताजा मामला जनता को जिम्मेदार, ठेकेदार और प्रतिनिधियों द्वारा बेवकूफ समझने की ओर इशारा करता हैं. खैर जानकारी के अनुसार कनीय अभियंता विजय भूषण के पास मंगल कालिंदी, संजीव सरदार, समीर मोहंती, रामदास सोरेन (अभी स्व.) का इलाका, सांसद का इलाका, 16 पंचायत, जिला परिषद, मनरेगा, पंसस, कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, ITDA और NREP विभाग इत्यादि हैं, जहां हुए टेंडर की अगर जांच हुई तो कोषागार घोटाले जैसे बड़े राज खुलेंगे और जमशेदपुर जिला प्रशासन पर एक बड़ा दाग लगने से कोई नहीं रोक सकता.
कनीय अभियंता विजय भूषण के खिलाफ RTI, जवाब मिला तो खुलेगी पोल
आरटीआई कार्यकर्त्ता कमलेश कुमार ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अन्तर्गत बीडीओ से सूचना एवं सुसंगत कागजात अभिप्रमाणित उपलब्ध कराने की मांग की है.
जमशेदपुर प्रखण्ड कार्यालय में वर्ष 2007 से अब-तक कुल कितने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, कितने की संख्या में पदस्थापित हैं तथा उक्त प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, कनीय अभियंता, सहायक अभियता का पदस्थापन की तिथि एवं स्थानान्तरण की तिथि वर्ष 2007 से अब तक की उपलब्ध कराई जाये.
प्रखण्ड विकास कार्यालय जमशेदपुर में विकास कार्य हेतु कनीय अभियंता, सहायक अभियंता की पदस्थापना तारीख एवं स्थानान्तरण की तिथि तथा स्थानान्तरण से संबंधित सुसंगत कागजात अभिप्रमाणित उपलब्ध कराया जाये तथा किस-किस अभियंता को जमशेदपुर प्रखण्ड कार्यालय में विकास कार्य हेतु कार्य आवंटन है तथा उक्त कार्य आवंटन से संबंधित प्राक्कलन राशि की विवरणी अभिप्रमाणित उपलब्ध कराई जाये.
जमशेदपुर प्रखण्ड कार्यालय में विकास कार्य हेतु पदस्थापित कनीय अभियंता, सहायक अभियंता वर्ष 2007 से अब तक कितने विकास कार्य का निष्पादन कराया है तथा उक्त निष्पादन कार्य में खर्च किये गये राशि की विवरण उक्त कार्य के खर्च हेतु बनाये गये खर्च विवरणी, खर्च की संपुष्टि हेतु प्राप्त स्वीकृति पत्र एवं किस-किस विभाग से प्राप्त विकास मद की राशि प्रखण्ड को प्राप्त हुई है. सांसद, विधायक या अन्य स्रोत से, उन सभी का नाम, पदाधिकारी का नाम तथा उनके द्वारा किये गये राशियों की विवरणी प्रमाण तथा लेखा-जोखा की, उन्होंने किस आधार पर विकास कार्य के संवेदको को राशि आवंटन की है, उसकी सम्पूर्ण सूचना एवं सुसंगत कागजात अभिप्रमाणित उपलब्ध कराई जाये.
उन्होंने कहा है कि उपरोक्त सूचना मांगे जाने का उद्देश्य प्रखण्ड कार्यालय जमशेदपुर में विकास कार्य के लिए आवंटित राशि विभिन्न सरकारी विभाग एवं सांसद, विधायक फंड सहित अन्य स्रोत से प्राप्त राशियों का लूट-खसोट की गई है तथा राज्य के अर्थव्यवस्था को असंतुलित करने का कार्य किया गया है, जिस पर अंकुश लगाने हेतु आवश्यक है. फिलहाल फरवरी से अब तक आरटीआई कार्यकर्ता कमलेश की विभाग से कागजी कार्रवाई चल रही है.
