साकची – 8 लाख गबन के मामले में दो अभियुक्त किये गए आरोप मुक्त 

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर की प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सीमा मिंज की अदालत ने साकची निवासी उमेश साहू एवं मानगो निवासी विनय शर्मा के विरुद्ध आरोप सिद्ध नहीं होने पर उन्हें आरोप मुक्त कर दिया गया. इनके विरुद्ध वर्ष 27 अप्रैल 2011 में साकची निवासी गीतनंदन वार्ष्णेय के द्वारा न्यायालय में शिकायतवाद धारा 193, 194, 199, 341, 200, 467, 468, 471 के अंतर्गत दाखिल किया गया था.

आरोप था कि गीतानंद वर्षने के द्वारा पूर्व में दर्ज मुकदमा धोखाधड़ी कर ₹800000 का गबन करने में उपरोक्त दोनों अभियुक्त झारखंड उच्च न्यायालय में फर्जी दस्तावेज दाखिल कर जमानत लिए थे. इसी मामले को लेकर न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराया गया. न्यायालय में विचारण के दौरान शिकायतकर्ता के द्वारा दस्तावेज एवं गवाही नहीं देने के कारण आरोप सिद्ध नहीं हो पाया. बचाव पक्ष की तरफ से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू एवं बबिता जैन ने न्यायालय के समक्ष धारा 245 सीआरपीसी के साथ 268 बीएनएनएस 23 के अंतर्गत आवेदन देकर अपना पक्ष रखा था.

सोनारी : पैतृक जमीन पर कब्जा करने के आरोप में कोर्ट ने लिया संज्ञान, बिल्डर समेत सभी अभियुक्तों को 17 जून को हाजिर होने का निर्देश

जमशेदपुर न्यायालय में सोनारी नया लाइन निवासी चंपा देवी ने अभियुक्त बिल्डर शैलेश जैन उर्फ शेरू, दर्शन जैन, बसंत अग्रवाल, योगेश सडेरा, दयाल सिंह, दीपक नाग एवं ललित कुमार सिन्हा के विरुद्ध गत 26 मार्च 2025 को एक शिकायत वाद दाखिल कराया था. शिकायतकर्ता ने अभियुक्तों के विरुद्ध उनकी पैतृक संपत्ति पर फर्जी दस्तावेज बनाकर जबरन कब्जा करना और विरोध करने पर चंपा देवी एवं उनके पति धनेश्वर सिंह को गाली गलौज कर मारपीट कर जबरन हस्ताक्षर करवाने का प्रयास एवं जाति सूचक गाली गलौज कर मकान से निकाल दिए जाने का आरोप लगाया गया था.

इस घटना को लेकर चंपा देवी के द्वारा सोनारी थाना में गत 26 फरवरी 2025 को लिखित आवेदन, उपायुक्त, वरीय पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुसूचित जनजाति आयोग को शिकायत की थी. इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय में शिकायत वाद दाखिल कराया गया. न्यायालय के समक्ष शिकायतकर्ता के अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू एवं बबिता जैन ने साक्षी एवं दस्तावेज प्रस्तुत किये गए, जिसपर पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए 17 जून 2026 को अभियुक्तों की उपस्थिति निश्चित की है. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की न्यायालय से यह फैसला सुनाया गया.

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