Jamshedpur : संवैधानिक लोकतांत्रिक अधिकार पर सवाल उठाने का किसी को अधिकार नहीं : कुलबिंदर

SHARE:

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर से क़ौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने भारतीय संविधान प्रदत अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा इन अधिकारों पर सवाल उठाने का अधिकार भारत के किसी भी संस्था (स्तंभ) को नहीं है।

संविधान के अनुच्छेद 19 से 22 तक आम नागरिक के अधिकार तथा अनुच्छेद 29 एवं 30 के तहत अल्पसंख्यकों को अधिकार निहित है। सफल लोकतंत्र की आत्मा जन आंदोलन है और सत्ता, संस्था और व्यवस्था से सवाल पूछना है। 

Gambhir Car Associate Motion Ads Motion Ads

जहां देश का सिस्टम नागरिकों को उनके अधिकार से वंचित करने में लगा हो और जन आकांक्षाओं की पूर्ति ईमानदारी से नहीं कर रहा है। तो स्वाभाविक है कि वह न्यायपालिका की शरण में जाएगा। यदि न्यायपालिका का आचरण भी कार्यपालिका की तरह होगा तो नागरिक किसके भरोसे रहेगा। इस अधिवक्ता के अनुसार न्यायमूर्ति मुख्य न्यायाधीश पीएन भगवती ने 1980 में जनहित याचिका की शुरुआत की और इसके मार्फत लोगों की आकांक्षाएं पूर्ति करने को सरकार विवश है।

मनमोहन सिंह ने साल 2005 में सूचना का अधिकार दिया जिसके तहत नागरिक एवं न्यायपालिका की सक्रियता बढ़ी और प्रभावशाली मंत्री एवं अधिकारियों को जेल की हवा खानी पड़ी और घोटाले उजागर हुए। वर्तमान सरकार इस सूचना के अधिकार को कमजोर निरंतर करती जा रही है इस पर सारे सिस्टम खामोश है।

कोई भी सांस्थानिक प्रधान यदि बेरोज़गार युवाओं, आरटीआई कार्यकर्ताओं, मीडिया कर्मियों और असहमति व्यक्त करने वालों की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवी” से करता है तो यह एक तरह से लोकतंत्र की मूल आत्मा और उसकी बुनियाद पर चोट है? क्या यह संवैधानिक संयम और गरिमापूर्ण कथन है?

[ays_poll id=1]
सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें