फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर के सीएच एरिया निवासी कारोबारी देबांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले में एसएसपी पीयूष पांडेय ने मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। एसएसपी ने बताया कि 13 जनवरी को हुए अपहरण के बाद से ही पुलिस की कई टीमें लगातार जांच और छापामारी में जुटी हुई थीं। पुलिस की पहली प्राथमिकता कैरव गांधी की सुरक्षित बरामदगी थी, जबकि दूसरी प्राथमिकता अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी रही।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अपहरण के बाद परिजनों के पास रंगदारी की मांग को लेकर फोन आया था, लेकिन पुलिस ने किसी भी तरह की रकम देने से साफ इनकार कर दिया और अपहरणकर्ताओं को पकड़ने की रणनीति पर काम करती रही। एसएसपी पियुष पांडेय ने बताया कि अपहरण शहर के सबसे व्यस्त इलाके सोनारी–कदमा लिंक रोड से किया गया था। अपहर्ताओं ने पुलिस का स्टीकर लगी गाड़ी का इस्तेमाल कर युवक को अगवा किया और मौके पर वाहन छोड़कर फरार हो गए।

लगातार तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर पुलिस को कैरव की सटीक लोकेशन का पता चल गया था। पुलिस की बढ़ती दबिश से घबराकर अपराधियों ने चौपारण और बहरी के बीच सुनसान इलाके में कैरव गांधी को छोड़ दिया, जहां आगे से आ रही पुलिस टीम ने उसे सुरक्षित बरामद कर लिया।

बरामदगी के बाद पुलिस ने कैरव की बात परिजनों से कराई और 13 दिनों बाद युवक को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। एसएसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि कैरव के साथ किसी प्रकार की मारपीट या शारीरिक शोषण नहीं किया गया था, हालांकि उससे पैसे की मांग जरूर की गई थी।

एसएसपी पियुष पांडेय ने कहा कि पुलिस की सख्त कार्रवाई के कारण ही अपहरणकर्ताओं को युवक को छोड़ना पड़ा। फिलहाल पुलिस की टीमें अपहरण में शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए मिशन मोड में काम कर रही हैं और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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