टाटा स्टील की नौकरी छोड़कर अपने शौंक को प्रोफेशन था बनाया

पूरे भारत में ढोलक बजाने के लिए 10वें रैंक में थे प्रसिद्ध

लखबीर सिंह लक्खा के साथ भी कई सालों तक बजा चुके हैं ढोलक

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर में बसे गीत संगीत प्रेमियों में बुधवार को एक बड़ी शोक की लहर दौड़ पड़ी. दरअसल, कदमा उलियान स्थित रामजी पथ में रहने वाले भारत के नामचीन कलाकार रमेश दास ( उम्र करीब 70) का बुधवार को निधन हो गया. वह सिंगर श्रद्धा दास के पिता थे. रमेश दास का हंसमुख चेहरा उन्हें हर दिल अजीज बनाता था. गोलपहाड़ी गुरुद्वारा से उनका खासा लगाव था. वह अपनी बेटी के साथ अक्सर गुरमत समागमों में संगत करने आया करते थे. जानकारी के अनुसार कैंसर की बीमारी से ग्रसित थे और टाटा के अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांसे ली. गुरुवार सुबह 10 बजे उनके कदमा आवास से अंतिम शव यात्रा निकाली जाएगी. उनके निधन पर गोलपहाड़ी गुरुद्वारा के प्रधान लखविंदर सिंह, सिख स्त्री सत्संग सभा की प्रधान परमजीत कौर, युवा कीर्तनी (हर की उसतत वाले) ज्ञानी मनप्रीत सिंह ने गहरा शोक प्रकट किया है. आपको बता दें कि रमेश दास की मां अभी भी जीवित हैं और उनके लिए यह सदमा सबसे गहरा है. गोलपहाड़ी गुरुद्वारा में उनकी बेटी श्रद्धा दास की यह गुरवाणी शब्द “जिन प्रेम कियो तिन ही प्रभु पायो” संगत के दिलो दिमाग में बसी हुई है, जिसमें वह अपनी बेटी को साज बजाकर सहयोग कर रहे थे.

दोनों बेटियों और परिवार के साथ रमेश

रमेश दास बहुत अच्छे ढोलक के वादक थे. पूरे भारत में ढोलक बजाने के लिए 10वां रैंक था. उन्होंने अपनी बेटी श्रद्धा दास को कड़ी मेहनत करके इतना परफेक्ट रूप से तैयार किया कि वह चार बार टीवी में सिंगिंग शो में छा चुकी थी. राइजिंग स्टार में दोनों पिता पुत्री की जोड़ी परफॉर्म कर चुके थे. उसमें शंकर महादेवान और दिलजीत सिंह जज थे. तब शंकर महादेवन ने उनकी तारीफ करते हुए कहा था कि हमारे बॉलीवुड में ऐसा ढोलक वादक नहीं है. रमेश दास मुंबई से हरमुनियम के कुछ ऐसे लेसन सीख के आये थे कि वह जमशेदपुर में किसी के पास नहीं थे. फिर उन्होंने क्लास करानी शुरू की. उनसे सिखने वाले स्टूडेंट ऑल ऑवर वर्ल्ड से ऑनलाइन क्लासेस करते थे. पाकिस्तान से भी लोग सीखते थे. हर तरह के साज बनाने में उन्हें महार्थ हासिल थी.

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