फतेह लाइव, रिपोर्टर.
आज घाटशिला विधानसभा उप चुनाव की मतगणना पूरी हुई और परिणाम ने एक बार फिर यह स्पष्ट संदेश दिया कि जनता किसके साथ खड़ी है। कुल 1,91,314 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया, जिसमें महागठबंधन के साझा प्रत्याशी सोमेश सोरेन ने 1,04,794 मत प्राप्त कर 54.78% वोट शेयर के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की। अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के बाबूलाल सोरेन को उन्होंने 38,534 मतों से हराया।
भाजपा प्रत्याशी को इस बार 66,270 मत (34.64%) मिले, जो पिछले चुनाव की तुलना में काफी कम हैं। वहीं झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के रामदास मुर्मू ने 11,542 वोट हासिल किए — पिछली बार से लगभग तीन हजार अधिक, जो उनके जनाधार में बढ़ोतरी का संकेत है।
इस उप चुनाव में दोनों ही दलों के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर थी। भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कई मौजूदा मुख्यमंत्रियों तक ने सभाएँ कीं, जबकि झामुमो की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, और कई मंत्रियों व विधायकों ने चुनावी मोर्चा संभाला।
लेकिन असल फर्क जहाँ पड़ा, वह था जनसंपर्क और ज़मीन से जुड़ाव। भाजपा जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों से दूरी बनाए रही, वहीं झामुमो के प्रभारियों ने गाँव-गाँव, घर-घर जाकर जनता से संवाद किया और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी।
2024 के चुनाव में पिता–पुत्र (चंपई सोरेन व बाबूलाल सोरेन) अपने-अपने क्षेत्रों में प्रचार में व्यस्त थे, तब भाजपा को 75 हजार से अधिक वोट मिले थे। मगर इस उपचुनाव में पूरी ताक़त झोंकने के बावजूद वोट कम होना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण संदेश है।
महिलाओं की भागेदारी भी बहुत अहम साबित हुई।इस उपचुनाव में दोनों ही दलों में महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका बहुत ज्यादा रही थी। सबसे अहम बात यह जीत केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि दिवंगत विधायक स्व. रामदास सोरेन के प्रति जनता की श्रद्धांजलि भी है। घाटशिला की जनता ने आगे का बागडोर उनके युवा पुत्र सोमेश सोरेन के हाथों में सौंपकर विकास, स्थिरता और नई पीढ़ी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। घाटशिला का यह जनादेश साफ़ है—जो ज़मीन से जुड़ेगा, वही जनता के दिल में जगह पाएगा।
