ना नया जूता और ना ही प्रबंधन के खर्च पर बाहर जाने पर यात्रा भत्ता

टाटा स्टील के कर्मचारियों से सालाना 720 से 960 रुपए तक लिया जाता है चंदा

चरणजीत सिंह.

जमशेदपुर में टाटा वर्कर्स यूनियन के कोष का दुरुपयोग रोकने के लिए कोषाध्यक्ष आमोद दुबे बेहद सख्त हो चुके हैं. उन्होंने यूनियन के लेखा विभाग के कर्मचारियों को साफ निर्देश दिया है कि ऑफिस ऑर्डर या सर्कुलर के बगैर कोई विपत्र उनके सामने पेश नहीं किया जाय. उनका साफ निर्देश है कि जिस मद में खर्च करने का सर्कुलर या ऑफिस ऑर्डर है, उसी मद का विपत्र पारित किया जाएगा. कुछ ऐसी हलचल इन दिनों टाटा वर्कर्स यूनियन में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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टाटा स्टील के अधिकतर कर्मचारी टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्य हैं. ऐसे भी बहुत कर्मचारी हैं जो टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्य नहीं हैं और वे यूनियन को चंदा भी नहीं देते हैं. आशय यह है कि यूनियन के सदस्य होने की बाध्यता नहीं है. टाटा वर्कर्स यूनियन द्वारा ओल्ड सीरीज के कर्मचारियों से सालाना 960 रुपए चंदा लिया जाता है, जबकि न्यू सीरीज के कर्मचारियों से सालाना 720 रुपए. यूनियन कोषाध्यक्ष आमोद दुबे को लगता है कि अनावश्यक खर्च पर लगाम लगाई जाय तो यूनियन का चंदा कम करने का नया विकल्प खुलने की संभावना बन सकती है.

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टाटा वर्कर्स यूनियन के कोषाध्यक्ष आमोद दुबे के संज्ञान में कई ऐसे खर्च की बातें आई हैं जिस पर सवाल उठे हैं. यह बात सार्वजनिक हुई है कि टाटा स्टील प्रबंधन के खर्च पर प्रशिक्षण या अध्ययन यात्रा के लिए यूनियन के ऑफिस बेयरर शहर से बाहर जाते हैं तो यूनियन कोष से भी प्रतिदिन के 750 रुपए के हिसाब से यात्रा भत्ता लिया जाता है.

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चर्चा है कि आमोद दुबे ने इससे संबंधित ऑफिस ऑर्डर या सर्कुलर की खोज शुरू की है. यूनियन के लेखा विभाग के कर्मचारियों से उन्होंने इस आशय का ऑफिस ऑर्डर या सर्कुलर तलब किया है. यूनियन के ऑफिस बेयरर को जूता खरीदने के 10/10 हजार दिए जाने के मसले पर छानबीन की गई तो यह बात सामने आई कि उनके पूर्ववर्ती के कार्यकाल में यह सब हुआ है.

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तय किया है कि उनके कार्यकाल में किसी भी ऑफिस बेयरर को न जूता मिलेगा न मोजा. आमोद दुबे चाहते हैं कि उनके कोषाध्यक्ष के कार्यकाल पर न अभी और न भविष्य में किसी तरह के सवाल उठाए जा सके. बहरहाल, उनके सख्त तेवर को देख टाटा वर्कर्स यूनियन के लेखा विभाग में हलचल तेज है.

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