टाटा वर्कर्स यूनियन की फाइनेंस कमेटी के कमेटी मेंबरों को कुछ नहीं मिला

राज खुला कि फाइनेंस कमेटी के नाम पर सिर्फ ऑफिस बेयरर्स ने लिए जूते

यूनियन कोष की लूट की तीसरी एजेंसी से स्वतंत्र जांच की भी उठी आवाज

चरणजीत सिंह.

टाटा वर्कर्स यूनियन के ऑफिस बेयरर्स यानी पदाधिकारी टाटा स्टील के मजदूरों से मिलने वाली चंदा की राशि को लूट रहे हैं. फतेह लाइव ने इसका खुलासा किया, तो टाटा स्टील के कर्मचारियों के साथ टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबर्स हतप्रभ हैं. टाटा वर्कर्स यूनियन के 214 कमेटी मेंबर्स में आपसी संवाद के एक वाट्सअप ग्रुप बना हुआ है.

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शनिवार की सुबह से वाट्सअप ग्रुप पर कमेटी मेंबर्स ने अपनी भड़ास निकालनी शुरू की. एक कमेटी मेंबर तो इतने आग बबूला हुए कि उन्होंने नायक मूवी का वह वीडियो क्लिप वायरल किया, जिसमें अनिल कपूर कहते हैं, यहां सब चोर हैं. खैर, वाट्सअप ग्रुप पर कमेटी मेंबर्स के आपसी संवाद से खुलासा हुआ कि फाइनेंस कमेटी के नाम पर सिर्फ यूनियन के ऑफिस बेयरर्स ने 10-10 हजार रुपए के जूते लिए है. जूते लेने वालों में यूनियन उपाध्यक्ष संजय सिंह भी है. ये वही संजय सिंह है जिन्होंने अपनी यूनियन के कर्मचारियों के बच्चों की बेहतर तालीम के लिए ब्याज मुक्त ऋण की सीमा बढ़ाने पर बखेड़ा किया.

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फाइनेंस कमेटी के सदस्यों ने खुलासा किया कि उन लोगों को 10-10 हजार के जूते नहीं मिले है, ना उन लोगों ने लिए है, जो लिए है, वो जानें.  यूनियन कोष की लूट की तीसरी एजेंसी से स्वतंत्र जांच की भी आवाज उठी है. कमेटी मेंबर्स चाहते है कि ऑफिस बेयरर्स द्वारा यूनियन कोष के दुरुपयोग का सारा मसला 214 कमेटी मेंबरों के सामने आना चाहिए.

टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबर्स के वाट्सअप ग्रुप में फतेह लाइव की खबर की स्क्रीन शॉट को कई बार शेयर किया गया. कुछ कमेटी मेंबर्स आश्चर्य जता रहे थे कि यूनियन के ऑफिस बेयरर्स इस तरह कर्मचारियों की राशि को कैसे लूट सकते हैं. कमेटी मेंबर ने यह भी आवाज उठाई कि यूनियन में हो रही लूट के मसले पर तुरंत कमेटी मीटिंग बुलाई जानी चाहिए जिसमें एनी अदर मेटर्स के तहत सवाल किया जा सके.

वाट्सअप ग्रुप में परिचर्चा के दौरान यूनियन कर्मचारियों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए ऋण सीमा बढ़ाने पर कमेटी मेंबर्स के अलग अलग सुझाव आए. कुछ का कहना था कि यह बढ़िया कदम है. अगर यूनियन अपने कर्मचारियों का ख्याल नहीं रखेगी तो और कौन रखेगा. कुछ का तर्क था कि ऋण सीमा बढ़ाना ठीक है, लेकिन कुछ ब्याज भी किया जाना चाहिए. कुछ यह भी चाहते थे कि यूनियन नेतृत्व को टाटा स्टील प्रबंधन से वार्ता कर कर्मचारियों को भी ब्याज मुक्त ऋण दिलाना चाहिए.

कुछ कमेटी मेंबर्स का दावा था कि एक साल से लंबित वेज रिवीजन से ध्यान भटकाने के लिए यूनियन कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए ऋण सीमा बढ़ाने का विवाद खड़ा किया गया. कुछ कमेटी मेंबर्स यूनियन नेतृत्व से बेहद निराश दिखे. उनका तर्क था कि इतनी सुविधाएं खत्म होती जा रही है तो इस नेतृत्व से किसी तरह की उम्मीद करना ही बेमानी है. ये सिर्फ लूटेंगे.

टाटा वर्कर्स यूनियन के कोष में ये हुई गड़बड़ी

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