फतेह लाइव, रिपोर्टर.
झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चल रहा अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है. सुरक्षाबलों की सटीक रणनीति और लगातार दबाव के चलते नक्सलियों के सभी मंसूबे नाकाम हो चुके हैं. हालात यह हैं कि नक्सली अब सिर्फ 10 किलोमीटर के सीमित दायरे में सिमटकर रह गए हैं और उनका बचना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.
सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि नक्सलियों को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि हम इसमें सफल होंगे.
17 नक्सलियों के एनकाउंटर के बाद जवानों के हौसले बुलंद
सारंडा जंगल में 17 नक्सलियों के एनकाउंटर के बाद झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों के जवानों व अधिकारियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं। बचे हुए नक्सलियों के सफाए के लिए पूरे सारंडा क्षेत्र को घेराबंदी में ले लिया गया है. अधिकारियों ने इस अभियान को अंतिम रूप देने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है, जिसके तहत दिन-रात ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
साल 2026 के पहले ही महीने में एक साथ 17 नक्सलियों का मारा जाना नक्सली नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जिस तरह से अभियान आगे बढ़ रहा है, उससे नक्सलियों का पूरी तरह सफाया तय है.
सारंडा को नक्सलियों का अंतिम और एकमात्र मजबूत गढ़ माना जाता है. इसे फतेह करने के लिए जवान और अधिकारी दिन-रात एक किए हुए हैं. नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को रोकने के लिए हर संभव कोशिश की. जंगलों और रास्तों में जगह-जगह आईईडी बिछाई गईं. पिछले साल कई इलाकों में विस्फोट भी हुए, लेकिन जवानों के हौसले और अधिकारियों की रणनीति के सामने नक्सली टिक नहीं पाए.
नतीजा यह रहा कि सुरक्षाबल नक्सलियों के गढ़ में घुसकर 17 नक्सलियों को मार गिराने में सफल रहे.
संयुक्त अभियान के दौरान झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ ने नक्सलियों पर जबरदस्त दबाव बनाया. लगातार जवाबी कार्रवाई और सटीक फायरिंग के चलते नक्सलियों को पीछे हटना पड़ा. स्थिति यह बन गई कि नक्सली महज बस एक सीमित क्षेत्र तक रह गए हैं. सूत्रों के मुताबिक, घेराबंदी इतनी मजबूत है कि नक्सलियों के पास न तो सुरक्षित मूवमेंट का रास्ता है और न ही जंगल की आड़ लेकर भागने का मौका. इलाके में सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है और अतिरिक्त बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
