फतेह लाइव, रिपोर्टर.
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गए. इसके बाद नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार सरकार पर उनका सहयोग हमेशा की तरह बना रहेगा. राजनीतिक घटना क्रम को देखते हुए नीतीश कुमार ने जदयू विधायक व सांसदों की एक बैठक बुलायी. इस बैठक में सभी विधायक, सांसद व एमएलसी शामिल हुए है. बैठक को संबोधित करते हुए कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में आएंगे. पार्टी की बैठक में यह निर्णय हुआ कि शनिवार को निशांत कुमार जदयू की सदस्यता लेंगे.
इसके बाद सक्रिय राजनीति अपनी पैठ बनाएंगे. राजनीति जानकारों को कहना है कि बिहार में जो सत्ता हस्तांतरण का खेल होगा. उसमें जदयू की ओर से नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जदयू कोटे से उपमुख्यमंत्री पद दिया जाएगा. साथ ही एक और उपमुख्यमंत्री जदयू कोटे का ही होगा. इसमें ओबीसी या फिर दलित समाज का होगा. बिहार की कमान भाजपा के हाथों होगी. मुख्यमंत्री भाजपा का होगा. स्पीकर पद को लेकर भाजपा व जदयू के बीच सहमति नहीं बन पायी है.
राजनीति जानकारों का कहना है कि भाजपा के कोटे के सभी विभाग जदयू को मिलेगा. साथ ही मुख्यमंत्री भाजपा का और जदयू के सभी विभाग भाजपा को दे दिया जाएगा. इसी पर आम सहमति बनी है. साथ ही साथ एमएलए या फिर एमएलसी बनाने पर जोर दिया गया. फिलहाल नीतीश कुमार बिहार विधान परिषद के सदस्य है. राज्यसभा जाने के बाद वह खाली हो जाएगा. ऐसा अनुमान है कि पिता के स्थान पर बेटे को ही बैठाया दिया जाए. क्योंकि उपमुख्यमंत्री बनने के छह महीने के बाद एमएलए या फिर एमएलसी बनने के अनिवार्यता है. बैठक के दौरान बिहार की राजनीति घटनाक्रम पर विशेष रुप से चर्चा की गयी. बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने पर भी चर्चा की गयी. इस दौरान सांसद ललन सिंह ने कहा कि पार्टी में नीतीश कुमार की मर्जी के बिना कुछ भी नहीं होता है. उनकी मर्जी थी राज्यसभा जाने की, इस पर आम सहमति बनी जिसके बाद यह निर्णय लिया गया.
आरसीपी सिंह के बयान के बाद ललन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि जो पार्टी है ही नहीं, उनकी बातों पर कुछ कहना न्यायसंगत नहीं है. जदयू में नीतीश ही प्रमुख है, उनके कहने पर ही पार्टी किसी काम को आगे बढ़ाती है और भविष्य में उन्ही के निर्देशों का पालन होगा. भाजपा के विधायकों का कहना है कि नीतीश कुमार के शासनकाल में सिर्फ अफसरों की चलती है. बिहार सरकार में अफसर जो चाहते है, वही होता है. इस पर सांसद ललन सिंह ने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता है कि नीतीश कुमार के रहते अफसर मनमानी कर सकते हैं. 2005 से लेकर अब तक नीतीश कुमार ने अपने काम के आधार पर लोकप्रियता हासिल की. उनका कहना है कि बिहार की जनता को ज्यादा से ज्यादा से योजनाओं का लाभ मिले, बिहार का नाम विकसित राज्य की श्रेणी में कैसे आए, इस पर काम करना और अधिकारियों को अमलीजामा पहनाने के लिए निर्देश देना. उन्होंने काम के आधार पर ही विकास पुरुष का तगमा हासिल किया.
