आखिर इसी वायदे पर ही संजीव चौधरी को दो दफा चुना गया अध्यक्ष

सिर्फ सात माह बाद टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव, सो सब टेंशन में

ओल्ड और न्यू सीरीज के कर्मचारियों की होगी अलग अलग एमजीबी

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

18 गुजरने को हैं. इंतजार की इंतहा हो चुकी है. एक जनवरी 2025 से टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट के कर्मचारियों का नया वेतनमान लागू हो जाना था. हुआ नहीं. मगर अब उम्मीद है कि एक पखवाड़े के भीतर वेज रिवीजन के समझौते पर टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच समझौता हो जाएगा. टाटा वर्कर्स यूनियन के लिहाज से वेज रिवीजन बेहद मायने रखता है, क्योंकि सिर्फ सात माह बाद चुनाव होना है. यूनियन के पदाधिकारी हो या कमेटी मेंबर, सबको मालूम है कि हर आड़े तिरछे सवालों का जवाब देना ही होगा.

हरेक वेज में कुछ नए भत्ते अवश्य आए हैं, इस बार के एलाउंस पर जिज्ञासा

यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी ने विपक्षी नेता के तौर पर आर.रवि प्रसाद के कार्यकाल में हुए वेज रिवीजन समझौते की कमियां गिना कर सत्ता हासिल की. उस वक्त वेज समझौता में विलंब पर टुन्नू चौधरी बोलते थे कि एलाउंस के एरियर का नुकसान हुआ है. पिछले वेज समझौता में डीए की अधिकतम सीमा को फ्रीज कर दिया गया है. वो बड़ा मुद्दा बना था. अब टुन्नू चौधरी पर दबाव है कि आर रवि प्रसाद के कार्यकाल में हुए वेज समझौता से बेहतर कर दिखाये. खैर, वेज पर कंपनी प्रबंधन के बीच वार्ता का दौर लगातार चल रहा है. 50 दफा से अधिक की बैठकी हो चुकी है. बहुत कुछ तय हुआ है तो बहुत कुछ बाकी भी है.

हरेक वेज में कुछ नए भत्ते अवश्य आए हैं, इस बार के एलाउंस पर जिज्ञासा

वेज रिवीजन का समझौता होता है तो कर्मचारियों का डीए बेसिक में मर्ज हो जाता है। फिर एमजीबी (मिनिमम गारंटेड बेनिफिट) की राशि भी उसमें जुड़ जाती है. इसके बाद नया बेसिक यानी मूल वेतन तय होता है. आर रवि प्रसाद के नेतृत्व में पिछला वेज रिवीजन समझौता हुआ था, तो कंपनी प्रबंधन ने ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों की डीए की अधिकतम राशि पर सीलिंग लगा दी थी. आशय यह था कि उससे अधिक रकम को बेसिक में मर्ज नहीं किया जाएगा. सीलिंग की अधिकतम सीमा की राशि भी पौने लाख के बराबर है. ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों का डीए प्रतिशत में निर्धारित होता है. इस कारण दो वेज समझौता के अंतराल में उनके डीए की कुल राशि बहुत हो जाती है. ऐसा एनएस ग्रेड के कर्मचारियों के साथ नहीं होता.

डीए की अधिकतम सीमा फ्रीज होने के कारण बेहतर एमजीबी का दबाव

डीए पर सीलिंग के कारण ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों की उम्मीद एमजीबी पर है. उनके लिए वेज समझौता का मुख्य आकर्षण अब एमजीबी ही है. फिलहाल प्रबंधन 10 फीसद तक एमजीबी देने का संकेत दे रहा है तो यूनियन नेतृत्व चाहता है कि यह आंकड़ा 13 प्रतिशत तक पहुंच जाये. आखिर रवि के कार्यकाल में 12.75 फीसद एमजीबी मिला था. जहां तक एनएस कर्मचारियों की बात है तो उन्हें पीएन सिंह के जमाने से ओल्ड ग्रेड के समकक्ष कर्मचारियों के समान एमजीबी की औसत राशि मिलती रही है.

पीएन के कार्यकाल में एनएस के कुछ कर्मचारियों को 35 से 40 फीसद तक एमजीबी की रकम मिली तो रवि के कार्यकाल में भी एनएस के कुछ कर्मचारियों को 28 प्रतिशत तक एमजीबी मिला है. टुन्नू एंड टीम की कोशिश है कि एनएस के लिए अलग से एमजीबी तय किया जाये. उन्हें ओल्ड ग्रेड के समकक्ष कर्मचारियों के वेतनमान का 15 फीसद तक एमजीबी दिलाने की वार्ता चल रही है. तय कितने पर होगा? अभी से तय करना बेहद मुश्किल है.

रघुनाथ पांडेय के कार्यकाल में न्यू सीरीज का समझौता हुआ था तो उसमें ओल्ड सीरीज के कर्मचारियों की कई अहम सुविधा नदारद थी. टिस्को पेंशन स्कीम (टैप्स), सेवानिवृति के बाद मुफ़्त मेडिकल सुविधा, प्रतिशत में महंगाई भत्ता, सालाना 3 फीसद वेतन वृद्धि जैसी बातें न्यू सीरीज के गठन के समझौता में नहीं थी. न्यू सीरीज बनने के बाद पहला वेज समझौता हुआ तो पीएन सिंह ने टैप्स लागू कराया. ओल्ड और न्यू ग्रेड की मैपिंग कर एमजीबी की समान राशि की राह बना दी. आर रवि प्रसाद ने सेवानिवृति के बाद निःशुल्क मेडिकल सुविधा का इंतजाम करा दिया. अब प्रतिशत में डीए अथवा डीए का प्रति प्वाइंट वैल्यू तीन रुपए से बढ़ाने और सालाना वेतन वृद्धि प्रतिशत में कराने की मांग पर फैसला शेष है.

एनएस कर्मचारियों का डीए नहीं सुधरा तो जवाब देना होगा मुश्किल

यूनियन नेतृत्व इशारा कर रहा है कि एनएस के डीए में बड़ा बदलाव संभव नहीं है. फिक्स डीए की राशि जरूर बढ़ेगी. रवि के कार्यकाल में फिक्स डीए को 500 से बढ़ा कर 800 किया गया था. तकरीबन 60 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी. इस बार एनएस कर्मचारियों को लगता है कि बहुत कम भी होगा तो फिक्स डीए का आंकड़ा 2 हजार से 2500 तक अवश्य पहुंच जाएगा. होगा क्या? अभी इस पर अंतिम बात बाकी है.

किसी को एलाउंस के एरियर की आस है तो उसे निराशा हाथ लगेगी

आर रवि प्रसाद के नेतृत्व में पिछला वेतन समझौता 19 सितंबर 2019 को हुआ था. उस समय कर्मचारियों को टीम परफार्मेंस रिवार्ड (टीपीआर) के रूप में नया भत्ता मिला था, जिसमें कर्मचारियों (ग्रुप वार) न्यूनतम 1000 व अधिकतम 1500 रुपये का मासिक लाभ मिलना शुरू हुआ था. नया इंटरनेट एलाउंस शुरू हुआ था. एजुकेशन एलाउंस में आमूलचूल परिवर्तन किया गया था. पहले सिर्फ कंपनी एडेड स्कूलों में क्लास 1 से 10 तक पढ़ने वाले कर्मचारी के बच्चों को मासिक 3 सौ रुपए बतौर भत्ता दिए जाते थे. पिछली बार नर्सरी से इंटर तक के बच्चे की किसी भी स्कूल में पढ़ाई के लिए मासिक भत्ता बढ़ा कर 6 सौ रुपए किया गया.

पिछले वेज में मिली 5 सौ नई नौकरी, इस दफा भी नए रोजगार की उम्मीद

हरेक वेज समझौता में कोई न कोई नया भत्ता मिलता रहा है. इस बार पेंशन स्कीम से जुड़ा कोई भत्ता सामने आ सकता है और भी भत्तों की कर्मचारियों को उम्मीद तो है. पिछली बार बिना इंटरव्यू के 500 नई नौकरी का समझौता हुआ था. कर्मचारी पुत्रों के लिए नया रोजगार. वेज समझौता के बाद टुन्नू चौधरी यूनियन अध्यक्ष चुने गए थे. सो, पूरी बहाली उनकी देखरेख में हुई. श्रेय भी लिया. इस वेज रिवीजन में भी रोजगार के नए द्वार की सबको आशाएं हैं, विशेष कर यूनियन पदाधिकारियों और कमेटी मेंबरों को.

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