एनएस के कमेटी मेंबरों के सामने सतीश ने वायदा किया कि बेहतर वेज के लिए यूनियन अध्यक्ष के हर निर्णय के साथ

टुन्नू चौधरी के बोल, टाटा वर्कर्स यूनियन का कौन अध्यक्ष कर्मचारियों के लिए बेहतर वेज रिवीजन नहीं चाहेगा

टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी का यह तर्क भी रहा कि जो मांगा जाएगा वो सब प्रबंधन नहीं देता

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

टाटा स्टील में न्यू सीरीज के सात हजार से अधिक कर्मचारियों ने बेहतर वेज रिवीजन के लिए टाटा वर्कर्स यूनियन पर दबाव और बढ़ा दिया है. एनएस ग्रेड के कमेटी मेंबरों ने सप्ताह भर पहले टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी, महामंत्री सतीश कुमार सिंह समेत और ऑफिस बेयरर्स से सीधा संवाद किया. उस दौरान वेज रिवीजन पर टाटा स्टील प्रबंधन से अब तक हुई वार्ता और आगे की दिशा का इशारा मिल गया.

सीधे संवाद के दौरान कहा गया कि वेज रिवीजन पर सब कुछ यूनियन अध्यक्ष के रुख पर निर्भर करता है. आर रवि प्रसाद के अध्यक्ष रहते वेज रिवीजन पर बात नहीं बन रही थी तो तीन सप्ताह तक यूनियन बनाम प्रबंधन के बीच हर तरह की वार्ता रोक दी गई थी. पीएन सिंह यूनियन अध्यक्ष थे तो वेज रिवीजन पर जिच कायम हुई, तो उन्होंने ड्यूटी के लिए स्कूटर निकाल लिया था. हर वक्त उनका साथ दिया गया. यूनियन अध्यक्ष जो भी फैसला करेंगे, उनका भरपूर साथ दिया जाएगा.

टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय के सभागार में कमेटी मेंबरों के बीच अध्यक्ष संजीव चौधरी बोले कि कंपनी प्रबंधन ने कर्मचारियों की संख्या और ग्रेड के मुताबिक सीटीसी का पूरा ब्यौरा दिया है. अभी बातचीत शुरुआती चरण में है. उन्होंने कहा कि टाटा वर्कर्स यूनियन का कौन अध्यक्ष होगा जो बेहतर वेज रिवीजन नहीं चाहेगा. एनएस ग्रेड के कर्मचारियों से जुड़ी बातों को शिद्दत के साथ प्रबंधन के सामने रखा जाएगा. सब बात होगी.

इतना जरूर है कि कंपनी प्रबंधन भी हर मांग को नहीं मान लेता है. उन्होंने कहा कि वे अकेले वेज पर प्रबंधन से कभी वार्ता नहीं कर सकते. शीर्ष तीन पदाधिकारी वार्ता करते रहे हैं. आगे भी करेंगे. टुन्नू ने बाकी ऑफिस बेयरर्स को भी प्रेरित किया कि अपनी बात रखें.

यूनियन पदाधिकारियों के बोलने की बारी आई तो कोषाध्यक्ष अमोद दुबे बोले कि वे हमेशा सत्य के साथ खड़ा रहे हैं. जो सही बात होगी, कर्मचारियों के हित से जुड़ा मसला होगा तो वे किसी के भी सामने बोलने को तैयार है. यूनियन उपाध्यक्ष राजीव चौधरी ने कहा कि एनएस कर्मचारियों की मांगें जायज है. उन्होंने कुछ मसले पर यूनियन महामंत्री के तर्कों का भी समर्थन किया.

सहायक सचिव अजय चौधरी बोले कि पिछला वेज वाहियात था. इतना जरूर है कि वर्तमान अध्यक्ष संजीव चौधरी उससे बेहतर ग्रेड कराएंगे. जहां तक एनएस ग्रेड के डीए की बात है तो यह बढ़ना ही चाहिए. जब एनएस ग्रेड बना था तभी प्रति प्वाइंट वेल्यू तीन रुपए निर्धारित हुआ था. इसे बढ़ाना ही होगा.

यूनियन उपाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि एनएस के कर्मचारियों के वेतनमान का ढांचा ऐसा होना चाहिए कि ओल्ड ग्रेड की तरह बढ़ोत्तरी की राह बनी रहे. एनएस से सहायक सचिव चुने गए उपाध्यक्ष संजीव तिवारी और सहायक सचिव श्याम बाबू बोले कि डीए और सालाना इंक्रीमेंट ऐसे मुद्दे हैं जिस पर और समझौता नहीं किया जा सकता.

इस वेज समझौता में दोनों मसले पर सकारात्मक निर्णय होना ही चाहिए. यूनियन के डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष डॉ शाहनवाज आलम और सहायक सचिव नितेश राज एनएस के कमेटी मेंबरों से सीधे संवाद में शामिल नहीं हो पाए.

सतीश ने वो प्रसंग उठाए कि सब सुनते रह गए

टाटा वर्कर्स यूनियन के इतिहास में ऐसा कम रहा है जब कोई अध्यक्ष दोबारा निर्विरोध चुना जाय. संजीव चौधरी दोबारा भारी ताकत के साथ मजदूरों ने कुर्सी पर बैठाया है. वे बलशाली हैं.

टाटा वर्कर्स यूनियन में अध्यक्ष सर्वोच्च पद है. वो चाहते हैं तभी वेज अथवा किसी मसले पर मीटिंग होती है. वही तिथि तय करते हैं. वो जिस राह पर बढ़ेंगे, उनका हमराही बनने को तैयार हूं. पहले भी ऐसा हुआ है तो सबसे आगे रहे हैं.

2006 से यूनियन में हैं. बहुत कुछ देखे हैं. पी एन सिंह के वक्त वेज की वार्ता पर डायरेक्टर बंगला में ऑफिस बेयरर बैठते थे. अब चमरिया में. पी एन सिंह ढाई साल तक अध्यक्ष रहे हैं. क्या हुआ ? कैसे हुआ ? सब जानते हैं.

चार बार पंचिंग की व्यवस्था आई तो कमेटी मीटिंग बुलाई गई. मीटिंग के दौरान पीछे से पीएन सिंह प्रबंधन से बात करने निकल गए. सहायक सचिव था. उनके साथ गया था. कार पार्किंग में खड़ी रही. वार्ता कर वो आए तो बताए कि चार बार पंचिंग खत्म हो गई.

वेज पर वार्ता अटक जाने पर शाम में पी एन सिंह ने कहा था कि स्कूटर निकालना होगा. सुबह सबसे पहले कंपनी गेट पर पहुंच गया था. अध्यक्ष का आदेश हुआ तो उस वक्त सबसे आगे रहा हूं.

आर रवि प्रसाद अध्यक्ष बने थे तो मेडिकल एक्सटेंशन बंद होने के मसले पर विवाद हुआ था. फैसला हुआ कि सब लोग पंचिंग करेंगे. उसमें भी आगे रहा. आखिरकार तय हुआ कि रिटायर होने वाले सभी कर्मचारी को पांच साल तक 1.20/1.20 लाख रुपए मिलते रहेंगे.

आर रवि के समय ही वेज पर बात फंसने लगी थी तो उनका निर्देश आया कि अगले 21 दिन तक प्रबंधन से किसी मसले पर किसी स्तर पर बात नहीं होगी. उसमें भी साथ दिया.

कई बार सुनाया गया कि पिछला वेज बढ़िया नहीं हुआ था. पिछले वेज के दौरान महामंत्री के नाते वार्ता में रहा हूं. वर्तमान अध्यक्ष चाहे तो उन्हें वेज रिवीजन की वार्ता से अलग रख सकते हैं. उन्हें तनिक भी आपत्ति नहीं है. बस वेज बढ़िया हो.

प्रदीप ने पीएन के रहते धोखे की बात कही तो बिगड़ गए टुन्नू

वेज रिवीजन पर संवाद के दौरान कमेटी मेंबर प्रदीप दुबे ने कुछ ऐसी चुभती बात कह दी कि टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ टुन्नू बिगड़ गए. प्रदीप दुबे का कहना था कि अध्यक्ष बोलते कुछ है और करते कुछ और है. इससे धोखा मिलता है. पीएन सिंह के अध्यक्ष रहते भी धोखा हुआ था…प्रदीप की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि टुन्नू नाराज हो गए. टुन्नू ने प्रदीप को खूब सुनाया. जब कार्यक्रम खत्म हो गया तो टुन्नू चौधरी ने अकेले में प्रदीप दुबे को प्यार से समझाया कि सार्वजनिक तौर पर ऐसी बातें नहीं कही जाती.

यह कमेटी मेंबर थे मौजूद

बालाजी, बिजेंद्र शाह, हरेराम शर्मा, मंगल महतो, सुसांत शेखर, प्रदीप दुबे, राहुल श्रीवास्तव, मनोज कुमार शर्मा, देवन मिस्त्री, राजेश कुमार सिंह, चंदन गुप्ता, सुमन पांडेय, राकेश कुमार सिंह, शुभम कुमार मिश्रा, हरि ओम जायसवाल, रिंकू यादव, रूपेश पांडेय, निशांत जायसवाल, दिनेश कुमार, गिरीश, सत्य प्रकाश, गुंजन वर्मा, पवन, ज्ञान रंजन, मृत्युंजय मिश्रा, रवि उपाध्याय, श्याम नंदन, अनुप ठाकुर, ब्रजेश पांडेय, विवेक विक्की, बैजू पंडित, नीलेश सिंह, हेमंत कुमार, कुंदन कुमार, संतोष पांडेय, विकास दास, निरंजन प्रसाद, रमेश नाइक, श्याम सुंदर गोप, बसंत बाग, अमित कुमार, डी. भानु, पवन प्रकाश, परितोष सिंह आदि.

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