रेलवे पार्सल में लोडिंग अनलोडिंग के हुए टेंडर में बने नियमों का महीनों बाद भी नहीं हो रहा पालन

एक बोगी चावल चोरी के मामले में भी हो गया खेला!

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

टाटानगर में बतौर सीसीआई शंकर झा के अब गिने-चुने ही दिन बचे हैं. वह अब यहां अपना समय गुजार रहे. उनका प्रमोशन ACM में हो चुका है. बताया जाता है कि यात्री सुविधाओं से जुड़े किसी भी मामले में उन्होंने रूचि लेना लगभग छाेड़ दिया है. चर्चा है कि उनकी ठेकेदारों से गहरी छनती रही है. स्टेशन पर अनुबंधित लगभग सभी ठेकेदार इन दिनों मनमानी कर रहे है.

स्टेशन की सफाई, पार्सल से लेकर गुडस तक की गतिविधि समेत यात्री सेवा से जुड़े कई मामलों में एक भी रिपोर्ट बीते छह माह या उससे पहले सीसीआई ने वरीय अधिकारियों से नहीं की. कहा, तो यहां तक जा रहा है कि सीसीआई का यह मौन आने वाले समय में उन्हें बड़े संकट में डाल सकता है. बताया जाता है कि पिछले महीनों पार्सल में लोडिंग अनलोडिंग का टेंडर हुआ. इसमें एक चर्चित ठेकेदार की एंट्री हो गई. टेंडर नियम के अनुरूप ठेकेदार को एक हाईड्रालिक मशीन को उतारना था, जो अभी तक नहीं हुआ है. सूत्र यह बताते हैं कि पुराने ठेकेदार के प्रतिशत रेट को दर किनार किया गया और कम शुल्क में टेंडर किया गया, जबकि हर साल रेलवे का टेंडर शुल्क बढ़ता है?

बताया जाता है कि बीते साल ही गुड्स यार्ड में खड़े कंटेनर से चावल गायब होने के मामले में टाटानगर गुड्स के दो कर्मचारियों को जेल जाना पड़ा था. CGS को अग्रिम जमानत लेनी पड़ी, लेकिन 25 लाख से अधिक के गोलमाल के इस मामले से वाणिज्य विभाग के मेन कर्ता-धर्ता रहे CCI/TATA को आरपीएफ ने पूरी जांच प्रक्रिया से दूर रखा. आरपीएफ ने मामले में तब तक एक्शन शुरू नहीं किया जब तक की सीसीआई के ACM में प्रमोशन के लिए विजिलेंस क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं हो गयी. यह महज संयाेग था या सुनियोजित साजिश का हिस्सा?

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